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म्यूकर माइकोसिस:पहली बार में इंफेक्शन खत्म नहीं हो पाया, जबड़े और दांतों में फिर ब्लैक फंगस

बिलासपुर19 दिन पहले
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  • अभी तक 43 मरीज मिल चुके हैं, सिम्स में चार का चल रहा इलाज, 38 स्वस्थ होकर जा चुके, दाे की मृत्यु भी चुकी है

जिन मरीजों को दोबारा ब्लैक फंगस हुआ है। उसका कारण ये है कि पहली बार पूरी तरह से इंफेक्शन खत्म नहीं हो पाया। पहले इन मरीजों की नाक और साइनस में फंगस था। सिम्स में भर्ती हुए। दवाई और साइनस की सर्जरी के जरिए फंगस हटाने की कोशिश की गई। कुछ मरीजों के इंफेक्शन साइनस के बाद भी ऊपर के जबड़े तक फैल चुका था।

कुछ के दांत हिल रहे थे, और मसूड़ों में सूजन थी। हमने जबड़ा निकालना सही नहीं समझा। क्योंकि जबड़ा और तालू के निकल जाने से मरीज को बहुत तकलीफ होती है। मरीज खाना तक नहीं खा पाते यह सोचकर हमने जबड़े और दांतों के इंफेक्शन को दवाइयों और साइनस सर्जरी से ठीक करने की कोशिश की।

जब मरीज पहली बार यहां से ठीक होकर गए तो उन्हें कोई तकलीफ नहीं थी। दवाइयां बंद हुईं तो उनके ऊपर के जबड़े में इंफेक्शन बढ़ने लगा। अब इन मरीजों के जबड़े और तालू को ही निकालना पड़ेगा। अभी तक दो मरीजों के दो बार ब्लैक फंगस के ऑपरेशन हुए हैं। एक का नाक के इंफेक्शन के साथ बाद में तालू और जबड़ा निकाला गया। वहीं दूसरे मरीज के दांत निकले हैं।

वह अभी भर्ती है। अगर आराम नहीं हुआ तो उसका भी तालू-जबड़ा निकला जाएगा। हमारी पहली कोशिश रहती है कि बिना तालू-जबड़े को निकले मरीज ठीक हो जाए लेकिन जब मजबूरी होती है तभी तालू-जबड़े को निकालते हैं।

तालू-जबड़ा निकलने के बाद कुछ दिन तक मरीज सेमी-सोलेट डाइट पर चलता है। फिर चार से छह महीने बाद वे आर्टिफिशियल दांत लगवाए जा सकते हैं। जब तक इन मरीजों को दूसरी तरफ से खाना-खाना पड़ता है। यह बीमारी खतरनाक है।

एकदम से मरीज ठीक नहीं होता। धीरे-धीरे उसे आराम मिलता है। अभी तक कुल चार मरीज ऐसे मिले हैं जिन्हें दोबारा ब्लैक फंगस हुआ है। एक डिस्चार्ज हो गया और तीन अभी भर्ती हैं। दो के ऑपरेशन होने हैं। तैयारी चल रही है। - डॉ. संदीप प्रकाश, दंत रोग विभागाध्यक्ष सिम्स

केस 1 नाक से मुंह तक पहुंचा इंफेक्शन, अब राहत

गौरेला-पेंड्रा जिले की रहने वाली 35 वर्षीय महिला 22 अप्रैल को कोरोना की चपेट में आई। 14 दिन संक्रमण से लड़ी और स्वस्थ हो गई। कुछ दिन बाद नाक में दर्द शुरू हुआ। सिम्स के डॉक्टरों को दिखाया। यहां जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि होने के बाद 17 मई को वे भर्ती हो गईं। 19 मई को महिला का ऑपरेशन किया गया और नाक में फैल चुके फंगस को निकाला गया।

