मार्मिक घटना:मां का निधन, पिता ने छोड़ा साथ, एक साथ रहने के लिए मामा के घर से भागे जुड़वा भाई-बहन

बिलासपुर2 महीने पहले
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  • बिलासपुर स्टेशन पर बिना टिकट पकड़े गए, चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया

पारूल देवांगन और प्रकाश देवांगन (बदला हुआ नाम) जुड़वां भाई-बहन हैं। नाबालिग हैं। साथ-साथ खेले और बड़े होने लगे। 10 साल की उम्र में नियति ने उनसे उनकी मां को छीन लिया। मां की मौत के बाद पिता ने उन्हें साथ रखने में असमर्थता जताई तो बच्चों के दो मामा उन्हें रायगढ़ जिले स्थित अपने गांव गोरखा थाना कोतरलिया रोड ले गए।

एक ही गांव में दोनों अलग-अलग मोहल्ले में रहते थे। एक ने पारूल को साथ रख लिया तो दूसरे ने प्रकाश को अपने साथ रखा। समय के साथ दोनों बड़े होते गए। दोनों जुड़वां हैं और 10 साल साथ रहे इसलिए वे चाहते थे कि एक साथ रहें लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सात साल गुजर गए। दोनों 17 साल के हो गए । प्रकाश अपने मामा के साथ दिन भर उनके किराने की दुकान में उनका हाथ बंटाता। उसे दोस्तों या कहीं भी जाने को नहीं मिलता था। पारूल जिस मामा के साथ रहती थी, वहां पर घर के लोगों का व्यवहार उसे प्रति अच्छा नहीं था। दिन भर काम करने के बाद भी उसे बात-बात पर मामा-मामी की डांट सुननी पड़ती थी। शुरू में तो सब ठीक था लेकिन बाद में यह बढ़ता गया और पिछले कुछ महीनों से यह ज्यादा होने लगा था। दूसरी तरफ प्रकाश भी परेशान रहने लगा था। भाई-बहन भी कभी-कभार ही मिलते थे। इस बीच दोनों भाई-बहन मिले और तय किया कि दोनों घर छोड़कर कहीं दूर चले जाएंगे और साथ रहेंगे।

इसके बाद प्रकाश और पारूल दोनों मंगलवार को सुबह अपने घर से स्कूल जाने के लिए ड्रेस पहनकर निकले। स्कूल बैग में ही उन्होंने अपने दो जोड़े कपड़े और कॉपी-किताब रख लिया। उन्हें अपने पिता के गांव का नाम खोखरा याद था लेकिन वे वहां नहीं जाना चाहते थे, क्योंकि मामा गांव जाने के बाद कभी पिता उनसे मिलने नहीं आए थे। उनकी दादी भी पिता के साथ रहती है। चाचा-चाची है जो चांपा में रहते हैं लेकिन उनका पता भी उन्हें नहीं मालूम । प्रकाश के पास कुछ पैसे थे। दिल्ली जाने वाली पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस में वे दोनों रायगढ़ स्टेशन में चढ़ गए। दोनों बिना टिकट के ट्रेन में बैठे थे। बिलासपुर पहुंचे तो वहां मजिस्ट्रेट जांच चल रही थी। पूछताछ में पता चला कि उनके पास तो टिकट ही नहीं है। तब पूरा मामला खुला। कमर्शियल इंस्पेक्टर निशिथ कुमार पांडेय ने पारूल और प्रकाश को रेलवे समर्पित चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया। (जैसा बच्चों व चाइल्ड लाइन के काउंसलर ने दैनिक भास्कर को बताया)

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