बिलासपुर में 15 साल से बदहाल हैं सड़कें:हर साल नई बनती है, फिर खोद देते, अब गड्‌ढा और कीचड़; CM-हाईकोर्ट का आदेश भी बेकार

बिलासपुर2 महीने पहले

बिलासपुर में पिछले 15 साल से सड़कों की बेतरतीब खुदाई चल रही है। शहर के विकास के नाम से 300 करोड़ रुपए के सीवरेज परियोजना के लिए पाइप लाइन बिछाने के नाम से बिलासपुर खोदापुर बन गया है। यह योजना अभी पूरी नहीं हो पाई थी कि फिर शहर में पेयजल की समस्या दूर करने के नाम अमृत मिशन परियोजना के बहाने पाइप लाइन बिछाकर सड़कों को खोदा गया। स्थिति यह है कि हर साल नई सड़कें बनाई जाती है और फिर पाइप लाइन व केबल बिछाने के नाम से खोद दिया जाता है।

अब मानसून के आने के साथ ही बारिश शुरू हो गई है। ऐसे में सारे विकास काम बंद कर दिए गए हैं। इसके बावजूद सड़कों की खुदाई बंद नहीं हो रही है। शहर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट के आदेशों का भी पालन नहीं हो रहा है। सड़कों की बदहाली जानने दैनिक भास्कर ने पड़ताल की। देखिए रिपोर्ट...

शहर की सड़कों व गलियों में भर जाता है पानी।
शहर की सड़कों व गलियों में भर जाता है पानी।

शहर के बीच व्यस्ततम मार्ग जवाली नाला से शनिचरी की ओर जाने वाली मोड़ पर सीवरेज की पाइप लाइन दुरुस्त करने के नाम से सड़क को भरी बारिश में खोदा गया था। जिसके कारण इस मार्ग में दलदल, कीचड़ हो गया है। इसके चलते यह सड़क चलने लायक नहीं है। सड़क की ये हालत सीवेज प्रोजेक्ट की ठेका कंपनी सिंप्लेक्स के अधूरे कार्य के चलते हुई है। पाइप लाइन बिछाने के बाद कंपनी ने मिट्टी पाट दी, पर मुरूम और गिट्‌टी डालकर समतल नहीं किया।

शनिचरी बाजार में सीवरेज की खुदाई के बाद इस तरह हो गई है मेन रोड की हालत।
शनिचरी बाजार में सीवरेज की खुदाई के बाद इस तरह हो गई है मेन रोड की हालत।

जूना बिलासपुर और गांधी चौक से पुराना बस स्टैंड में भर जाता है पानी
सीवरेज परियोजना फ्लॉप हो गई है, लेकिन उसका अधूरा काम अब भी चल रहा है। दयालबंद के पास गड्‌ढा खोदकर उसे समतल कर नई सड़कें बनाई गई थी। इसके बाद गांधी चौक में गड्‌डा खोदा गया और उसे समतल किया गया। सही तरीके से फीलिंग नहीं होने के कारण सड़कें जगह-जगह से धंस रही है और गड्‌ढे बन गए हैं। यही हाल गांधी चौक से डीपी कॉलेज रोड और पुराना बस स्टैंड में भी है।

शहर में नई बनी सड़कों में गड्‌डा बन गया है।
शहर में नई बनी सड़कों में गड्‌डा बन गया है।

जरहाभाठा और मगरपारा रोड में गड्‌ढे
जरहाभाठा मंदिर चौक के पास सड़क को खोद कर छोड़ दिया गया है, जिसके कारण वहां पानी भर जाता है। बृहस्पति बाजार से राजेंद्र नगर रोड की हालत भी ठीक नहीं है। मगरपारा रोड में सीसी रोड में जगह-जगह गड्‌ढे बन गए हैं। इस मार्ग में बारिश के बीच नाली का निर्माण भी चल रहा है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। बारिश होने पर पानी सड़क में आ जाता है और लोगों के घरों में गंदा पानी पहुंच जाता है।

सड़कों की खुदाई करने के बाद पिचिंग वर्क तक नहीं किया गया है।
सड़कों की खुदाई करने के बाद पिचिंग वर्क तक नहीं किया गया है।

