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संक्रमण फैलने का खतरा:कोराेना क्षेत्रों से ट्रेन लेकर आए लोको पाॅयलट व गार्ड की नहीं हो रही जांच

बिलासपुर6 महीने पहले
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रेड और ऑरेंज जॉन वाले शहरों से नौकरी कर वापस लौट रहे रेलवे के लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड की कोई जांच नहीं की जा रही है ना ही उन्हें क्वारेंटाइन ही किया गया है। उल्टे उन्हें दोबारा से नौकरी पर जाने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। रेल प्रशासन की यह लापरवाही शहर में कोरोना वायरस का संक्रमण फैला सकती है। इससे रेलवे कॉलोनी में रहने वाले दूसरे कर्मचारी दहशत में हैं। गार्ड काउंसिल के लोगों ने शुक्रवार को इस मामले में विरोध प्रदर्शन भी किया।
लॉकडाउन के 40 दिन बीतने के बाद अलग-अलग राज्यों में फंसे मजदूरों की घर वापसी का सिलसिला ट्रेनों के जरिए शुरू हुआ है। मजदूर तो अपने राज्य और घरों तक पहुंचकर क्वारेंटाइन हो जा रहे हैं लेकिन उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाले रेलवे के लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड कि ना तो जांच की जा रही है और ना ही उन्हें वापसी पर क्वारेंटाइन ही किया गया है। इससे कर्मचारी भी दहशत में हैं। एक लोको पायलट ने बताया कि जिस जगह वाे ट्रेन लेकर गया था वहां की हालत अच्छी नहीं है। वहां पहुंचने के बाद लगभग 9 घंटे रेस्ट रूम में बिताना पड़ा। इस दौरान सामान खरीदने के लिए बाजार भी जाना पड़ा और भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी जाना पड़ा, ऐसे में वे स्वयं भी कहीं भी संक्रमित हो सकते हैं। लौटने के बाद उनकी जांच होनी थी और उन्हें घर पर क्वारेंटाइन भी किया जाना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
बसों से बच्चे को लाने वाले क्वारेंटाइन
राजस्थान कोटा से बच्चों को अपने प्रदेश लाने वाले बसों के ड्राइवर, कंडक्टर व अन्य कर्मचारियों को वापस आने के बाद क्वारेंटाइन कर दिया गया है। ऐसा सुरक्षा की दृष्टि से किया गया है। प्रशासन इस मामले में पूरी तरह से सतर्कता बरत रहा है। वहीं दूसरी तरफ रेलवे प्रशासन इस मामले में पूरी तरह से लापरवाह नजर आ रहा है। ऐसे में रेल कर्मचारियों के जरिए भी कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ रही है। पहुंचने के बाद लगभग 9 घंटे रेस्ट रूम में बिताना पड़ा। इस दौरान सामान खरीदने के लिए बाजार भी जाना पड़ा।
सात स्पेशल ट्रेन में 21 कर्मचारियों ने ड्यूटी की
झारखंड व बिहार की ओर बिलासपुर होकर सात स्पेशल ट्रेन गुजरी हैं। इन स्पेशल ट्रेनों में 1250 और 1250 श्रमिक अपने-अपने राज्यों को गए हैं। इन ट्रेनों का स्टॉपेज बिलासपुर में था। यहां से स्टाफ बदलकर भेजा गया वापसी में इन ट्रेनों के खाली रैक को नागपुर ले जाने के लिए भी एसईसीआर का स्टाफ गया था। 7 ट्रेनों में लगभग 21 कर्मचारियों ने ड्यूटी की है। इन कर्मचारियों को वापसी के बाद ऐसे ही छोड़ दिया गया है।
विरोध-प्रदर्शन किया: स्पेशल ट्रेनों से ड्यूटी कर लौटे गार्ड अपने अन्य साथियों के साथ ऐसी ड्यूटी का विरोध करने के लिए सीनियर डीओएम रवीश कुमार से मिलने पहुंचे। वहां पर उन्होंने अपनी व्यथा सुनाई और स्वयं की जांच कराने की बात कही। साथ ही कहा कि उनकी ड्यूटी उनके अपने जोन की सरहद तक ही लगाई जाए। दूसरे जोन वाले वहां से ट्रेनों को लेकर जाएं।
अफसर अनभिज्ञ, कह रहे- हमें नहीं मालूम विभाग क्या कर रहा
वे स्वयं भी कहीं भी संक्रमित हो सकते हैं। लौटने के बाद उनकी जांच होनी थी और उन्हें घर पर क्वारेंटाइन भी किया जाना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
सुरक्षा का पालन कर रहे हैं
"क्रू मेंबर्स को क्रू चेंजिंग प्वाइंट पर चेंज किया जाता है। स्टेशन एवं रनिंग रूम में रेलवे बोर्ड द्वारा दिए गए सारे प्रिवेंटिव मेजर्स का पालन किया जा रहा है।" -साकेत रंजन, सीपीआरओ बिलासपुर जोन

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