पिता का प्यार:मां चली गई, झोपड़ी टूट गई, स्कूल कभी जा ही नहीं पाए, पिता ने रिक्शे को ही घर बनाया, बच्चों को पढ़ाना नहीं छोड़ा

बिलासपुर2 महीने पहलेलेखक: राजू शर्मा
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ये व्यथा है...एक संवेदनशील सत्यकथा है...एक पिता की। 38 साल का पिता गणेश साहू, जो रिक्शा चलाता है। अतिक्रमण में झोपड़ी टूट गई। दो बच्चे 9 साल की गंगा और 7 साल का अरुण हैं। दोनों बच्चों को छोड़कर मां चली गई। दोनों बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। इस बेबसी में पिता ने रिक्शे को ही घर बनाया और अपनी चादर पर बच्चों की पाठशाला लगाई। वह अपने बच्चों को प्राथमिक शिक्षा इसी तरह दे रहा है। बच्चों को एबीसीडी और क ख ग घ का ज्ञान दे रहे हैं गणेश। उसकी मजबूरी ये है कि रिक्शा न चलाएं, तो बच्चे भूखे रह जाएंगे। पेट भरें या पढ़ाएं...। लेकिन गणेश पेट भी भर रहे हैं, पढ़ा भी रहे हैं।