अशोक नगर चौक किनारे खोद दिया गड्‌ढा
सरकंडा क्षेत्र के अशोक नगर चौक में खड्डा खोदकर मिट्‌टी पाट दिया गया है। इसके बाद इसे समतल कर छोड़ दिया गया है। स्थिति यह है कि यहां सड़क में गड्ढा हो गया है और हादसे की आशंका बनी रहती है। यही नहीं अमृत मिशन के पाइप रेस्टोरेशन के नाम पर भी अशोक नगर रोड को जगह-जगह खोदा गया है और इसके बाद समतल कर छोड़ दिया गया है। रोड किनारे पीचिंग वर्क नहीं होने से बाइक सवारों के लिए खतरा है।

सड़कों में पाइप लाइन बिछाने के बाद मरम्मत तक नहीं की गई है।
सड़कों में पाइप लाइन बिछाने के बाद मरम्मत तक नहीं की गई है।

नूतन चौक से सीपत रोड की नई सड़क पर भी गड्ढे
नगर निगम ने अमृत मिशन का पाइप लाइन बिछाने के बाद नवंबर-दिसंबर में अशोक नगर से लेकर सीपत चौक तक नई सड़क बनाई थी। नूतन चौक से सीपत रोड में अमृत मिशन का पाइन लाइन अधूरी है, जिसके कारण नई बनी सड़क को खोद दिया गया है। हीरो होंडा शो रूम के सामने नाला निर्माण के लिए सड़क को खोदा गया, जिसके बाद उसे समतल कर छोड़ दिया गया है। यहां गड्‌ढों को देखने वाले जवाबदार अफसरों ने भी आंखें मूंद ली है।

बहतराई चौक से राजकिशोर नगर में सीवरेज की खुदाई
सरकंडा क्षेत्र के ही अशोक नगर से साइंस कॉलेज और राजकिशोर नगर चौक तक निगम और PWD ने नई सड़क का निर्माण किया था। गर्मी में सड़कों की स्थिति एकदम ठीक थी। लेकिन, अब इस मार्ग में दस जगहों पर सड़कों को खोद कर छोड़ दिया गया है। नियम के अनुसार पाइप लाइन या केबल बिछाने के लिए सड़क की खुदाई की गई है, तो वहां तत्काल पीचिंग वर्क करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। सड़कें बीच-बीच में कटी हुई है।

सरकंडा के साइंस कॉलेज से चांटीडीह रोड में जगह-जगह गड्‌ढे हैं, जिसमें बारिश होते ही पानी भर जाता है।
सरकंडा के साइंस कॉलेज से चांटीडीह रोड में जगह-जगह गड्‌ढे हैं, जिसमें बारिश होते ही पानी भर जाता है।

इसलिए हर 10 से 15 मीटर में है गड्‌ढे
राजकिशोर नगर से साइंस कॉलेज रोड और बहतराई चौक से चिंगराजपारा रोड में 30 से अधिक सीवरेज पाइप लाइन का चैंबर लगा है। जब इस मार्ग में नई सड़कें बनाई गई, तब सीवरेज के चैंबर को सड़क के नीचे बना दिया गया, जिसके कारण इस मार्ग में हर 10 से 15 मीटर में सीवरेज के चैंबर गाड़ियों में हिचकोले मारते हैं।

बंधवापारा की सड़क के लिए मोहल्ले वालों ने किया था सड़क जाम
नूतन चौक से बंधवापारा जाने वाली सड़क की हालत पिछले एक साल से खराब है। यहां के भाजपा पार्षद श्याम साहू और मोहल्लेवासियों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर चक्काजाम भी किया था। छह माह पहले मोहल्ले वालों को नगर निगम ने सड़क बनाने का आश्वासन दिया था। लेकिन, अब बारिश में इस मार्ग में गड्‌ढे बन गए हैं और सड़क नहीं बन पाई है।

