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कोरोना जांच करते इनका जीवन बदल गया:सालभर से कोई छुट्टी नहीं, परिवार के लिए भी वक्त नहीं, कोरोना जांच ही सेवा

बिलासपुर14 दिन पहले
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  • स्वास्थ्य कर्मचारी हमारी सेवा में जुटे हैं, इनका सम्मान कीजिए, कुछ लोग इनसे दुर्व्यवहार भी कर रहे जो कतई उचित नहीं है

ड्यूटी करते सालभर से अधिक हो गए पर एक दिन भी छुट्टी नहीं मिली। कोरोना जांच करते इनका जीवन बदल गया। सुबह आते हैं और रात को घर जाते हैं। संक्रमण के डर से परिजनों से हमेशा दूर रहना पड़ता है। जान जोखिम में डालकर लोगों की सेवा में जुटे ऐसे 100 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारी जिले के विभिन्न कोविड सेंटरों में काम कर रहे हैं।

रोज कोरोना जांच करते हैं। लोगों के फार्म भरने से लेकर संक्रमण के करीब रहकर सभी तरह का काम यही लोग करते हैं। विषम परिस्थिति में भी लगातार 12 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। बिलासपुर में 5 मार्च 2020 में पहली कोरोना की जांच शुरू हुई थी। सामुदायिक भवन तिलक नगर, व्यायाम शाला सरकंडा, उप स्वास्थ्य केंद्र उसलापुर, मोपका, रेल संस्कृति निकेतन तितली चौक रेलवे परिसर, सिम्स, रेलवे अस्पताल, लाइफ केयर हॉस्पिटल जूना बिलासपुर, श्री कृष्ण हॉस्पिटल मंगला चौक, बुधिया हॉस्पिटल बृहस्पति बाजार में निशुल्क कोरोना की जांच हो रही है।

इन सेंटरों में जांच करने वाले स्वास्थ्य विभाग के तृतीय वर्ग के कर्मचारी हैं। इनकी संख्या 100 से अधिक है। ये लोग सबसे पहले सेंटरों में पहुंचते हैं। यहां आए लोगों का फार्म भरते हैं फिर उनकी जांच करते हैं। दिनभर संक्रमण के करीब रहते हैं। रात को 10 बजे घर जाते हैं। कर्मचारी परिवार को समय नहीं दे पाते। भत्ता नहीं मिला। कोरोना जांच में लगे कर्मियों में लैब टेक्नीशियन, एसटीएस, एसटी एलएस और एएनएम उपेक्षा के शिकार हैं।

सालगिरह की खुशियां भी नहीं बांट पाए
तिलक नगर स्थिति जांच सेंटर में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि कोरोना को आए एक साल हो गए। तब से मुझे सिर्फ तीन छुट्टी मिली है। वो भी हम लोगों ने आपस में तय कर लिया था कि आज मेरी जगह तुम काम कर लेना कल मैं कर लूंगा। ऐसे काम चलाया गया है। मेरी सादी की सालगिरह थी। उसमें भी परिवार के साथ खुशियां नहीं बांट पाया।

जरा सी देर हो जाए तो डांट पड़ती है
कर्मचारियों का कहना है कि जांच करने में थोड़ा समय तो लगता ही है। बुरा तब लगता है जब लोग हमारे ऊपर चढ़ाई करने लगते हैं। कतार में नहीं लगना चाहते। जल्दी जांच कराने को लेकर आपस में ही झगड़ते हैं। हमारे साथ गाली-गलौज तक कर देते हैं। ये सब कुछ सुनकर भी हम लोगों को जांच करने से मना नहीं करते। सोचते हैं इसे तकलीफ है तभी तो जांच कराने आया है।

अफसरशाही के कारण रहते हैं परेशान
परेशानी तब और बढ़ जाती है जब कलेक्टर, एसडीएम या फिर जिले के अन्य बड़े अधिकारी फोन करके कहते हैं कि जाओ फला के यहां जांच करना है। 10 मिनट के अंदर में कई बार अधिकारियों के फोन आ जाते हैं। अफसरशाही के कारण कतार में लगे लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। क्योंकि दो आदमी उनकी जांच करने के लिए चले जाते हैं।

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