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भास्कर मुद्दा:जीनोम जांच के लिए 6 माह से राज्य से चिट्ठियां और मुलाकातें, केंद्र माना नहीं, नतीजा : जब रिपोर्ट आई, मरीज ही स्वस्थ

बिलासपुर7 महीने पहले
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बिलासपुर में ओमिक्रान की रिपोर्ट आने के बाद एक बार फिर सवाल उठ गया कि एम्स और पं. नेहरु मेडिकल कालेज की सर्वसुविधायुक्त लैब में जीनोम जांच की अनुमति केंद्र से क्यों नहीं मिल पा रही है, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार पिछले छह माह से इसके लिए लगी है। इस मामले में हेल्थ अफसरों से लेकर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग को चिट्ठियां लिख चुके हैं, केंद्रीय मंत्री से मुलाकातों में जीनोम जांच की अनुमति का आग्रह कर चुके हैं।

यही नहीं, स्वास्थ्य विभाग भी लगातार इस मुद्दे पर केंद्र से पत्र व्यवहार कर रहा है। जांच की अनुमति सिर्फ इसीलिए मांगी जा रही है क्योंकि राज्य में कोरोना संक्रमण दो लहरों में तेजी से फैला था और अब भी फैलाव तेज है। ऐसे में वैरिएंट रिपोर्ट जल्दी मिलती है तो रोकथाम के उपाय भी जल्दी किए जा सकते हैं, जो अभी नहीं हो पा रहे हैं। प्रदेश की ओर से अब तक जीनोम जांच के लिए 60 से अधिक सैंपल भुवनेश्वर भेजे गए हैं। जिसमें 12 सैंपल विदेश से आने वाले मुसाफिरों के रहे हैं। अब तक केवल 7 ही रिपोर्ट मिल पाई है, जिसमें से केवल एक में ओमिक्रान मिला, वह रिपोर्ट भी 18 दिन बाद आई जब मरीज स्वस्थ हो गया।

भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई कि स्वास्थ्य राज्य सरकार का विषय है, इसके बावजूद प्रदेश में जीनोम जांच के लिए एडवांस लैब के लिए मंजूरी का पूरा अधिकार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास ही है। इस मुद्दे पर राज्य की ओर से अभी तक जितनी भी पहल की गई, जानकारों के मुताबिक वह बातचीत के स्तर पर तक ही सीमित है। स्वास्थ्य मंत्री ने एक बार फिर बुधवार को केंद्र को चिट्ठी लिखी है कि एम्स रायपुर और नेहरु मेडिकल कॉलेज में कोरोना सैंपलों के जीनोम जांच की अनुमति दी जाए। हाल ही में वायरोलॉजी सर्विलांस की राष्ट्रीय बैठक में राज्य की ओर से ये मुद्दा फिर उठाया गया था। यह भी कहा गया था कि जब तक यहां लैब को अनुमति नहीं मिलती, बाहर भेजे जाने वाले सैंपलों की जांच रिपोर्ट जल्दी भेजने की व्यवस्था कर दी जाए।

एम्स में इसी माह संभव
डायरेक्टर-एम्स भोपाल और रायपुर के डायरेक्टर डॉ. नितिन एम नागरकर ने बताया कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण स्थानीय स्तर पर जांच जरूरी हो गई है, इसलिए रायपुर एम्स को जीनोम जांच की अनुमति जल्दी मिलने की संभावना है। यहां एडवांस लैब का सेटअप पहले से तैयार है, दूसरी वायरल बीमारियों के लिए जांच पहले से ही कर रहे हैं। कोरोना सैंपलों की सीक्वेंसिंग के लिए भी अनुमति इस माह मिलती है तो टेक्निकल स्टाफ और जरूरी मशीनें उपलब्ध हैं। सीक्वेंसिंग के लिए किट भी खरीद रहे हैं। दरअसल, जीनोम जांच के लिए आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक लैब को अप्रूवल दिया जाता है। इसके लिए लैब सेटअप के जो मान्य प्रोटोकॉल हैं, वह हमने बना रखे हैं।

जांच समय पर हो जाना बेहद जरूरी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से जितनी बार भी बातचीत हुई है, प्रदेश की ओर से मैंने जीनोम जांच के लिए मंजूरी मांगी है। दरअसल जीनोम जांच की अनुमति का अधिकार केंद्र ने इस आधार पर अपने पास रखा है कि यह रिसर्च और स्टडी से जुड़ी गतिविधि है। अगर केंद्र से मंजूरी मिल गई तो इसके लिए मशीनों तथा जरूरी इंतजाम में डेढ़ करोड़ रुपए ही खर्च होने हैं, जिसका प्रस्ताव बजट में ला सकते हैं। राज्य के पास अपनी लैब होनी ही चाहिए, क्योंकि वायरल बीमारियों के लिए एडवांस रिसर्च स्टडी और समय पर रिपोर्ट है।
-स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने भास्कर से बातचीत में कहा

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