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सुस्त प्रशासन:दयालबंद रोड बेजा कब्जा में 50 फुट बची, कोर्ट ने 90 दिन में कब्जा हटाने कहा, 273 दिन बीते

बिलासपुरएक महीने पहले
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  • 20 जनवरी को हाईकोर्ट ने दिया था फैसला

सूर्यकान्त चतुर्वेदी | सिम्स अस्पताल से किसी मरीज को अपोलो अस्पताल रेफर किया जाए तो ढाई किमी का सफर पूरा करने में एम्बुलेंस को 5-6 मिनट से अधिक नहीं लगना चाहिए, परंतु मामला अपोलो से 250-300 मीटर पहले वसंत विहार चौक पर बिगड़ जाता है। इस बीच इतने बेजा कब्जा हैं कि 300 मीटर का सफर पूरा करने में ही एम्बुलेंस को 4-5 मिनट लग जाएं। बसंत विहार चौक से दयालबंद की ओर जाने वाली 100 फुट चौड़ी सड़क बेजा कब्जा के चलते बमुश्किल 50 फुट रह गई है। इमर्जेंसी सेवाओं से जुड़े इस रोड से बेजा कब्जा हटाने के लिए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए 90 दिन के अंदर बेजा कब्जा हटाकर पुन: कोर्ट को जानकारी देने कहा था, परंतु आज 273 दिन बीतने के बावजूद बेजा कब्जा हटाने के मामले में कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। बसंत विहार चौक से लेकर अपोलो अस्पताल मोड़ तथा अस्पताल तक पूरा रास्ता बेजा कब्जा से अटा पड़ा है। शहर के वीआईपी इलाज के लिए गाहे ब गाहे यहां पहुंचते हैं, परंतु अस्पताल के पहुंच मार्ग को बेजा कब्जा मुक्त करने की ओर प्रशासन का ध्यान नहीं गया। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक प्रशासन को 20 अप्रैल तक बेजा कब्जा हटाकर न्यायालय को जानकारी देना था।

1 किमी रोड पर 100 से अधिक बेजा कब्जा
बसंत विहार चौक से दयालबंद पहुंच मार्ग का पीडब्ल्यूडी ने हाल ही में निर्माण किया है। हैरत की बात यह है कि मास्टर प्लान में जिस रोड की चौड़ाई 30 मीटर यानी 100 फुट दर्शाई गई है, पीडब्ल्यूडी ने बिना बेजा कब्जा हटवाए जितनी जगह मिली 40-50 फुट चौड़ी रोड बना दी। करीब एक किलोमीटर रोड पर 100 से अधिक लोगों ने कच्चे, पक्के मकान, दुकान बेजा कब्जा में बना लिए हैं। इसके अतिरिक्त रोड किनारे पूरी सब्जी मंडी लगती है, जिसके चलते शाम के वक्त भीड़ से किसी चार पहिया वाहन को बसंत विहार चौराहे को पार करना मुश्किल हो जाता है। मरीज की जान मुश्किल में हो तो भीड़ से एम्बुलेंस का समय पर अस्पताल पहुंचना किस्मत की बात होती है, अन्यथा सब कुछ भगवान भरोसे...।

20 अप्रैल तक कार्यवाही करना था
शांतनु सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने बताया कि दयालबंद सीपत मार्ग पर अतिक्रमण हटवाने की मांग की थी। मास्टर प्लान के हिसाब से यह सड़क 32 मीटर की होनी चाहिए, लेकिन बेजा कब्जा के कारण इसकी चौड़ाई कम हो गई है। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि वे नगर निगम कमिश्नर और कलेक्टर से अतिक्रमण हटाने की मांग करते हुए आवेदन दे चुके हैं। उनके आवेदन पर कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। इसलिए कार्रवाई कर सड़क को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। मामले की अंतिम सुनवाई हाईकोर्ट चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पीपी साहू की बेंच में 20 जनवरी 2020 को हुई। कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिया कि वह तीन माह के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर सभी पक्षों को सुनकर नियमानुसार कार्रवाई करें।

"दयालबंद रोड की चौड़ाई 100 फुट है। मास्टर प्लान में भी इसका उल्लेख है। हमने प्रस्ताव भेज दिया है। हाईकोर्ट ने निगम प्रशासन को डायरेक्शन दिया था।"
- विनीत नायर, संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश
"दयालबंद रोड का संयुक्त इंस्पेक्शन करने के आदेश कलेक्टोरेट से हुए हैं। निगम आयुक्त, संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश, पीडब्ल्यूडी के एसई के साथ निरीक्षण शीघ्र होगा।"
-देवेंद्र पटेल, एसडीएम बिलासपुर.

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