पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Bilaspur
  • Illegal Construction In More Than 1000 Shops Of The Corporation; Proposal To The Government For Regularization Instead Of Action, Construction Without Permission On Its Own Shops

मिलीभगत:निगम की 1000 से अधिक दुकानों में अवैध निर्माण; अपनी ही दुकानों पर बिना अनुमति निर्माण, कार्रवाई की बजाय नियमितीकरण के लिए शासन को प्रस्ताव

बिलासपुर16 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
शनिचरी स्थित भक्त कंवरराम मार्केट, जहां पर अवैध निर्माण कर दुकानों को दो मंजिला बना लिया गया है। - Dainik Bhaskar
शनिचरी स्थित भक्त कंवरराम मार्केट, जहां पर अवैध निर्माण कर दुकानों को दो मंजिला बना लिया गया है।

रिकार्ड में 567 चबूतरों को मिलाकर नगर निगम की 2930 दुकानें हैं। इसमें से आधे से अधिक में अवैध निर्माण है। 15 साल से ग्राउंड फ्लोर से ऊपर किसी दुकान में निर्माण की अनुमति नहीं ली गई है। इसके बावजूद आधे से अधिक दुकानों में अवैध निर्माण हो चुका है। शनिचरी, गोल बाजार चारों तरफ अवैध निर्माण से अटे पड़े हैं। गोल बाजार की गलियां गायब हो चुकी हैं। 5 साल पहले नगर निगम ने अपनी दुकानों में बिना अनुमति निर्माण के 204 प्रकरण बनाए।

नियमितीकरण के लिए शासन को प्रकरण भेजा। साल 2016-17 की कलेक्टर गाइड लाइन के मुताबिक 3555 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर से 12 करोड़ 25 लाख 13 हजार 270 रुपए नियमितीकरण का शुल्क निर्धारित करने शासन को प्रस्ताव भेज कर अफसर चुप बैठ गए। साल भर पहले तत्कालीन आयुक्त के कार्यकाल में अवैध निर्माण पर केवल एक प्रकरण पर कार्रवाई की गई। वाल्मीकि चौक शनिचरी स्थित कौशिल्या देवी अग्रवाल के नाम पर आबंटित दुकान क्रमांक 88 का आबंटन निरस्त किया गया। मिलीभगत के चलते अवैध निर्माण का प्रकरण नहीं बनाया।

नगर निगम की हालत खराब बिजली का 70 करोड़ बकाया
नगर निगम की माली हालत इतनी खराब है कि साल 2019 से बिजली का बिल नहीं पटा। बिजली कंपनी ने 70 करोड़ की वसूली के लिए नोटिस दिया है। निगम का मासिक स्थापना व्यय 5.50 करोड़ है। इसमें अकेले स्टॉफ के वेतन पर 3.50 करोड़ खर्च होते हैं। वेतन की राशि टैक्स की वसूली पर निर्भर है। वसूली गड़बड़ाई तो विगत महीने निगम को वेतन के लिए शासन से पैसा मांगना पड़ा था।

बेशकीमती जगह पर दुकानें, किराया 25 पैसे से 1000 रुपए
1936 में म्युनिस्पैलिटी के जमाने में गोल बाजार और शनिचरी में ग्राउंड फ्लोर की दुकानें व चबूतरे 25 पैसे से लेकर नाम मात्र के किराए पर आबंटित की गई। 1981 में जब नगर निगम बना तो फिर कुछ जगहों पर दुकानें व जमीन आबंटित की गई। उस वक्त दो रुपए प्रति वर्ग फुट की दर थी। आज शनिचरी सब्जी मंडी को छोड़कर चबूतरे कहीं नहीं हैं। सब तरफ दो और तिमंजिली दुकानें बन गईं और बनती जा रही हैं। प्रथम तल के ऊपर निर्माण की अनुमति नगर निगम अपने बूते पर नहीं दे सकता।

उसे शासन से अनुमति लेनी पड़ेगी। शासन की अनुमति लेना आसान नहीं है। इस पेचीदगी का फायदा उठा रहा है बाजार विभाग। वर्षों से बाजार विभाग में दुकानदारों को मरम्मत की अनुमति देने का खेल चल रहा है। एक ही जगह पर वर्षों से जमे अधिकारी मोटी रकम लेकर अनुमति जारी करते हैं और मौके पर अवैध रूप से दूसरी, तीसरी मंजिल के निर्माण होने पर झांकने तक नहीं आते। निगम की दुकानों का किराया 2019 से नहीं बढ़ा।

अभी तक सर्वे सूची नहीं बनी
बाजार विभाग ने 2016-17 में अवैध निर्माण के 204 प्रकरण बनाए। इसके बाद कोई सर्वे सूची नहीं बनी। जाहिर है कि अफसरों की मिलीभगत से अवैध निर्माण चल रहे हैं। शासन को नियमितीकरण के लिए भेजी गई सूची में शनिचरी में मुख्य मार्ग से हटकर 20 मीटर में स्थित दुकानों की संख्या 147, मुख्य मार्ग की 24 तथा शेष गोल बाजार की दुकानें शामिल हैं।

सीधी बात- अनिल सिंह, बाजार प्रभारी

शुल्क निर्धारण का मामला पेंडिंग
निगम की दुकानों में अवैध निर्माण के मामले में न तो कार्रवाई हो रही और न ही नियमितीकरण शुल्क वसूला जा रहा है, क्यों?
-204 दुकानों के नियमितीकरण शुल्क वसूलने के लिए साल भर पहले शासन को रिमांइडर भेजा गया था। इसके बाद सचिवालय से टेलिफोनिक जानकारी ली गई। निर्णय वहीं से होना है।

निगम की दुकानों पर लगातार अवैध निर्माण हो रहा है, क्या इसकी अनुमति ली जा रही है? -अवैध निर्माण की जानकारी नहीं है। निगम की दुकानों में अतिरिक्त निर्माण की अनुमति 10 साल से नहीं दी गई।

खबरें और भी हैं...