स्वच्छ पेयजल को लेकर हालात अभी भी नहीं सुधरे:साफ पानी पर अदालतें तो कहती ही हैं, सुन कोई नहीं रहा..?

बिलासपुरएक महीने पहले
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तालापारा तालाब के पास अभी भी गंदा पानी। - Dainik Bhaskar
तालापारा तालाब के पास अभी भी गंदा पानी।

स्वच्छ पेयजल को लेकर हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी जा चुकी है। अकेले छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश में पानी को लेकर हालात अभी भी नहीं सुधरे हैं। जिम्मेदार एजेंसियों की सारी सुविधाएं पॉश कॉलोनियों तक सिमटकर रह जाती हैं, लेकिन एक बड़ी आबादी को आज भी पानी के ऐसे जरियों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसका पानी मवेशी भी न पिएं।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 21 बरस बाद भी शहरों, कस्बों में पानी की पाइप-लाइनें नालियों से ऊपर नहीं उठ पाई हैं। जनवरी 2019 में राजधानी रायपुर में पीलिया फैला तो साफ पानी बड़ा मुद्दा बना था। एक याचिका पर हाईकोर्ट ने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग तीनों निगमों के अफसरों से साफ पानी मुहैया कराने के लिए पुख्ता प्लान मांगा था।

अफसर सिर्फ प्रोग्रेस रिपोर्ट दे रहे, जबकि लोग दूषित पानी से बीमार हो रहे हैं...
रायपुर में पीलिया से गर्भवती महिला की मौत के बाद उसके पति ने 2014 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, इस पर करीब तीन साल सुनवाई हुई। इसी केस में जनवरी 2019 में हाईकोर्ट ने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग नगर निगमों के अफसरों से तल्खी से कहा था कि अधिकारी स्वच्छ पेयजल पर सिर्फ प्रोग्रेस रिपोर्ट दे रहे हैं, जबकि दूषित पेयजल के चलते लोग बीमार हो रहे हैं। अधिकारी सच्चाई बताएं कि लोगों को पीने का साफ पानी कब तक मिलेगा? संविधान में पीने का साफ पानी मौलिक अधिकार है। घरों तक साफ पानी की सप्लाई के लिए क्या काम किए जा रहे हैं? शपथपत्र देकर भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन प्रदूषित पानी की वजह से हो रही बीमारियों की शिकायत लगातार आ रही है। तब कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमित्रों ने तीनों निगमों के पानी की जांच की तो खतरनाक ईकोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई थी।
-छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जनवरी 2019

प्रदूषण रहित शुद्ध जल हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना कल्याणकारी राज्य का संवैधानिक दायित्व है।
- सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2021

पेयजल प्राप्त करना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन का मौलिक अधिकार है। शुद्ध जल जीवन के अधिकार के तहत आता है।
- सुप्रीम कोर्ट मार्च 2009

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