सेवा में बहाली का हकदार:26 साल पहले पत्नी की मौत के बाद बर्खास्त हुआ था हेड कांस्टेबल पति, अब होगी बहाली

बिलासपुर5 दिन पहले
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पत्नी  की 26 साल पहले मौत हो गई थी - Dainik Bhaskar
पत्नी  की 26 साल पहले मौत हो गई थी
  • उकसाने का था आरोप, विभाग से राहत नहीं मिलने पर लगाई थी याचिका

प्रधान आरक्षक की पत्नी की 26 साल पहले मौत हो गई थी। आरोप था कि पति के दूसरी महिला से अवैध संबंधों से परेशान होकर महिला ने खुदकुशी कर ली थी। वर्ष 1992 में हुई घटना के बाद प्रधान आरक्षक पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 और 498 ए के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

विभाग ने कार्रवाई करते हुए आरक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इधर, कोर्ट ने वर्ष 1997 में उसे दोषमुक्त कर दिया था, लेकिन विभाग ने बहाली नहीं की, इसके खिलाफ अदालत में मामला पेश किया गया। घटना के 26 साल बाद जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच ने आरक्षक के पक्ष में फैसला देते हुए कहा है कि दोषमुक्त होने के आधार पर वह सेवा में बहाली का हकदार होगा।

राजनांदगांव के डोंगरगांव में रहने वाले आरक्षक महेंद्र कुमार साहू की पत्नी सीमा साहू ने 1 दिसंबर 1994 को खुदकुशी कर ली थी। आरक्षक साहू के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 और 498 ए के तहत अपराध दर्ज किया गया था। आरोप था कि शादी के बाद भी उसके दूसरी महिला से अवैध संबंध थे, इससे पत्नी परेशान थी।

इसके साथ ही वह अपनी पत्नी के चरित्र पर शक भी करता था, इस वजह से त्रस्त होकर पत्नी ने खुदकुशी कर ली थी। आरक्षक साहू के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए 28 फरवरी 1995 को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

बरी करने के खिलाफ अपील भी हुई थी खारिज
ट्रायल कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद साहू ने बहाली की मांग करते हुए विभाग में अभ्यावेदन पेश किया, लेकिन उसे बहाल नहीं किया गया। इधर, दोषमुक्त करने के आदेश के खिलाफ राज्य शासन ने अपील की, जिसे हाईकोर्ट ने 15 जनवरी 2014 को निरस्त कर दिया था। वहीं, साहू की याचिका को आंशिक रूप से मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने एसपी को अभ्यावेदन का नियमानुसार निराकरण के निर्देश दिए थे, लेकिन एसपी ने अभ्यावेदन नामंजूर कर दिया।
अब जाकर हाईकोर्ट से मिली राहत
साहू ने अभ्यावेदन नामंजूर करने के आदेश के खिलाफ एडवोकेट गौतम खेत्रपाल के जरिए हाईकोर्ट में याचिका पेश की थी। मामले पर जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सेवा से बर्खास्त करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि दोषमुक्त होने के बाद वह पुलिस रेगुलेशन के विनियम 241 के तहत बहाली का हकदार है। हाईकोर्ट ने उसे समस्त बैक वेजेस का लाभ देते हुए तीन माह के भीतर सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए हैं।

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