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पंचायतों से इस साल नगर निगम वसूलेगा 11.58 करोड़ टैक्स:भेदभाव, निगम से जुड़े 20 माह बीते; पंचायत क्षेत्रों को डस्टबिन तक नहीं बंटे

बिलासपुर6 दिन पहले
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तिफरा नगर पालिका, सकरी और सिरगिट्टी नगर पंचायत सहित 18 ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल करते वहां के लोगों को लुभावने सब्जबाग दिखाए गए थे। 20 माह बीतने के बाद इन पंचायतों को कचरा इकट्ठा करने के लिए डस्टबिन तक नहीं बंटे हैं।

स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों के दौरान मार्च में जरूर दिखावे के लिए डस्टबिन बांटे गए, परंतु अधिकांश क्षेत्र के लोगों को डस्टबिन नहीं मिले। शहर के बाजार और सड़कों की मैकेनाइज्ड सफाई हो रही है और इस पर डेढ़ करोड़ खर्च होता है, अकेले पुराने नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर 3.50 करोड़ रुपए हर महीने खर्च होते हैं। निगम की निर्वाचित परिषद के कार्यकाल के 16 माह गुजर गए। इस अवधि में निगम पंचायतों में सफाई व्यवस्था करने में फेल्यूअर साबित हुआ। शहर के साथ पंचायत क्षेत्र के लोग भी टैक्स भरपूर देते हैं। इस वर्ष पंचायतों से निगम ने 11.58 करोड़ की वसूली का लक्ष्य रखा है। टैक्स के अनुपात में देखें तो शहर की तुलना में पंचायतों को जो सुविधाएं दी जा रही हैं वह नगण्य हैं।

सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है पंचायत क्षेत्र के पार्षद

कचरा गाड़ी का पता नहीं चलता
वार्ड 48 की पार्षद नंदिनी साखन दर्वे ने कहा कि कचरा गाड़ी कब आती है, पता ही चलता। उन्होंने बताया कि गुलाब नगर, विवेकानंद नगर,खेती पार्क, गणपित होम्स, कृष्णा विहार, राधा परिसर, सूर्यवंशी पारा के लोगों को डस्टबिन नहीं मिले हैं। दिखावे के लिए मात्र शिवम वाटिका के 40 घरों को डस्टबिन बंटे हैं। राजकिशोर नगर की पार्षद संध्या तिवारी के मुताबिक 3500 से अधिक मकान हैं, परंतु किसी घर में डस्टबिन नहीं मिला। पुराने निगम क्षेत्र की कचरा गाड़ी में लोगों को कचरा देने की अपील सुनाई देती है। पंचायत क्षेत्र की गाड़ीवाले सीटी बजाते हैं, जो सुनाई नहीं देता।

डस्टबिन नहीं मिले: वार्ड 47 की पार्षद विमला यादव का कहना है कि शुरू में विमला आर्चिट के लोगों को डस्टबिन बंटे, परंतु ओम पैलेस, रॉयल टाउन, महावीर सिटी, कल्याण बाग, पंचवटी, चंदन -5, गार्डन सिटी, कुटीपारा, मोपका तक करीब 4 हजार लोगों को डस्टबिन नहीं बंटे हैं। वार्ड 49 की पार्षद अहिल्या राकेश वर्मा ने बताया कि बहतराई, बिजौर, हाउसिंग बोर्ड कालोनी, अटल आवास, सरोज विहार की सफाई व्यवस्था चौपट है। कचरा गाड़ी कब आती है, पता नहीं चलता। डस्टबिन देखने को नहीं मिले।

लोग बोले- झाड़ू तक नहीं लगाई जाती: ‘दैनिक भास्कर’ने निगम में शामिल पंचायतों के नागरिकों से बात की। खमतराई में कैलाश नेताम ने बताया कि उनका मुहल्ला वार्ड क्रमांक 58 में आता है। वार्ड में कचरा गाड़ी नहीं पहुंचती। इसी गांव के संजय यादव ने बताया कि कभी कभार कचरा गाड़ी आती है।बहतराई के अजय यादव ने बताया कि वार्ड में झाड़ू तक नहीं लगाई जाती।

सीधी बात; खजांची कुम्हार, डिप्टी कमिश्नर नगर निगम

पंचायत क्षेत्रों से भेदभाव हो रहा है, उऩ्हें डस्टबिन तक नहीं दिए गए?
- परसदा, उस्लापुर, मंगला, राजकिशोर नगर, लिंगियाडीह में 10 हजार डस्टबिन बंट चुके हैं। 47 हजार डस्टबिन की खरीदी के लिए शासन से स्वीकृति मांगी गई है।
छठघाट के सामने जहां पौधरोपण किया गया, वहां कचरा डंप हो रहा, एसएलआरएम सेंटर तक नहीं बने, जहां कचरे का निबटारा हो सके।
एसएलआरएम सेंटर बनने तक अरपा किनारे और मंगला में कचरा इकट्ठा कर, उसी दिन उसे उठवाने के निर्देश हैं। देवरीखुर्द, मंगला, परसदा में सेंटर लगभग पूर्णता की ओर हैं। 9 जगहों पर और बनाए जाएंगे।

मेयर बोले- 15 दिनों में डस्टबिन बटेंगे
मेयर रामशरण यादव ने सभी पंचायतों में डस्टबिन बंटवाने के निर्देश दिए हैं। बराबर की सहूलियतें नहीं मिल रही, यह सही है। व्यवस्था बनाने में समय लगता है। पंचायतों में 3 हजार लाइटें लगाई जाएंगी। पंचायत क्षेत्रों में 15 करोड़ के विकास कार्यों के लिए टेंडर कराए जा रहे हैं।

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