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टमाटर में घाटा:किसानों को टमाटर में रोज 6 लाख का घाटा, प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की अभी योजना नहीं

बिलासपुरएक महीने पहले
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  • मंडी में किसानों को महज 2 रुपए किलाे मिल रहा, विशेषज्ञ कह रहे-केचप और सॉस बनाने के लिए बढ़ाना होगा उत्पादन

तिफरा सब्जी मंडी में केवल बिलासपुर जिले का रोजाना 150 टन टमाटर पहुंच रहा है। प्रति किलो थोक में 4 रुपए किलो में बिक रहा है, इसमें किसानों को महज दो रुपए मिल रहा है। आठ रुपए थोक में बिकने पर किसानों को 6 रुपए मिलता पर दो रुपए मिलने से उन्हें रोज करीब 6 लाख रुपए का घाटा सहना पड़ रहा है। इस नुकसान से बचने का एक विकल्प टमाटर प्रोसेसिंग यूनिट है लेकिन ऐसी कोई यूनिट यहां लगाने की योजना नहीं है। वहीं विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इस यूनिट को लगाने के लिए किसानों को रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ाना होगा। बिलासपुर जिले में टमाटर का बढ़ता रकबा जहां अच्छी बात है, वहीं टमाटर किसानों को हो रहे नुकसान के कारण, चिंता की बात भी है। कोरोना काल में टमाटर के किसानों को घाटा नहीं हुआ, इसलिए यहां रकबा बढ़कर दो हजार एकड़ हो गया है। टमाटर दूसरे प्रदेश भेजने से ज्यादा अच्छा विकल्प प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना हाे सकता है। लेकिन उद्यानिकी विभाग के पास ऐसी कोई योजना फिलहाल नहीं है। उद्यानिकी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सीडी सिंह का कहना है कि हम उत्पादन को तो बढ़ावा दे सकते हैं लेकिन बाजार में कीमत पर नियंत्रण नहीं रख सकते। कीमत कम होने पर विभाग कुछ नहीं कर सकता लेकिन किसान चाहे तो प्रोसेसिंग यूनिट लगा सकता है। शासन द्वारा 25 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है। उद्योग विभाग में सब्सिडी दी जाती है। पर किसान रुचि नहीं लेते। अभी उद्यानिकी विभाग के पास प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इधर पूर्व उद्यान अधीक्षक महेंद्र गुप्ता बताते हैं कि टमाटर केचप, साॅस आदि की प्रोसेसिंग यूनिट लगाई तो जा सकती है लेकिन इसके लिए सबसे पहले जरूरी है टमाटर की खेती का रकबा बढ़े ताकि उत्पादन भी बढ़े। वहीं उत्पादन से ज्यादा कठिन काम मार्केटिंग है। यह दृढ़ इच्छाशक्ति व प्लानिंग के बिना संभव नहीं है।

रोज 500 टन धमधा इलाके से आ रहा : हर साल पखवाड़ेभर से एक माह के बीच ऐसा समय होता है जब टमाटर और उसके किसानों के लिए अच्छा नहीं होता। कीमत कम होने से फेंकना पड़ता है। कीमत और कम होने पर टमाटर की तुड़ाई नहीं कराएंगे। धमधा, दुर्ग से रोज आ रहे 500 टन टमाटर के कारण तिफरा सब्जी मंडी में सब तरफ टमाटर ही टमाटर नजर आ रहा है।

किसान बोले- प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर बढ़ेगा रकबा
छत्तीसगढ़ युवा प्रगतिशील किसान संघ के उपाध्यक्ष मनीष कश्यप का कहना है कि चाहे प्रोसेसिंग यूनिट शासन लगाए या फिर प्राइवेट कंपनी, किसान टमाटर की खेती के लिए तैयार है। जो पहले से खेती कर रहे हैं, वे रकबा बढ़ाएंगे। इससे उत्पादन बढ़ेगा। इसमें संकट ये है कि प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना किसान नहीं कर सकते क्योंकि वे कर भी लें तो उत्पादन व मार्केटिंग की जिम्मेदारी उठाना संभव नहीं। इसकी जिम्मेदारी शासन या प्राइवेट कंपनी को ही लेना होगा। किसान से केवल टमाटर लिया जाए। वह भी यदि किसान को प्रति किलो न्यूनतम 5 रुपए नहीं मिलेगा तो उसे घाटा ही होगा।

समझिए... कीमत का गणित : तिफरा मंडी थोक व्यापारी संघ के अध्यक्ष मुकेश अघिजा बताते हैं कि तुड़ाई पर किसानों की जेब से प्रति कैरेट 10 रुपए, धमधा से यहां लाने पर भाड़ा 30 से 35 रुपए और 5 रुपए कमीशन लगता है। इस तरह 50 रुपए लग जा रहा है। 50 रुपए किसान को मिल रहा है। एक कैरेट में 25 किलो टमाटर होता है यानी दो रुपए किलो किसान को मिल रहा है।

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