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चिटफंड की तर्ज पर बिलासपुर में जमीन का काला कारोबार:गोरखधंधे के इस खेल में अफसर भी मिले हैं इसलिए नहीं हो रही कार्रवाई

बिलासपुर6 दिन पहलेलेखक: आशीष दुबे
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शहर के आसपास बड़े पैमाने पर जमीन के माफिया सक्रिय हैं, जो चिटफंड कंपनियों की तर्ज पर काम कर रहे। लोगों को जमीन में निवेश कराने और कुछ सालों में पैसे दोगुने होने का झांसा देकर उनसे रकम उगाही चल रही। वे नियमों को ताक पर रखकर अवैध प्लाटिंग कर रहे और उससे भी हैरानी की बात यह कि राजस्व विभाग की मिलीभगत से नहर, तालाब, पैठू और यहां तक सरकारी जमीनों को भी बेच रहे हैं।

इसकी शिकायतें भी हो रही हैं, लेकिन अधिकारी मामले में नोटिस देने के बाद उसे ठंडे बस्ते में डाल रहे। अभी तक किसी भी बड़े जमीन माफिया के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दैनिक भास्कर ने आसपास में चल रही जमीन की गतिविधियों पर नजर डाली तो हैरान करने वाले मामले सामने आए। पता चला कि जमीन के इस धंधे में नियम-कायदे कानून सब टूट रहे। सिर्फ बिलासपुर ही नहीं आसपास सकरी, तखतपुर, मस्तूरी, बिल्हा सहित अन्य जगहों पर अवैध प्लाटिंग का यह गैर कानूनी कारोबार पनप रहा है। किसी मामले में ट्रस्ट की जमीन को बेचने का आरोप है। किसी में कंपनी बनाकर लोगों को निवेश कराने और रकम दोगुना कर झांसा देने की बात सामने आई है।

लालच के जाल में फंसे लोग ऐसे अवैध जमीन कारोबारियों की जद में आ रहे और उनसे पैसे वसूलकर भूमाफिया उन्हें सड़क, बिजली, नाली, लाइट जैसी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करवा रहे हैं। गौर करने पर पता चलता है कि भीतर ही भीतर इस काम में राजस्व के नीचे ऊपर तक हर स्तर के अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें सब पता होने के बाद इसे रोकने के बजाय शिकायतों का इंतजार कर रहे। पूछने पर रटा सा जवाब है जांच रिपोर्ट पर आने पर विधि अनुरूप कार्रवाई होगी। कब और कैसे होगी बताने को तैयार नहीं।

देखिए इस तरह भू-माफिया के जाल में फंस रहे लोग

1. जमीन ले लो, तीन साल बाद दोगुने पैसे वापस
मंगला में नर्मदा नगर चौक पर बने एक कॉम्पलेक्स में जमीन के कुछ कारोबारी सक्रिय हैं। जो आसपास की जमीनों पर लोगों को निवेश करवा रहे। इस दावे के साथ वे तीन साल में उनकी खरीदी हुई जमीन की रकम वापस कराएंगे। एंग्रीमेंट और रजिस्ट्री के लिए भी कुछ ऐसे तरीके निकाले गए हैं, जिससे लोगों को आसानी से झांसे में लाया जा सके। हाल फिलहाल में हुई इनकी खरीदी बिक्री पर राजस्व अधिकारियों की नजर बनी है, लेकिन अभी तक कुछ ऐसा मामला सामने नहीं आया कि ये पकड़ में आएं।

2. सैदा में अवैध प्लाटिंग कर बेच रहे पैठू की जमीन
सकरी सैदा में कुछ पटवारी हल्के ऐसे हैं, जहां पैठू की जमीन की खरीदी बिक्री चल रही। इसमें शहर के नामी लोग शामिल हैं। उन्हें पता है कि नियम के तहत यह जमीन नहीं बिक सकती फिर भी उन्होंने पटवारी और तहसीलदारों की मिलीभगत से इस काम को अंजाम दिया है। जमीन खरीदी में 50 से अधिक लोग फंसे हैं। जिन्हें बड़ी शिद्दत से लालच में फंसाया गया है। गांव वालों ने इस मामले में शिकायत की है, जिसमें कार्रवाई की बात की जा रही है।

3. 50 साल बाद ट्रस्ट ने जीता मामला, खरीदार फंसे
सकरी में 30 एकड़ उस जमीन की बिक्री हो गई जिसका मामला कोर्ट में चल रहा था। 50 साल बाद इस मामले को वेंकटेश मंदिर ट्रस्ट ने जीत लिया, लेकिन इस प्रकरण में वे लोग फंस गए, जिन्होंने जमीन खरीदी थी। बाइपास की जमीन पर निर्माण काम जारी है, लेकिन लोग डरे सहमे हैं कि कब उन्हें हटाने का आदेश आ जाए। इसी तरह शहर की कुछ जमीनें और बड़ी कॉलोनियों पर भी जमीन का विवाद चल रहा है।

4. कलेक्टर को चिट्‌ठी- मुआवजा के बाद मालिक जता रहा हक
निगम के अधिकारियों ने व्यापार विहार और तालापारा की जमीन की बिक्री रुकवाने के लिए कलेक्टर को चिट्ठी लिखी है। तालापारा के जमीन के खसरा नंबर 253 का भाग 0.76 एकड़ का जिक्र करते हुए बताया कि वह जमीन पुराने समय में अधिग्रहित हो गई है। मुआवजा संबंधित व्यक्ति को मिल गया है, फिर भी खुद को जमीन मालिक बताकर मालिकराम पिता पुनीराम ने सीमांकन का आवेदन किया है और इसे बेचने की फिराक में है। इसे रोकने की मांग हुई है।

राजस्व विभाग के पास सारा रिकॉर्ड
जमीनों से जुड़े सारे दस्तावेज राजस्व विभाग के पास होता है। खासतौर पर पटवारी के रिकॉर्ड में हर जमीन की जानकारी। कौन जंगल है, कौन पैठू और कौन पड़ाव। सबकुछ जानने के बाद वे इसका बी-वन खसरा जारी कर रहे। इसी आधार पर बिक्री हो रही और बिक्री के तहसीलदार नामांतरण कर रहे। इसलिए यह कहना कि विभाग को इसकी जानकारी नहीं गलत है।

राजस्व विभाग के पास सारा रिकॉर्ड
जमीनों से जुड़े सारे दस्तावेज राजस्व विभाग के पास होता है। खासतौर पर पटवारी के रिकॉर्ड में हर जमीन की जानकारी। कौन जंगल है, कौन पैठू और कौन पड़ाव। सबकुछ जानने के बाद वे इसका बी-वन खसरा जारी कर रहे। इसी आधार पर बिक्री हो रही और बिक्री के तहसीलदार नामांतरण कर रहे। इसलिए यह कहना कि विभाग को इसकी जानकारी नहीं गलत है।

20 मामलों में मैंने रोक लगाई है
मेरे क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के 20 मामलों में मैंने खरीदी बिक्री पर रोक लगाई है। यदि लोगों ने पैठू या अन्य जमीनों को नीलामी में खरीदा है तो वे इसे बेच सकते हैं, लेकिन अवैध प्लाटिंग करके नहीं। निगम ने मेरे क्षेत्र की कुछ जमीन में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई की है।
-आनंद तिवारी, एसडीएम

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