छत्तीसगढ़ पुलिस पर आरोप:​​​​​​​बिलासपुर में नागा साधु को थाने ले जाकर पीटा, रुपए और चांदी के बर्तन भी लूट लिए; स्टेशन के पास नहाते हुए पकड़ ले गए थे

बिलासपुर7 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिसकर्मियों पर एक नागा साधु को बुरी तरह से पीटने और उनके रुपए व सामान लूट लेने का आरोप लगा है। - Dainik Bhaskar
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिसकर्मियों पर एक नागा साधु को बुरी तरह से पीटने और उनके रुपए व सामान लूट लेने का आरोप लगा है।
  • तोरवा क्षेत्र का मामला, जूना अखाड़ा के साधु योगी गंगापुरी त्रिवेंद्रम से ट्रेन में आए 22 मार्च को आए थे बिलासपुर
  • रेलवे कर्मचारी ने घायल हालत में देखा तो दवाई लगाकर गुरु भाई के आश्रम पहुंचाया, इसके बाद मामला खुला

महाराष्ट्र के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी साधु से मारपीट का मामला सामने आया है। यहां पर किसी गांव और बस्ती के लोग नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस आरोपों के घेरे में है। बिलासपुर पहुंचे नागा साधु को पुलिसकर्मियों ने थाने ले जाकर बुरी तरह से पीटा। इसके बाद उनके पास मौजूद करीब सवा लाख रुपए और चांदी के बर्तन भी लूट लिए। रेलवे कर्मचारी ने उन्हें घायल हालत में सड़क किनारे देखा तो उनके गुरु भाई के आश्रम पहुंचाया।

जानकारी के मुताबिक, जूना अखाड़ा के नागा साधु योगी गंगापुरी सोमवार सुबह सेकेंड AC से ट्रेन में त्रिवेंद्रम से बिलासपुर पहुंचे थे। उनको यहां चकरभाटा रेलवे स्टेशन के पास अनुसुइया धाम में अपने गुरु भाई शंभू महाराज के आश्रम में जाना था। स्टेशन पर उतरने के बाद वह बाहर ही स्नान कर रहे थे। इसी दौरान दो पुलिसकर्मी पहुंचे और संदेह जताते हुए उन्हें तोरवा थाने ले गए। आरोप है कि वहां उनको बुरी तरह से पीटा गया।

मारपीट के बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें धक्का मार निकाल दिया
उनके पास मौजूद थैले को भी पुलिसकर्मियों ने छीन लिया। उनके थैले में करीब सवा लाख रुपए, 12 हजार रुपए का मोबाइल, चांदी के बर्तन थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे लूट लिया। साधु स्थानीय भाषा ठीक से न तो बोल पा रहे थे और न समझ पा रहे थे। इसके बाद उन्हें पुलिसकर्मियों ने बाहर भगा दिया। वह घायल हालत में गड़ा गिरजा के पास कराह रहे थे। तभी वहां से रेलकर्मी प्रमोद नगई निकले। पहले तो उन्हें लगा कि कोई मानसिक विक्षिप्त है।

संत होने का पता चलने पर रेलवे कर्मचारी ने उन्हें आश्रम पहुंचाया
फिर नग्न देख घर से कपड़े लाकर पहनाने लगे। इस पर नागा साधु ने बताया कि वह नियमों में बंधे हुए हैं और कपड़े पहनने से इनकार कर दिया। संत होने का पता चलने पर प्रमोद उन्हें अपने घर ले गए और घाव पर दवाई लगाई। इसके बाद नागा साधु के बताने पर प्रमोद ने उन्हें गुरु भाई के आश्रम पहुंचा दिया। सूचना मिलने पर भाजपा और बजरंग दल कार्यकर्ता उन्हें लेकर थाने पहुंचे तो उन्होंने उस जगह को पहचान लिया।

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