चुनौतियों के सामने डटे रहे शिक्षक और हुए सफल:मोबाइल बना ब्लैक बोर्ड, 450 किमी दूर बच्चों को दी गई ऑनलाइन शिक्षा

बिलासपुर3 महीने पहले
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जो मोबाइल पहले बच्चों की सूचना और पालकों को सिर्फ मीटिंग में बुलाने के काम आता था कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन शिक्षा ने उसे ब्लैक बोर्ड बना दिया। जिला ही नहीं शिक्षकों ने 450 किलोमीटर दूर बस्तर तक के स्कूली बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दे डाली। मार्च 2019 के पहले मोबाइल की उपयोगिता शिक्षा के क्षेत्र में सीमित थी। शिक्षकों और बच्चों का ग्रुप स्कूल की सूचनाओं तक ही था। आफ लाइन क्लास चलने के दौरान ऑनलाइन शिक्षा दूर की सोच थी। 15 अगस्त, जयंती, समारोह या अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए ज्यादा से ज्यादा कभी कभार वर्चुअल मीटिंग हो जाया करती थी। ऑनलाइन शिक्षा के लिए न शिक्षक अभ्यस्त थे और न ही बच्चे पढ़ने के आदी थे।

मोबाइल चलाना सीखकर दी शिक्षा
ऑनलाइन शिक्षा में शिक्षकों के लिए कम चुनौती नहीं थी। कुछ ऐसे शिक्षक भी थे जो अधिक उम्र के थे और मोबाइल फ्रेंडली नहीं थे लेकिन फिर भी उन्होंनें इसे चुनौती के रूप में लिया। कोटा ब्लॉक के जोगीपुर स्कूल में पदस्थ भागवत प्रसाद जोशी के पास कोरोना कॉल के दौरान बटन वाला मोबाइल था। पहले तो इसी मोबाइल से पढ़ाया लेकिन बाद में एंड्रायड फोन खरीदकर उन्होंने उसका उपयोग सीखा। फिर क्लास 9 व 10 के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।

नवाचार कर जुगाड़ पेड से दी शिक्षा
यह एक तरह से बच्चों को पढ़ाने के लिए नवाचार है। इसमें शिक्षक पारदर्शी कांच प्लेट का उपयोग कर पढ़ाने में उपयोग कर सकता है। उदाहरण के लिये फ्रीज का पारदर्शी प्लेट/ट्रे जिसे टी टेबल में कोई भी दो आयताकार वस्तु/पुस्तक आदि का उपयोग उसके ऊपर कांच प्लेट को रख कर ऑनलाइन क्लास के दौरान कैमरा ऑन कर प्लेट के ऊपर रखते हैं व कांच प्लेट के नीचे 6 इंच के इस खाली जगह पर बच्चों को समझाने के लिये कॉपी में वर्क करते हुए ऑनलाइन दिखाया जा सकता है। इसका प्रयोग शिक्षिका मीना रजक ने किया है।

1500 शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया
ऑनलाइन शिक्षा में कोटा ब्लॉक के कोनचरा स्कूल में पदस्थ संजय रजक ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने राज्य भर के शिक्षकों को ट्रेनिंग दिया। अब तक कुल 1500 शिक्षकों को वे ऑनलाइन शिक्षा की ट्रेनिंग दे चुके हैं। बिल्हा ब्लॉक दूसरे शहरों में राजनांदगांव, नारायणपुर और बस्तर में प्रशिक्षण दिया और नक्सली प्रभावित बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से जोड़ा।

ऑनलाइन पढ़ाई करने बस्तर और दंतेवाड़ा से बच्चे जुड़े
ऑनलाइन शिक्षा देने वाले 42 वर्षीय सुशील पटेल बताते हैं कि जिस वक्त ऑनलाइन शिक्षा के निर्देश हुए उसे अमल में लाना इतना आसान नहीं था। फिर भी सभी शिक्षकों के सहयोग से पढ़ाई का शेड्यूल फिक्स किया और बच्चों को जोड़ा। ऑनलाइन शिक्षा में 10वीं व 12 वीं के यहां के बच्चों के अलावा बस्तर व दंतेवाड़ा के बच्चे भी जुड़े। इसके अलावा नीट जैसे एग्जाम की कोचिंग भी बच्चों को दी।

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