किम्स अस्पताल संपत्ति विवाद:बड़े बेटे ने मां और भाई पर दर्ज कराई FIR, पिता की मौत के बाद फर्जी दस्तावेज से नाम करने का आरोप

बिलासपुरएक महीने पहले
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बिलासपुर के मगरपारा रोड स्थित किम्स अस्पताल के डायरेक्टर वाई आर कृष्णा की मौत के बाद अब उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाद शुरू हो गया है। - Dainik Bhaskar
बिलासपुर के मगरपारा रोड स्थित किम्स अस्पताल के डायरेक्टर वाई आर कृष्णा की मौत के बाद अब उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाद शुरू हो गया है।

बिलासपुर के मगरपारा रोड स्थित किम्स अस्पताल के डायरेक्टर वाई आर कृष्णा की मौत के बाद अब उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर पारिवारिक विवाद शुरू हो गया है। उनके बड़े बेटे डॉ. राजशेखर डॉक्टर हैं। उन्होंने अपनी मां वाई कमला और भाई रवि शेखर के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि झूठे दस्तावेज तैयार कर संपत्ति अपने नाम कराई है। इस मामले में गवाह बने अस्पताल के कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

डॉ. राजशेखर ने पुलिस को बताया कि उनके पिता की अगस्त 2020 में मौत हो गई थी। इस बीच उनकी मां और भाई ने मिलकर राजस्व न्यायालय में पिता की मौत की जानकारी दी और संपत्ति अपने नाम करा ली। साथ ही नामांतरण के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया। आरोप लगाया कि छलपूर्वक झूठा शपथपत्र प्रस्तुत किया गया है। उनके पिता ने अपनी मौत के पहले वसीयत नहीं लिखी थी। उनकी मां और छोटे भाई ने तहसील कार्यालय में शपथ पत्र के साथ बताया है कि उनके अलावा संपत्ति का और कोई वारिस नहीं है।

डॉ. राजशेखर ने पुलिस को बताया कि उनके साथ ही उनकी बहन पल्लवी भी परिवार की सदस्य हैं और डॉ. कृष्णा के बेटे और बेटी हैं। शिकायत में इस शपथ पत्र को आधार बनाकर डॉ. शेखर ने अपनी मां कमला व भाई रवि शेखर पर कूटरचना करते हुए छल व धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। मगरपारा मुख्य मार्ग पर 21 हजार वर्ग फीट से अधिक क्षेत्रफल में अस्पताल व मकान है। वर्तमान में इसकी कीमत करोड़ों रुपए है। सिविल लाइन पुलिस ने धारा 420, 467, 468, 471, 34 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।

पिता की मौत के बाद बाहर थे इसलिए नहीं हुई जानकारी
डॉ. राजशेखर ने बताया कि वे खुद ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं। पिता की मौत के बाद अपने व्यवसाय के संबंध मे मध्य प्रदेश के भोपाल, झारखंड और बिहार के विभिन्न अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसके चलते उन्हें संपत्ति के संबंध में जानकारी नहीं थी। अभी हाल ही में उन्हें पता चला कि उनकी अनुपस्थिति में मां और भाई ने मिलकर पैतृक संपत्ति को अवैध तरीके से हड़प कर ली है।

अस्पताल स्टाफ व परिचितों ने भी दी झूठी गवाही
डॉ. राजशेखर ने पुलिस को बताया कि उनके पिता के अस्पताल में काम करने वाले देवेंद्र सिंह ठाकुर पुराना कर्मचारी है। उसने भी नामांतरण सहित अन्य शपथ पत्रों में झूठी गवाही दी है। उन्हें यह पता है कि परिवार में कौन-कौन हैं, फिर भी न्यायालय में शपथ पत्र देकर बताया है कि उनके पैतृक संपत्ति के केवल दो ही वारिस हैं। इसी तरह प्रकरण के अन्य गवाह अभिजीत दास, शीलू साहू्, प्रतीक गुप्ता व के ईश्वर प्रसाद भी परिवार से भली भांति परिचित हैं।

पत्नी ने दर्ज कराई थी प्रताड़ना की रिपोर्ट
डॉ. राजशेखर की शादी आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हुई थी। उनकी पत्नी चिन्मई ने साल 2018 के पहले विजयवाड़ा में पति राजशेखर, ससुर स्व. डॉ. कृष्णा और सास कमला के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी। यह विवाद कोर्ट में लंबित है।

कभी साथ नहीं रहा राजशेखर
इधर, उनकी मां कमला और भाई रविशेखर ने पुलिस को बताया है कि राजशेखर शुरुआत से ही उनके साथ नहीं रहा है, तो उसे वसीयत व दस्तावेजों की जानकारी कैसे होगी। जमीन नामांतरण के लिए भी राजशेखर को फोन कर कई बार बुलाया गया, लेकिन वह अपनी व्यस्तता का बहाना बनाते रहा।

दस्तावेजों की हो रही जांच
सिविल लाइन TI शनिप रात्रे का कहना है कि शिकायतकर्ता डॉ. राजशेखर का बयान व दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच के आधार पर धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया गया है। यह पैतृक संपत्ति को लेकर आपसी विवाद का प्रकरण है। प्रथम दृष्ट्या अपराध पाए जाने पर मामला दर्ज किया गया है। दस्तावेजों का परीक्षण कराने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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