डामर घोटाला मामले में HC सख्त:कोर्ट ने PWD के सचिव से मांगा 4 हफ्ते में जवाब, अब तक कार्रवाई नहीं होने के चलते दुबारा दायर की गई है याचिका

बिलासपुर2 महीने पहले
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डामर घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने PWD के सचिव से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। - Dainik Bhaskar
डामर घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने PWD के सचिव से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।

छत्तीसगढ़ राज्य में हुए डामर घोटाले के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग(PWD) के सचिव से 4 सप्ताह के भीतर शपथपत्र में जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने सचिव से पूछा कि अब तक इस मामले में क्या जांच और कार्रवाई की गई। इसका पूरा ब्यौरा दें।

प्रदेश में हुए डामर घोटले का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट में जनहित के रूप में पेश किया गया है। इसी मामले को लेकर इससे पहले दायर की गई जनहित याचिका को एक्टिंग चीफ जस्टिस ने व्यक्तिगत कारणों के चलते सुनवाई करने से इंकार कर दिया था। दोबारा इस मामले में लगाई गई याचिका को स्वीकार कर लिया गया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस विमला सिंह कपूर की डिवीजन बेंच कर रही है।

पिछली सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि वह बताए कि इस मामले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई की गई है। बेंच ने शासन को 2 सप्ताह में जवाब पेश करने निर्देश दिया था। इससे पहले 2019 में इसी मामले पर सुनवाई के दौरान शासन ने कोर्ट से कहा था कि मामले में कार्रवाई होगी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शासन के जवाब से संतुष्ट होकर निर्देश देते हुए जनहित याचिका को निराकृत कर दिया था। इसके बाद से अब तक कार्रवाई नहीं होने पर फिर से दोबारा जनहित याचिका पेश की गई है।

2016 में रायपुर के वीरेंद्र पाण्डे ने डामर घोटाले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि प्रदेश भर में 21 सड़कों के निर्माण के लिए एडीबी से 12 सौ करोड़ का कर्ज लिया गया था। 12 सौ करोड़ में से तकरीबन 200 करोड़ का घोटाला किया गया है। एक ही बिल को लगाकर कई सड़कों का निर्माण होना दर्शाया गया है। मामले की जांच के लिए वीरेंद्र पाण्डे ने पीआईएल दायर की थी।

पुराने अंडर टेकिंग पर कार्रवाई नहीं

उस दौरान शासन से मिली अंडर टेकिंग पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर पाण्डेय ने फिर एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा के माध्यम से याचिका पेश की है। इसमें सोमवार को जस्टिस एमएम श्रीवास्तव की बेंच ने सुनवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग के सचिव से शपथ पत्र में चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है कि उनके द्वारा इस मामले में अब तक क्या जांच और कार्रवाई की गई है।

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