CG के 90 अफसरों को भ्रष्ट बताने वाली याचिका खारिज:हाईकोर्ट ने एक पत्र मिलने के बाद जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की थी; पिटिशनर कोर्ट में नहीं कर पाए तथ्यों को साबित

बिलासपुर10 महीने पहले
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गुलाम अली द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश ना कर पाने की वजह से कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। - Dainik Bhaskar
गुलाम अली द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश ना कर पाने की वजह से कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है।

प्रदेश के 90 अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार की कार्रवाई को लेकर लगी जनहित याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। मामले में याचिकाकर्ता अपने तथ्यों को कोर्ट में साबित नहीं कर पाए जिसकी वजह से याचिका खारिज हुई है।

हाईकोर्ट को रायपुर के मोहम्मद गुलाम अली खान ने पत्र लिखा था। इसमें बताया गया कि प्रदेश के करीब 90 प्रमुख अफसरों के खिलाफ ACB में लंबे समय से प्रकरण लंबित है और कार्रवाई नहीं की जा रही है। इनमें कई IAS स्तर के भी अफसर हैं। यह भी कहा गया कि भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों पर कार्रवाई न होने से वे विभागों में जमे हुए हैं और वेतन और अन्य सुविधाएं पा रहे हैं। जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए इस पर सुनवाई शुरू कर दी थी। इस याचिका में मोहम्मद गुलाम अली पेटीशनर इन पर्सन यानी वह खुद इस मामले में पैरवी कर रहे थे। लेकिन सुनवाई के दौरान कोई भी ठोस सबूत वह अदालत के सामने पेश नहीं कर पाए इसकी वजह से अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।

भाजपा शासन में विधानसभा में उठा था भ्रष्टाचार का मुद्दा

पूर्व की डॉ. रमन सिंह की भाजपा सरकार के दौरान साल 2016 में विधानसभा में अफसरों पर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा था। उस समय विधायक देवजी भाई पटेल ने इसे लेकर सवाल किया था। जिसके बाद सरकार की ओर से लिस्ट भी विधानसभा में सौंपी गई थी। जिसमें अफसरों पर लंबित भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी दी गई थी। इसमें ही 90 के करीब अफसर बताए गए थे। इसी को आधार बनाकर शिकायत कोर्ट से की गई थी।

90 अधिकारियों का दिया था नाम

मोहम्मद गुलाम अली ने अपने पत्र में 90 अधिकारियों का जिक्र किया था। इनमें पटवारी से लेकर डिप्टी कलेक्टर रैंक के अधिकारियों के नाम शामिल थे। अपने पत्र में उन्होंने बिलासपुर के चर्चित पटवारी आभा और अचला तंबोली का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा की दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला बना था। लेकिन अचला तंबोली के पति के एसीबी में पदस्थ होने की वजह से मामले को रफा-दफा कर दिया।

कहां - पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी दस लाख रिश्वत लेकर कर देते हैं मामले को रफा-दफा

गुलाम अली ने अपने पत्र में बताया कि पिछले 3 सालों में एसीबी ने एक भी छापे मार कार्रवाई नहीं की है। जबकि पिछली सरकार में 300 से अधिक ऐसी कार्रवाईयां की गई थी। उन्होंने कहा कि आय से अधिक संपत्ति मामले में प्रकरण तो दर्ज जरूर होते हैं लेकिन पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ऐसे मामलों को 10-10 लाख रुपए लेकर मामला खत्म कर देते हैं।

लिस्ट में शामिल महत्वपूर्ण 36 नाम केवल बिलासपुर जिले से -

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम बिलासपुर जिले के पूर्व तहसीलदार नारायण प्रसाद गवेल का था, वहीं राजस्व विभाग रायपुर में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर एच.के शर्मा का भी नाम इसमें शामिल था। 90 अधिकारियों में सबसे अधिक बिलासपुर जिले के 36 अधिकारियों का नाम इस लिस्ट में शामिल था। वहीं लिस्ट में मुंगेली, जांजगीर, राजनांदगांव समेत अन्य जिले के अधिकारियों के भी नाम शामिल थे।

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