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उपभोक्ता फोरम का फैसला:शर्तिया इलाज का दावा, डाॅक्टर अब देगा 1.28 लाख रुपए

बिलासपुर8 महीने पहले
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  • लखनऊ के सेक्सोलॉजिस्ट ने महंगी दवाएं दीं पर असर नहीं हुआ, 45 दिन में करें भुगतान

शारीरिक परेशानी के चलते बिलासपुर के युवक ने शर्तिया इलाज का विज्ञापन देखकर लखनऊ के डॉक्टर से इलाज कराया और उसकी दी हुई दवाएं खाईं पर कोई असर नहीं हुआ। इसमें उसके कुल 1 लाख 60 हजार रुपए खर्च हुए। उसने जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल कर डॉक्टर से खर्च की गई रकम वापस दिलाने की मांग की थी। फोरम ने डॉक्टर को 45 दिन के भीतर युवक को इलाज में खर्च राशि 1 लाख 10 हजार 607 अदा करने का निर्देश दिया है। डॉक्टर को इसके अलावा अलग से मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 15 हजार रुपए व परिवाद व्यय की राशि 3 हजार रुपए देने होंगे। बिलासपुर के तोरवा कासिमपारा का 48 साल के एक व्यक्ति को शारीरिक परेशानियां थीं। लखनऊ के डॉ. एसके जैन ने राष्ट्रीय स्तर पर शर्तिया इलाज का विज्ञापन जारी करवाया था। डॉक्टर की लखनऊ में विधानसभा मार्ग पर सारंश क्लीनिक के नाम से डिस्पेंसरी है। युवक ने पढ़ा और अपनी कमजोरी और समस्या दूर करने के लिए डॉक्टर से संपर्क किया। डॉक्टर ने उसे अपने क्लीनिक में बुलाया। युवक वहां गया और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच करवाई और डॉक्टर की दी खर्चीली व महंगी दवाओं के पूरे कोर्स का सेवन किया। पर दवाओं से लाभ नहीं मिला और उसकी परेशानी ज्यों की त्यों बनी रही। युवक ने फिर डॉक्टर से संपर्क किया और दवाओं से किसी तरह का लाभ नहीं मिलने की जानकारी दी। डॉक्टर ने फिर युवक को दवाओं का कोर्स करने के लिए कहा और विश्वास दिलाया कि अब उसकी सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी पर इन दवाओं को खाने के बाद भी समस्या का निदान नहीं हुआ तो फोन कर डॉक्टर को सूचना दी। डॉक्टर ने एक बार फिर नया कोर्स करने के लिए कहा और दवा भेजने के लिए अपने खाते में पैसे मंगाए। युवक ने उसके खाते में दवा के लिए रकम जमा कर दी। डॉक्टर ने तीसरी बार भी जो दवा दी उसका भी युवक पर कोई लाभ नहीं हुआ और उसकी शारीरिक समस्या ज्यों की त्यों बनी रही। इस संबंध में युवक ने अपने वकील के माध्यम से डॉक्टर को डाक से नोटिस भेजा पर जवाब नहीं मिला। युवक ने डॉक्टर से इलाज करवाने में 1.35 लाख रुपए और लखनऊ आने जाने में 20-25 हजार रुपए खर्च हुआ। इस तरह उसने कुल 1 लाख 60 हजार रुपए इलाज कराने में गवां दिए पर कोई लाभ नहीं मिला। पीड़ित ने अपने वकील के माध्यम से जिला उपभोक्ता फोरम बिलासपुर में परिवाद दाखिल कर उपभोक्ता फोरम संरक्षण अधिनियम की धारा 1986 के तहत परिवाद दाखिल कर सेवा में कमी को आधार बताकर अपने साथ हुए आर्थिक, मानसिक व शारीरिक समस्याओं की जानकारी दी और खर्च किए गए रकम के अलावा क्षतिपूर्ति व वाद व्यय की रकम दिलवाने की मांग की। उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों को सुना और बुधवार को इसमें फैसला दिया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग बिलासपुर के अध्यक्ष उत्तरा कुमार कश्यप व सदस्य रीता बरसैय्या ने युवक के परिवाद पर डॉक्टर को 45 दिन के भीतर युवक को चिकित्सा व्यय की राशि 1 लाख 10 हजार 607 अदा करने के लिए निर्देश दिया है। साथ ही डॉक्टर को अलग से मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 15 हजार रुपए व परिवाद व्यय की राशि 3 हजार रुपए देने के लिए कहा है।

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