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हुक्काबारों के खिलाफ दैनिक भास्कर अभियान:हुक्काबार नशे की नर्सरी, बच्चों को एंट्री देने वाले समाज के दुश्मन, अंकुश लगाएं

बिलासपुर4 महीने पहले
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हुक्काबारों में पहले फ्लेवर देते थे। अब तंबाकू देने लगे हैं। नया ट्रेंड शुरू हो चुका है, आने वाले युवाओं और बच्चों को नशे के रूप में सिगरेट के तंबाकू के अलावा गांजा मिला हुआ हुक्का पिलाया जा रहा है। उनको तेजी से नशा असर करे इसके लिए यह सब किया जा रहा है। मनोचिकित्सक कहते हैं पहले तंबाकू, सिगरेट, गांजा और भांग से नशे की शुरुआत होती थी, अब भी ट्रेंड वही है, बस उसको शुरू करने का तरीका हुक्काबार बन गए हैं। यह ड्रग्स की नर्सरी हैं। वे बच्चे ही हुक्काबार जाते हैं जो खर्च को वहन कर पाते हैं। ऐसे बच्चों का इलाज मेडिकल कॉलेज और ओएसटी सेंटर के बजाय निजी दवाखाना में करा रहे हैं। नशे की शुरुआत पहले भी सिगरेट और तंबाकू से होती है, लेकिन अब हाईप्रोफाइल घरों के बच्चे सीधे पब और हुक्काबारों में जा रहे हैं। यहां से आगे जाकर वे ब्राउन शुगर, इंजेक्शन और हीरोइन जैसे ड्रग्स की तरफ चले जाएंगे। ये हुक्काबार, नुक्कड़ के पान ठेले जैसे ही घातक हैं।

खाद्य पदार्थ बिक्री के लिए एफएसएसएआई का लाइसेंस
अधिवक्ता रोहित शर्मा ने बताया कि किसी भी खाद्य पदार्थ की बिक्री के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम (एफएसएसएआई) से लाइसेंस होना जरूरी है। बिलासपुर में इसका पालन नहीं हो रहा है। कोई भी विभाग इसके संचालन की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है। हुक्काबारों में फ्लेवर के साथ तंबाकू भी रख रहे हैं। जबकि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू बेच नहीं सकते। लेकिन यहां हर वक्त स्कूल, कॉलेज के बच्चे ही मिलते हैं। इसके लिए फूड एंड सेफ्टी अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। अब तो यहां नारकोटिक्स चीजें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। रायपुर में जिस तरह से छापेमारी में खुलासा हुआ है, निश्चित ही बिलासपुर में भी इस तरह की गतिविधियां मिलेंगी।

समाज में जागरुकता आएगी तभी रुक पाएगा
किसी भी नशे को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिए जाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, पर्याप्त जागरुकता होने से ही समस्या का हल निकलेगा। बच्चों को बताना होगा उनके लिए क्या फायदेमंद है और क्या नुकसानदेह है। इसके लिए खुद से शुरुआत करनी होगी, अपने बच्चे को अगर हम गलत दिशा में नहीं जाने देंगे तो वह आगे इस गलत मार्ग को नहीं पकड़ेगा और वह कभी भी हुक्काबार नहीं जाएगा।

बच्चे के सोशल मीडिया पर नजर रखें : हम अपने बच्चों पर नजर नहीं रख रहे। जब भी बच्चा बाहर निकल रहा है, वह किससे दोस्ती रख रहा है, कहां घूमने जाता है, किसके सोशल मीडिया में अपडेट होता है। ऐसे में किसी भी नशे से बच्चे को बचाने के लिए बस उसके सोशल मीडिया पर नजर रख लें तो उसके बारे में सब कुछ पता चल जाएगा।

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