सिम्स की मनमानी:दो बार पहले भी लौटाया था, फिर बुलाया और कह दिया मशीन खराब है नहीं होगी एमआरआई

बिलासपुर2 महीने पहले
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एमआरआई कक्ष के बाहर इंतजार करते रहे मरीज। - Dainik Bhaskar
एमआरआई कक्ष के बाहर इंतजार करते रहे मरीज।

दोपहर 3.20 बजे की बात है। सिम्स के एमआरआई कक्ष के बाहर 37 वर्षीय कुसुम भगत बैठीं थीं। कुसुम कमर दर्द के साथ पूरे शरीर में दर्द की पीड़ा से जूझ रही हैं। बगल में बैठे उनके पति जागेश्वर प्रसाद से बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि वे कोरबा से आए हैं। पिछले दो घंटे से एमआरआई कराने के इंतजार में बैठे हैं। ले देकर किसी तरह आज एमआरआई के लिए हां तो कहा, लेकिन इंतजार अभी भी खत्म नहीं हुआ। क्यों पहले भी आप एमआरआई के लिए आ चुके हैं क्या? इतना पूछते ही जागेश्वर प्रसाद खुलकर बोले कि दो बार बिना एमआरआई कराए यहां से लौट चुका हूं।

कोरबा से बार-बार आने में समय लगता है और सफर में तकलीफ भी होती है, लेकिन यहां के लोग बिना जांच के किए लौटा देते हैं। 15 दिन पहले कुसुम को मेडिसिन विभाग के डॉक्टर चंद्र किरण को दिखाया था। उन्होंने एमआरआई कराने के लिए लिखा था। 23 नवंबर को जागेश्वर अपनी पत्नी कुसुम को एमआरआई के लिए लेकर गए तो वहां के कर्मचारियों ने उन्हें यह कहकर लौट दिया आज नहीं होगी। 25 नवंबर की डेट दी और कहा कि आकर करा लीजिएगा। जागेश्वर जब 25 को पहुंचे तो एमआरआई कक्ष में बैठे कर्मचारी ने कह दिया कि मशीन खराब है इसलिए आज एमआरआई नहीं होगी।

एक दिसंबर को आना। पत्नी को लेकर आए जागेश्वर को मायूस होकर वहां से वापस कोरबा लौटना पड़ा। बुधवार को फिर जागेश्वर पहुंचे तो उन्हें इंतजार करने के लिए कहा। दो घंटे तक इंतजार के बाद शाम 4.30 बजे उनकी एमआरआई जांच पूरी हो पाई। जागेश्वर बोले कि सिम्स में एमआरआई कराना बहुत कठिन है। 3500 रुपए की रसीद कटाई। हफ्तेभर भटकने के बाद एमआरआई हो पाई। पत्नी दर्द की पीड़ा से जूझती रही, क्योंकि डॉक्टर रिपोर्ट बिना देखे आगे का इलाज नहीं करते। इस व्यवस्था में सुधार होना जरूरी है।

कांग्रेस नेता से टेक्नीशियन से हुआ था जमकर विवाद

18 सितंबर को मसानगंज निवासी चुट्‌टू अवस्थी के बड़े भाई रवि शंकर अवस्थी को सिम्स में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने एमआरआई के लिए लिखा। टेक्नीशियन तुलाराम तांडे को एमआरआई कराने भेजा। घंटों इंतजार के बाद परिजनों ने कांग्रेस नेता पंकज सिंह को बताया तो सिम्स पहुंचे। टेक्नीशियन से बहस के बाद एमआरआई हो पाई। पंकज ने कहा था कि जानबूझकर जांच नहीं करते ताकि परेशान होकर लौट जाएं।

एचओडी से कर चुके दुर्व्यवहार

हाल ही में 30 नवंबर को रेडियोलॉजी विभाग की एचओडी डॉक्टर अर्चना सिंह के साथ कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार किया और उन्हें धमकी भी दी थी। डॉक्टर अर्चना ने नामजद शिकायत करते हुए कार्रवाई के लिए चिट्ठी लिखी लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में डॉक्टर अर्चना ने तुलाचंद तांडे, संदीप वर्मा, नंदकिशोर चन्द्राकर, टीकाराम मतवाले, अमर साय पैकरा, रूपेंद्र पोर्ते, हेमलता मरावी, मोनिका साहू, सनत टेकाम के नाम लिखे थे लेकिन किसी पर कोई आंच नहीं आई।

  • तारीख देने के बाद भी मरीजों की सीटी स्कैन और एमआरआई जांच क्यों नहीं की जा रही?
  • -ऐसा नहीं होना चाहिए। मैं लगा हूं व्यवस्था को बेहतर बनाने में।
  • यहां कभी डॉक्टर तो कभी कर्मचारी आपस में ही क्यों झगड़ रहे हैं? इस विवाद के कारण जांच बंद हो जाती है और मरीज लौटते हैं?
  • -मैं इसका रास्ता निकाल रहा हूं। दो-चार दिन में कुछ व्यवस्था बदलेगी।
  • हाल ही में डॉक्टर के साथ कर्मचारियों ने दुर्व्यवहार किय था? इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
  • -कमेटी बनाई गई है। जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई करेंगे।
  • कर्मचारी मरीजों से जांच के नाम पर पैसों की मांग भी करते हैं?
  • -शिकायत मिली थी लेकिन जांच में अभी तक कुछ सामने नहीं आया है।

नीरज शेंडे, सिम्स अधीक्षक

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