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सिम्स में आगजनी के दो साल:इलेक्ट्रिशियन की नहीं हुई भर्ती, फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं हो पाया, अधूरी व्यवस्था के बीच चल रहा सिम्स

बिलासपुरएक महीने पहले
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  • शॉर्ट सर्किट से आग के बाद एनआईसीयू में धुआं भरने से बच्चों की हुई थी मौत

बेशक सब भूल गए हों लेकिन दैनिक भास्कर को याद है कि 22 जनवरी 2019 को सिम्स में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। इलेक्ट्रिक स्विच बोर्ड में आग लगने के बाद एन-आईसीयू में धुआं भर गया था। वहां 22 मासूम भर्ती थे। बच्चों को शिफ्ट करने में एक मासूम की मौत हुई थी। इसके बाद प्राइवेट अस्पतालों में शिफ्ट किए गए दो और बच्चों को हमने खोया था। दो साल बीत जाने के बाद भी सिम्स प्रबंधन ने आग से बचाव के कोई पुख्ता इंतजार नहीं किए। प्रबंधन शायद फिर किसी आगजनी की घटना का इंतजार कर रहा है। इस घटना को याद दिलाने का मकसद सिर्फ इतना है कि अफसर नींद से जागें और आग से बचाव के इंतजाम करें। घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने सिम्स अधीक्षक सहित कई अफसरों के तबादले करने के साथ व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। यहां के अफसरों ने दिखावे के लिए कुछ काम चलाऊ काम करवा दिए। आज भी सिम्स में इलेक्ट्रिशियन नहीं हैं। इलेक्ट्रिकल पैनल बोर्ड को बाहर नहीं लगाया गया। फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं हुई। वार्ड-ब्वॉय और स्वीपर की दम पर आग बुझाने का दावा करने वाले इन कर्मचारियों को आज तक आग बुझाने की ट्रेनिंग नहीं दी गई। अब आप खुद समझ लीजिए कि भविष्य में अगर फिर कोई आगजनी होती है तो सिम्स काबू पाने में कितना सक्षम हैं?

आग पर काबू पाने के लिए ये सबकुछ जरूरी : एक्सपर्ट का कहना है कि फायर सेफ्टी ऑडिट करवाना जरूरी। क्योंकि बिल्डिंग की परिस्थितियों को देखने के बाद ऑडिटर तय करता है कि यहां आग पर काबू पाने के लिए क्या इंतजाम होने चाहिए और क्या हैं। दूसरा हर छह महीने में फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग होनी चाहिए। सिम्स में पहली बार 9 जनवरी को तीन-चार घंटे की ट्रेनिंग हुई थी। इसके अलावा बिजली मीटर, सब मीटर, पैनल बोर्ड सहित अन्य खतरों के सामानों को सुरक्षित स्थानों पर लगाना चाहिए। नियमित देखरेख के लिए इलेक्ट्रिशियन होना जरूरी है। रेत की बाल्टी होना जरूरी है। अग्निशामक यंत्र जरूरी है।

कुछ काम बचे हैं जिन्हें जल्द पूरे करवा दिए जाएंगे : सिम्स अधीक्षक डॉक्टर पुनीत भारद्वाज का कहना है कि आगजनी के बाद इमरजेन्सी रास्ता बनाया गया। बड़ी फायर सेफ्टी मशीन मंगाई गई। ज्यादातर पैनल भी बदल दिए गए। जिस छेद से एन-आईसीयू में धुआं भरा था उसे भी बंद कर दिया। वायरिंग भी बदलवा दी गई है। इलेक्ट्रिशियन की भर्ती के लिए पत्र लिखा है। इलेक्ट्रिकल पैनल बोर्ड कुछ बाहर लगाए गए हैं। किसी कारण बस फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं हो पाई। कराने की तैयारी चल रही है। आग से बचाव के यंत्र सहित कई चीजों के लिए 15 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा है। अभी वहां से मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलते ही सभी व्यवस्थाएं पूरी हो जाएंगी।

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