सीबीसीएस की बैठक:सेंट्रल यूनिवर्सिटी की बैठक में विवाद, प्रोफेसर ने दी प्रमोशन रुकवाने की धमकी

बिलासपुर3 महीने पहले
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  • कुलपति के निर्देश पर प्रेजेंटेशन देने हुई बैठक, प्राध्यापकों ने प्रक्रिया को गलत बताया, सह-प्राध्यापक ने कहा-सही है

सेंट्रल यूनिवर्सिटी में स्नातकोत्तर में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू करने वाली प्रेजेंटेशन की बैठक में विवाद हो गया। पीजी में सीबीसीएस लागू होगा या नहीं, इस पर तो बैठक में निर्णय नहीं हुआ, लेकिन इस बैठक में भी वरिष्ठ प्राध्यापकों ने पानी फेर दिया। वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. पीके वाजपेयी ने प्रेजेंटेशन दे रहे सह-प्राध्यापक को कहा कि आप हमें डिक्टेट नहीं कर सकते हैं और उठकर मीटिंग से बाहर जाने लगे।

इस पर उन्हीं के एक साथी प्राध्यापक ने उन्हें रोका। इसी बीच एक सह-प्राध्यापक मीटिंग में उठे और प्रेजेंटेशन अच्छा हो रहा है, इस पर डॉ. दीक्षित की पैरवी की। इसके बाद अच्छे प्रेजेंटेशन के लिए ही कुछ प्राध्यापकों ने ताली बजाई और अंत में बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई। बैठक खत्म हुई। सभी लोग बाहर आए और उसके बाद नया बखेड़ा खड़ा हो गया। वरिष्ठ प्राध्यापक ने पैरवी कर रहे सह-प्राध्यापक को धमकाया कि देखते हैं, कैसे कैस प्रमोशन होता है? ऐसे में पीजी में सीबीसीएस लागू करने पर कोई निर्णय तो नहीं निकला, पर 5 से 10 सालों से रुके सह-प्राध्यापकों के कैस प्रमोशन का मामला जरूर तूल पकड़ लिया है। अब प्राध्यापकों और सह-प्राध्यापकों में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है।

जबकि कुलपति प्रो. चक्रवाल सीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालयों की दौड़ में आगे रखना चाहते हैं। गौरतलब है कि सीयू में स्नातक में सीबीसीएस लागू कर दिया गया है। स्नातकोत्तर में लागू होना है। सीबीसीएस के कोआर्डिनेटर बॉटनी विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. अश्वनी दीक्षित है। कुलपति के निर्देश पर अकादमी विभाग ने बैठक बुलाई। इसमें सीबीसीएस के कोआर्डिनेटर डॉ. दीक्षित को प्रेजेंटेशन देने कहा गया। कुलपति की गैर मौजूदगी में प्रभारी कुलपति डॉ. अमित सक्सेना थे। इनकी अध्यक्षता में बैठक हुई।

36 का कैश प्रमोशन पेंडिंग
सेंट्रल यूनिवर्सिटी में वर्तमान में 20 प्राध्यापक हैं। वहीं 36 ऐसे सह-प्राध्यापक हैं, जिनका कैश प्रमोशन 2010 से लेकर 2015 के बीच होना था, जो अभी तक नहीं हुआ है। नए कुलपति के आने के बाद इनमें आश जागी है और ये कैश प्रमोशन के लिए अपने कार्यों को करके दिखा रहे हैं। वहीं अब विवाद शुरू हो गया है। सह-प्राध्यापकों का कहना है कि पहले जो 20 प्राध्यापक हैं, वे प्रमोशन नहीं होने दे रहे हैं, क्योंकि अभी तक उनका ही सीयू में वर्चस्व है। जो प्रमोशन होने के बाद कम हो जाएगा।

कुलपति की एनईपी लागू करना प्राथमिकता
सीयू में नए कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने काम शुरू कर दिया है। उन्होंने डीन, विभागाध्यक्षों और विभिन्न कमेटियों के नोडल अधिकारियों की बैठक लेकर आपसी सामांजस्य से कार्य करने कहा। न्यू एजुकेशन पॉलिसी प्राथमिकता से लागू करने कहा।

सीयू का प्रशासन सहमति से चलना चाहिए, तानाशाही से नहीं: वाजपेयी
प्राध्यापक प्रो. पीके वाजपेयी ने कहा कि सीयू का प्रशासन आपसी सहमति से चलना चाहिए, तानाशाह की तरह नहीं। पीजी में सीबीसीएस लागू करने का मामला पहले एकेडमिक काउंसिल या डीन व विभागाध्यक्षों की मीटिंग में आना चाहिए था। प्रस्तुति अच्छी होने से कुछ नहीं होता। सब कुछ सिस्टम से होना चाहिए। इसलिए हमने ये बातें कहीं। यूजी में सीबीसीएस लागू है, पहले उसे दुरुस्त करना होगा। हमें अपनी क्षमता को बढ़ाकर रिसर्च यूनिवर्सिटी की कैटेगरी में शामिल होना चाहिए। कैस प्रमोशन कराने का के लिए दिखावा कर रहे हैं, इसलिए कुछ ज्यादा बोल दिया।

कुलपति की मंशा के अनुरूप कार्य कर रहे हैं
सीबीसीएस के नोडल अधिकारी डॉ. अश्वनी दीक्षित ने कहा कि कुलपति की मंशा और निर्देश के अनुसार कार्य कर रहे हैं। उन्हीं के निर्देश पर प्रेजेंटेशन दिया हूं। डीएसडब्ल्यू्, सह-प्राध्यापक डॉ. एमएन त्रिपाठी ने कहा कि हम इस मामले में कुछ नहीं कहना चाहते हैं, जिसको जो कहना है कहता रहे। मीडिया सेल प्रभारी डॉ. प्रतिभा जे मिश्रा ने कहा बैठक में प्रो. बाजपेयी ने अपने विचार रखे थे। विवाद के बारे में कुछ नहीं कहूंगा।

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