28 मई को ठीक होकर चली गईं। कुछ दिन बाद उन्हें दांतों में दर्द शुरू हुआ। खाना-खाने में परेशानी होने लगी। परिजन महिला को 29 जून को लेकर सिम्स आए। यहां डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस होना बताया। लेकिन इस बार दांतों और ऊपरी जबड़े में इंफेक्शन फैल चुका था। 3 घंटे तक चले ऑपरेशन में महिला के राइट साइड का ऊपरी जबड़ा, तालू और आठ दांत निकाले। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत पहले से थोड़ी ठीक है। वे सिम्स से डिस्चार्ज हो चुकी हैं।

केस 2 दूसरे ऑपरेशन में दांत निकले, अभी चल रहा इलाज

जांजगीर के निवासी 35 साल के युवक को 22 मई को कोरोना हुआ। इस बीमारी से जीते ही थे कि उनकी नाक में दर्द होने लगा। सिम्स के डॉक्टरों को दिखाया तो 27 मई को ब्लैक फंगस होने का पता चला। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने नाक का ऑपरेशन कर फंगस को निकाला। लेकिन वह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

दांत और जबड़े में दर्द होने की शिकायत लेकर मरीज 2 जुलाई को सिम्स में भर्ती हुआ। जांच के बाद पता चला कि फंगस दांत और जबड़ा तक पहुंच चुका है। अभी मरीज के दांत निकाले गए हैं। पहले से आराम तो है लेकिन तकलीफ अगर बढ़ेगी तो जबड़ा और तालू भी निकालना पड़ सकता है।

केस 3 जबड़े का ऑपरेशन करने की तैयारी

जरहाभाठा निवासी 58 साल के पुरुष को कोरोना से ठीक होने के बाद नाक में दर्द होने लगा। इलाज कराने 21 मई को सिम्स पहुंचे तो ब्लैक फंगस होने का पता चला। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर नाक का फंगस निकाला और वे स्वस्थ होकर घर चले गए।

तीन जुलाई को दांत और मुंह में दर्द की पीड़ा लेकर सिम्स पहुंचे तो डॉक्टरों ने दूसरी बार ब्लैक फंगस होना बताया। लेकिन इस बार उनके जबड़े तक इंफेक्शन पहुंच चुका है। मरीज अभी सिम्स में भर्ती है। ऑपरेशन करने की तैयारी है।

केस 4 जून में पहला और जुलाई में दूसरी बार फंगस हुआ

तारबहार निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग को भी दूसरी बार ब्लैक फंगस बीमारी ने चपेट में ले लिया है। मई में उन्हें कोरोना हुआ। ठीक होने के बाद नाक में दर्द का इलाज कराने सिम्स पहुंचे तो 6 जून को ब्लैक फंगस का पता चला। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के बाद नाक से फंगस को निकाला।

इंफेक्शन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। धीरे-धीरे बढ़कर वह मुंह तक पहुंचा तो दांत और जबड़े में तकलीफ होने लगी। 11 जुलाई को बुजुर्ग सिम्स आए तो उन्हें दांतों और जबड़े में फंगस होना बताया। अब उनका ऑपरेशन किया जाना है। अभी बुजुर्ग सिम्स में भर्ती हैं।

निकाले जा चुके हैं 5 मरीजों के तालू-जबड़े

ब्लैक फंगस के नोडल अधिकारी डॉ. आशुतोष कोरी ने बताया कि अभी तक कुल 18 मरीजों के ऑपरेशन हो चुके हैं। पांच के तालू और जबड़े निकाले गए हैं। होम आइसोलेशन में रहे मरीजों को भी यह बीमारी हो रही है। कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों को ये विशेष रूप से ध्यान देना है कि वे स्ट्राइड खाएं हो या न खाएं हो लेकिन अगर चेहरे में सूजन, आंखों में लालिमा या सूजन, सिरदर्द, दांतों में दर्द या दांत हिलने पर तुरंत चिकित्सक को संपर्क कर जांच कराएं।

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