हाईकोर्ट के आदेश को भी किया दरकिनार

शहर की जर्जर सड़कों को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। इस मामले में अभी सुनवाई चल रही है। तत्कालीन कार्यवाहक चीफ जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने पीड़ा व्यक्त करते हुए बदहाल सड़कों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही वर्तमान चीफ जस्टिस अरूप कुमार गोस्वामी भी सड़कों की दुर्दशा को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने शहर की सड़कों को नगर निगम और PWD सहित जिम्मेदार विभाग को दुरुस्त करने कहा था। उनके आदेश के बाद भी शासन और प्रशासन ने सड़कों की सुध नहीं ली है।

अभी भी सड़क खोदकर पाइप लाइन व केबल बिछाया जा रहा है।
अभी भी सड़क खोदकर पाइप लाइन व केबल बिछाया जा रहा है।

CM ने एक साल में पूरा करने के दिए थे निर्देश, 3 साल बाद भी अधूरा
सीवरेज का काम करने वाली कंपनी सिंप्लेक्स और अमृत मिशन का काम करने वाली कंपनी ह्यूम पाइंप के साथ यह शर्त है कि, जहां भी पाइप लाइन बिछाने के लिए सड़कों की खुदाई की जाएगी। वहां काम पूरा होने के तत्काल बाद दुरुस्त करना है। दोनों ही कंपनी सड़कों की मरम्मत को लेकर उदासीन हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक मार्च 2019 को मेयर और आयुक्त को बुलवाकर सीवरेज प्रोजेक्ट को साल भर में पूरा करने और उसका लाभ आम जनता को दिलाने के निर्देश दिए थे। लेकिन, तीन साल बाद भी उनके आदेश पर अमल नहीं हो सका है।

160 जगहों पर बाकी है सीवरेज की खुदाई
शहर में अभी 160 जगहों पर सीवरेज की खुदाई की जानी है। इंटर कनेक्शन के ज्यादातर कार्य चौराहे के आस पास के हैं, इसलिए कंपनी इस कार्य को अभी निपटाने की स्थिति में नहीं है। ठेका कंपनी सभी पेचिंदा काम को पेंडिंग में रख दिया है। यहां तक कि बिछाई गई करीब 200 किलोमीटर पाइप लाइन की हाइड्रो टेस्टिंग तक का काम नहीं हो हुआ है। कंपनी के वर्क आर्डर के अनुसार 2010 में कार्य पूर्ण करना था, परंतु 13 साल बाद भी यह अधूरा है।

पाइल लाइन बिछाने के लिए रोड ब्लॉक कर काम किया जा रहा है।
पाइल लाइन बिछाने के लिए रोड ब्लॉक कर काम किया जा रहा है।

जिन गलतियों से 'सीवरेज' बना सिरदर्द, उन्हें 'अमृत' में दोहराया
सीवरेज प्रोजेक्ट में जो गलतियां की गईं थीं, वही अमृत मिशन प्रोजेक्ट में भी दोहराई जा रही हैं। पाइप लाइन बिछाने के बाद रेस्टोरेशन का काम किया जा रहा है। लेकिन, अधिकांश जगहों पर हाइड्रो टेस्टिंग ही नहीं की गई है। शहर में अब तक 150 किमी से अधिक पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है, जिसमें हाइड्रो टेस्टिंग महज 50 किमी में भी नहीं हुआ है। सीवरेज में भी हाइड्रो टेस्टिंग का दावा किया जाता रहा। लेकिन निगम ने एक किलोमीटर भी हाइड्रो टेस्टिंग नहीं की थी। यही हाल रहा तो प्रोजेक्ट जब शुरू होगा, तब सड़कों को फिर से खोदने की नौबत पड़ सकती है।

अफसरों ने नहीं लिया सबक, भुगत रही जनता
424 करोड़ के सीवरेज प्रोजेक्ट 13 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है और करोड़ों खर्च होने के बाद भी शहरवासिायों को एक रुपए का लाभ नहीं मिला है। बल्कि, प्रोजेक्ट के काम की वजह से शहरवासी तकलीफें झेलते रहे। यही हाल अमृत मिशन का है। सीवरेज में जो भी गलतियां हुई हैं। उनसे अफसरों ने सबक नहीं लिया, जिसका खामियाजा आज भी शहर के लोग भुगत रहे हैं।

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