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एक साल में 62 वन्यजीव जन्में, रखने की जगह नहीं:पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा वन्यजीव इस वर्ष हुए पैदा, 172 सरप्लस

बिलासपुर10 दिन पहले
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कानन पेंडारी चिड़ियाघर में एक ओर वन्यजीवों को रखने जगह की कमी है तो दूसरी तरफ वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जू प्रबंधन परेशान है कि आखिर जीवों को कहां और कैसे रखें ताकि ये सुरक्षित रह सकें। पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा 62 वन्यजीवों का जन्म कोरोना के एक वर्ष में हुआ है।

एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक कानन में 62 जीव पैदा हुए। सबसे ज्यादा 23 चित्तीदार हिरण पैदा हुए हैं। काला हिरण और नीलगाय के 9-9 बच्चे पैदा हुए। जबकि पिछले वर्ष की बात करें तो एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक 32 जीव पैदा हुए थे। बीते वर्ष भी चित्तीदार हिरण की संख्या ज्यादा थी। इधर जू में 172 वन्यजीव सरप्लस हैं जिन्हें दूसरे जू भेजने प्रबंधन ने सूची बना रखी है। संख्या अधिक हो जाने के कारण जू में वन्यजीवों के बीच आपसी झगड़ा हो रहा है जिसके कारण उनकी मृत्यु हो रही है। पिछले एक वर्ष में 15 से ज्यादा वन्यजीवों की मौत आपसी झगड़े के कारण हुई है।

सबसे ज्यादा हिरण, चीतल आपसी झगड़े में दम तोड़ रहे हैं। कानन अधीक्षक संजय लूथर का कहना है कि इस प्रजाति के जीवों की संख्या इसी तरह बढ़ती है। दो से चार तो चार से आठ होते हैं। अब इन्हें रोकना हमारे बस में नहीं है। जो 172 सरप्लस जीव हैं उन्हें दूसरे जू भेजने की तैयारी कर रहे हैं ताक जू में कुल जगह बने और वन्यजीवों के बीच आपसी झगड़े रुके जाएं।

66 प्रजाति के 660 से अधिक वन्यजीव हैं यहां
वर्तमान में 66 प्रजाति के 660 से अधिक वन्यजीव हैं। जिन्हें रखने के लिए सिर्फ 35 केज हैं। चीतल, हिरण सहित अन्य वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है। चीतलों की संख्या बढ़कर तीन गुना हो गई है। इन्हें जंगल शिफ्ट करने के लिए अनुमति मिले तीन वर्ष हो चुके हैं। लेकिन फंड नहीं होने के कारण इनकी शिफ्टिंग नहीं हो पा रही है। पहले इनकी संख्या 125 थी। अब संख्या बढ़कर 150 से ज्यादा हो गई है। जू में सिर्फ 50 चीतलों को ही रखने की जगह है।

2017 के बाद से शावकों का नहीं हुआ जन्म
वर्ष 2017 के बाद से एक भी शावकों का जन्म कानन में नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण जू में रॉयल बंगाल टाइगर की संख्या क्षमता से ज्यादा होना और इन्हें रखने के लिए केज की कमी को बताया जा रहा है। वर्तमान में कानन में 7 रॉयल बंगाल टाइगर हैं। 9 बाघ और तीन सफेद बाघ हैं।

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