भवन और दफ्तर रहने लायक भी नहीं:जंगल में दो करोड़ के सरकारी दफ्तर, भवन खंडहर बन रहे

बिलासपुरएक महीने पहले
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जंगल में दो करोड़ रुपए खर्च कर सरकारी दफ्तर के कार्यालय और भवन बना दिए गए। इनमें कई भवन खंडहर हो चुके हैं और कई में कोई नहीं रहता। एक मामले में तो राजस्व विभाग की खुद की जमीन भी नहीं है। वन विभाग की जमीन में ही अनुविभागीय कार्यालय का दफ्तर बना दिया गया है।

किसी भी सरकारी दफ्तर या बंगले के निर्माण के पहले जमीन चिन्हित करने के दौरान पूरी प्लानिंग की जाती है लेकिन जिले में ऐसे भी सरकारी दफ्तर और भवन बने हैं जिनकी प्लानिंग ही नहीं की गई और सालों से सुनसान और जंगल में बने ऐसे दफ्तर और भवन अब खंडहर होने लगे हैं। ऐसे दफ्तर और भवन का निर्माण के बाद से ही कोई उपयोग ही नहीं हुआ है। इन जगहों की बजाय उपयुक्त जमीन का चयन और निर्माण कर सरकारी रुपयों की फिजूलखर्ची बचाई जा सकती थी लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। हालात यह है कि अब ऐसे भवन और दफ्तर रहने लायक भी नहीं है।

जंगल विभाग की जमीन पर बना 32 लाख रुपए का दफ्तर
कोटा में पहले से ही अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय का भवन है लेकिन पांच साल पूर्व यह भवन 32 लाख रुपए की लागत से बनाया गया है। कोटा अनुविभाग में राजस्व विभाग की जमीन ही नहीं है। यहां लगभग सभी जगह छोटे-बड़े घास का जंगल है। कोटा पीडब्ल्यूडी सबडिवीजन के सब इंजीनियर ललित सिन्हा के मुताबिक तब इस भवन की प्लानिंग तत्कालीन एसडीएम एमके गुप्ता के निर्देश पर की गई थी। निर्माण के बाद से ही यह भवन ऐसे ही पड़ा है।

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