राज्य शासन के अधिकारियों की बैठक हुई:हाईकोर्ट का निर्देश वेब पोर्टल बनाएं जिसमें हर जिले के बेड की स्थिति की जानकारी लोगों को मिले

बिलासपुर9 महीने पहले
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  • महाधिवक्ता ने बताया जरूरत नहीं फिर भी लोग अस्पताल में बेड मांग रहे

हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य शासन को निर्देश दिया कि प्रदेश स्तर की एक वेब पोर्टल बनाइए। इसमें कहां, कितने बेड उपलब्ध हैं इसकी जानकारी लोगों को मिले। वहीं राज्य शासन की तरफ महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि निर्देश के पालन में रायपुर में रेलवे और राज्य शासन के अधिकारियों की बैठक हुई है।

जिसमें रेलवे ने कोचेस में स्टाफ, ऑक्सीजन व अन्य सुविधाएं देने में असमर्थता जताई है। अभी जो सुविधा है उसको लेने से कोई फायदा नहीं मिलेगा। क्योंकि रेलवे के कोच में जो बेड व्यवस्था है वह सिर्फ आइसोलेशन के लायक हैं। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की युगल पीठ में हुई।

7500 में 2 हजार बेड खाली
राज्य सरकार ने बताया कि राज्य में 7500 ऑक्सीजन बेड हैं। इनमें 2 हजार से अधिक खाली हैं। इसी तरह से एचडीयू, आईसीयू खाली हैं, वेंटिलेटर भी 242 खाली हैं। इस पर उच्च न्यायालय ने सवाल उठाया कि ये राज्य के आंकड़े हैं, दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर के हालात फिर ऐसे क्यों हैं। इस पर महाधिवक्ता ने बताया कि बिलासपुर में 366 ऑक्सीजन बेड में से 18 खाली हैं। एचडीयू और आईसीयू 116 ने 24 खाली है। वहीं दुर्ग में 1329 ऑक्सीजन बेड में 45 खाली हैं, आईसीयू और अन्य बेड खाली नहीं है। रायपुर में स्थिति बेहतर है और यहां ऑक्सीजन के 700, एचडीयू के 63, आईसीयू के 28 और 112 वेंटिलेटर खाली हैं।

कोर्ट ने कहा कैदी जेल में ज्यादा सुरक्षित हैं
पैरोल और अंतरिम जमानत पर छोड़ने की मांग के संबंध में प्रस्तुत आवेदन को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। आवेदन में बताया गया था कि कोरोना संक्रमित 6 कैदियों की जेल में मौत हो गई है। अर्जी को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि बाहर की स्थिति खराब है।

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