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दिल्ली की दौड़ से राहत:राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसलों के खिलाफ अब संबंधित राज्यों के हाईकोर्ट में भी अपील की जा सकेगी

बिलासपुरएक महीने पहलेलेखक: अनुपम सिंह
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सुप्रीम कोर्ट ने अपील के लिए शीर्ष कोर्ट जाने की बाध्यता खत्म कर दी। - Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट ने अपील के लिए शीर्ष कोर्ट जाने की बाध्यता खत्म कर दी।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसलों के खिलाफ अब संबंधित राज्यों के हाईकोर्ट में भी अपील की जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले ने एक अहम आदेश में कहा है कि आयोग संविधान के अनुच्छेद 227 के अंतर्गत एक ट्रिब्यूनल है।

इस नियम के तहत आयोग के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इससे उन लोगों को खासी राहत मिलेगी, जो दिल्ली आने-जाने या खर्च से बचने के लिए अपील नहीं करते थे।

उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 लागू किया गया था, इसके तहत त्रिस्तरीय आयोग की व्यवस्था की गई थी। इसमें जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आयोग का प्रावधान है। हालांकि इसकी जगह अब राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 ने ले ली है।

पुराने अधिनियम को संशोधनों के साथ 20 जुलाई 2020 से लागू किया गया है। जिला आयोग के फैसले से असंतुष्ट रहने पर राज्य स्तरीय आयोग में अपील का प्रावधान है। राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के फैसलों के खिलाफ अपील के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग दिल्ली में अपील कर सकते हैं। राष्ट्रीय आयोग के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में अपील का प्रावधान था। इसी को सुप्रीम कोर्ट ने बदला।

देशभर में साढ़े पांच लाख से अधिक मामले
त्रिस्तरीय उपभोक्ता विवाद निवारण अधिकरणों व आयोग में देशभर में वर्तमान में 5.50 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। इसमें से सवा चार लाख से अधिक मामले जिला आयोगों में लंबित हैं। दूसरे नंबर पर राज्य आयोग हैं। देशभर के राज्य आयोगों में एक लाख 20 हजार से अधिक मामले लंबित हैं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में 25 हजार से अधिक मामले पेंडिंग हैं। इसके फैसले की अपील सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने और सुनवाई के लिए दिल्ली जाना पड़ता था।

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