कोरबा के युवा ने जीती कोरोना से जंग / मैंने कहा था- कोरोना से डरो नहीं लड़ो और आज यह लड़ाई जीत ली

I said - don't be afraid of Corona and win this battle today
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I said - don't be afraid of Corona and win this battle today

  • कोरोना आपकी जान नहीं ले सकता, बशर्ते आप, धैर्य और डॉक्टरों के बताए रास्ते पर चलें

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 05:00 AM IST

बिलासपुर/कोरबा. मैं सोच रहा था कि मैं 25 साल का युवक हूं। मुझे काेराेना कैसे हो सकता है। इन सवालों के जवाब ढूंढने के लिए पीछे चलते हैं। मैं दो साल से दिल्ली में था। सुना था कि आदमी को कुछ बड़ा बनने के लिए दिल्ली तो जाना ही पड़ता है।
मैं भी भविष्य की उम्मीदें लेकर पढ़ाई करने राजधानी जा पहुंचा। जनता कर्फ्यू के दो दिन पहले 20 मार्च को मेरे दोस्त और रूममेट रायपुर और भिलाई की ओर जा रहे थे। उन्होंने मुझसे कहा, भाई चलते हैं घर, लॉकडाउन और ये महामारी बहुत दिनों तक रहेगी, लेकिन मुझे उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ, इसीलिए मैं फिर एक बात फिर गलत था। वे चले गए और हम तीन दोस्त बचे थे। मुझे लगा कि काश घर चले जाना था। इस रोज के झंझट से बच जाते और मां के हाथ का खाना खा पाते। सोचते-सोचते 40 दिन बीत गए। फिर 28 अप्रैल की रात को मेरी तबीयत बिगड़ी। मुझे लगा ये नार्मल है। मैंने टेबलेट ली और दो दिन में राहत मिल गई। पर खांसी मेरे साथ रही। मुझे लगा नार्मल खांसी है सीरप से ठीक हो जाएगी। फिर मैंने गरम पानी पीना शुरू किया। जब 12 मई को मैं दिल्ली स्टेशन पहुंचा ताे काफी लंबी लाइन लगी थी। सोशल डिस्टेंसिंग भी नहीं थी। बिलासपुर तक का मेरा सफर पूरा हुआ। बिलासपुर स्टेशन पर पूरी व्यवस्था थी। यहां से मैं एक घंटे में प्रशासन की बस से कोरबा पहुंचा। वहां एक निजी हाेटल में मुझे क्वारेंटाइन किया गया। वहां भी सब सही चल रहा था। 15 मई को मेरा पहला सीटी पीसीआर टेस्ट हुआ। 18 मई की शाम को मैं अपने मोबाइल में फिल्म देख रहा था। उसी समय मेरे पास एसडीएम सर का फोन आया और कहा कि तुम्हारा कोराेना टेस्ट पॉजिटिव आया है। मैं उन लोगों से सिर्फ इतना कहना चाहता हूं जो कोरोना को लेकर भयभीत हैं वे इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा मान लें। इस वायरस में इतनी ताकत नहीं है कि आपकी जान ले ले, बशर्ते आपको धैर्य रखना होगा। इन आठ दिनों में मैंने कोरोना बस को नहीं हराया बल्कि धैर्य और शांति भी सीखी। जिंदगी का एक अलग अनुभव हुआ। मरीजों की सुरक्षा में जुड़ी डॉक्टर, नर्स अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को मेरा सलाम, जो समय-समय पर आपका ख्याल रख रहे हैं। मैंने योगा किया, मन को शांत रखा और डॉक्टरों द्वारा दी जा रही दवाइयों समय पर सेवन किया। बस इतने से ही कोरोना से मैं जीत गया। 
(जैसा कोरबा के एक युवक ने कोरोना को हराने के बाद दैनिक भास्कर के रिपोर्टर को बताया)
केक कटवाया और जाते-जाते सभी को दिया धन्यवाद 
मंगलवार को जैसे ही मुझे मेरी रिपोर्ट निगेटिव होने की खबर मिली। मैं खुशी से झूम उठा, घर वालों से बात की और खुशी-खुशी जोमेटो से केक के लिए आर्डर किया। शाम को मैडम मधुलिका सिंह से केक कटवाया और मैंने उन्हें धन्यवाद दिया कि उन्होंने मेरा इतना ख्याल रखा। फ्री में सबकुछ मिला। जाते समय सफेद कुर्ता और पैजामा भी दिया। जाते-जाते ये चार लाइन भी कहीं एक दिन आप हमको मिल जाएंगे। फूल ही फूल राहों में खिल जाएंगे। मैंने सोचा न था।

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