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स्मृति शेष:सादगी, मिलनसारिता से लोकप्रियता के शिखर पर रहे दीवान

बिलासपुर11 दिन पहलेलेखक: सूर्यकांत चतुर्वेदी
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बद्रीधर दीवान। - Dainik Bhaskar
बद्रीधर दीवान।
  • तीन बार विधायक और दो बार विधानसभा के उपाध्यक्ष व सीएसआईडीसी के चेयरमैन रहे

देवरी पं‌धी के गौंटिया ईश्वरधर दीवान के यहां 27 नवंबर 1929 में जन्मे बद्रीधर दीवान शुरू से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। बाद में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और जनसंघ के संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी और पं दीनदयाल उपाध्याय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संगठन के कार्यकाल में उनके साथ जनसंघ से लेकर भाजपा तक का सफर तय किया।

बद्रीधर दीवान 1990 में पहली बार सीपत विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए। राज्य गठन के बाद 2003 में सीपत और उसके बाद 2008 और 2013 में बेलतरा विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए। दो बार राज्य विधानसभा के उपाध्यक्ष तथा एक बार सीएसआईडीसी के चेयरमैन रहे। दीवानजी संघर्ष की मिसाल थे। इमर्जेंसी में लोकतंत्र की रक्षा के लिए 19 महीने की जेल काटी। बिलासपुर में रेलवे जोन की स्थापना के लिए जनसंघर्ष में भी वह पीछे नहीं रहे और जेल गए।

रेलवे स्टेशन के बाहर ट्रैक्टर ट्रॉली पर सजे मंच पर अटलजी ने दिया था भाषण

25 मिनट के समय का किया था उपयोग
ट्रैक्टर ट्रॉली पर अटलजी का मंच बनवाया 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सांसद खेलनराम जांगड़े के विरुद्ध भाजपा ने रेशमलाल जांगड़े को प्रत्याशी बनाया। उनकी स्थिति थोड़ी कमजोर थी। मतदान के चंद रोज पहले पार्टी नेता अटलबिहारी वाजपेयी संयोगवश खरसिया से रायपुर जा रहे थे, परंतु बिलासपुर स्टेशन पर ट्रेन का स्टॉपेज 25 मिनट का था। दीवानजी ने सहयोगियों मूलचंद खंडेलवाल, डीपी अग्रवाल, मन्नू मिश्रा की सहायता से स्टेशन के बाहर ट्रैक्टर ट्रॉली पर मंच बनवाया और अटलजी का संबोधन कराया। वाजपेयीजी की सभा की चर्चा शहर भर में होती रही और चुनाव में रेशमलाल जांगड़े जीत गए।

संघर्ष के साथी
इमर्जेंसी के दौरान बिलासपुर और जबलपुर में 19 महीने की जेल काट चुके बद्रीधर दीवान किसान, मजदूरों के हिमायती रहे। एनटीपीसी में किसानों के मुआवजे के िलए सीपत प्लांट के सामने विरोध प्रदर्शन चल रहा था। स्थिति विस्फोटक थी, परंतु वह किसानों के लिए वहां गए। उनकी मौजूदगी में ही सीआरपीएफ ने गोली चलाई, परंतु वह डटे रहे।

संगठन क्षमता काम आई
1960 के दशक में जिले में जनसंघ की स्थापना की संभावनाएं तलाशने शहर पहुंचे अटलबिहारी वाजपेयी ने छितानी मितानी धर्मशाला में बैठक ली। इसमें मात्र 10 लोग थे, लोगों को जोड़ने वाले दीवानजी उनमें से एक थे। अटलजी से उनका संपर्क वहीं से शुरू हुआ।

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