धान की खरीदी कल से, हालात चिंताजनक:खरीदी शुरू से तेज रही तो एक हफ्ते में खत्म हो जाएंगे बारदाने

बिलासपुर2 महीने पहले
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बिरकोना धान खरीदी केंद्र में जमीन पर गोबर लीपते मजदूर। - Dainik Bhaskar
बिरकोना धान खरीदी केंद्र में जमीन पर गोबर लीपते मजदूर।

धान खरीदी केंद्र में खरीदी के एक दिन पहले बेहद कम संख्या में बारदाना भेजे गए हैं। अफसरों का दावा है कि शुरू में खरीदी धीमी गति से होगी जबकि बाद में यह रफ्तार पकड़ेगी। इधर बारदाना संकट को देखते हुए किसान पहले दिन से धान खरीदी केंद्रों में जाने की तैयारी कर चुके हैं। बाजार में अभी 35 रुपए प्रति बारदाना बिक रहा है। मार्कफेड ने सभी धान खरीदी केंद्र में 15 हजार नया बारदाना भेजा हैं जो औसतन हफ्ते भर की धान खरीदी के लिए है जबकि 50 फीसदी धान खरीदी पुराने बारदाने से होनी है।

दैनिक भास्कर ने दो दिन पहले धान खरीदी केंद्रों का दौरा किया जिसमें आधी-अधूरी तैयारियां ही नजर आई। नेवरा धान खरीदी केंद्र खुले में है। यहां पहले की तुलना में इस बार तार की फेसिंग हो चुकी है। पक्के चबूतरे भी बने है लेकिन धान खरीदी की तुलना में यह पर्याप्त नहीं है। यहां कोई कर्मचारी नजर नहीं आया और ना ही धान खरीदी केंद्र की साफ-सफाई हुई। खरीदी केंद्र में बारदाने के गठान भी नजर नहीं आए। खरीदी केंद्र का कामकाज संभालने वाले महेंद्र बघेल ने बताया कि 10 हजार बारदाने भेजे हैं। कुछ दिनों के लिहाज से तो यह ठीक है लेकिन बाद का पता नहीं। पिछले साल पूरे धान खरीदी के दौरान 1 लाख बारदाने की खपत यहां हुई। बिरकोना धान खरीदी केंद्र में कुछ महिलाएं खरीदी केंद्र को गोबर से लीप रही थी। वहीं पास धान के भूसे की कुछ बोरियां रखी हुई थी जिसके ऊपर धान के बोरे रखे जाने हैं।

खरीदी के समय लाना होगा बारदाना
धान खरीदी के पहले दिन नए और पुराने 50-50 फीसदी बारदानों का ही उपयोग होना है। कम संख्या में नए बारदाने तो भेज दिए गए लेकिन पुराने बारदाने मिलर, पीडीएस और किसानों को पूरा करना है। मार्कफेड के डीएमओ उपेंद्र कुमार की माने तो पिछले बार किसानों का बारदाना बाद में उपयोग में लाया गया था लेकिन इस बार धान खरीदी की शुरुआत में उन्हें लाना होगा। किसानों के पास बारदाना नहीं होने की स्थिति में क्या होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

संगठन बोले- किसानों को लूट रही राज्य सरकार

जूट बारदाने की होगी दिक्कत, अभी 35 रुपए में मिल रहा
बारदाना व्यापारी कपूरचंद अग्रवाल कहते हैं कि इस साल जूट के बारदाने की किल्लत होगी। शहर में फिलहाल लोकल खरीदी पर आधारित यह कारोबार है। अभी सही गुणवत्ता का बारदाना 35 रुपए प्रति नग मिल रहा है जो आगे 40 रुपए तक जाएगा। मीडियम क्वालिटी का 30 रुपए प्रति नग है। प्लास्टिक बारदाना 12 रुपए नग है। यह पर्याप्त संख्या में है।

पिछले साल का 37 करोड़ बकाया
किसान संघ के जिलाध्यक्ष धीरेंद्र दुबे ने कहा कि राज्य सरकार किसान हितैषी होने का ढोंग कर रही है। पिछले साल के धान खरीदी के 37 करोड़ रुपए बकाया हैं जो उन्हें नहीं मिले हैं। राज्य सरकार भारतीय खाद्य निगम से प्रति बारदाना 50 रुपए लेती है जबकि किसान को प्रति बारदाना 15 रुपए दिया जाता है। 1 क्विंटल में धान के तीन बोरे आते हंै। इस लिहाज से प्रति क्विंटल राज्य सरकार 150 रुपए लेती है लेकिन किसान को सिर्फ 45 रुपए देती है। बचे पैसों का राज्य सरकार क्या उपयोग कर रही है।

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