हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता ने 15 अफसर-कर्मियों केे नाम प्रस्तुत किए:निगम से तनख्वाह लेकर स्मार्ट सिटी का काम कर रहे अफसर

बिलासपुरएक महीने पहले
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स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी बिलासपुर ने 29 नवंबर को हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका पर अपना 137 पेज का अतिरिक्त जवाब प्रस्तुत किया था। इसमें अन्य बातों के अलावा जिस बात पर कंपनी ने जोर दिया है वह कंपनी के निदेशक मण्डल में महापौर, सभापति जैसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को रखना उचित नहीं बताने का कारण उनके प्रशासनिक कार्य क्रियान्वयन की क्षमता में कमी होना कहा था।

कंपनी के जवाब के मुताबिक राजनीतिक व्यक्ति अलग-अलग पार्टी और विचारधारा से जुड़े रहते है। इस कारण विकास के कार्यों से संबंधित निर्णयों में विवाद होने की संभावना ज्यादा है। इसलिए इन्हें स्मार्ट सिटी कंपनी के निदेशक मंडल में न होना सही है। यह जवाब के पैरा नंबर 8, 9 और 10 में था। इस पर याचिकाकर्ता विनय दुबे की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में मंगलवार को आपत्ति प्रस्तुत की। इससे पहले विभिन्न संगठनों और निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भी इस पर आपत्ति दर्ज की थी। इसके बाद हाईकोर्ट में स्मार्ट सिटी के तरफ से अब दूसरा अतिरिक्त जवाब प्रस्तुत किया गया है।

इसमें विवादित पैरा नंबर 8, 9 व 10 को हटा दिया गया है। नया जवाब 135 पेज का प्रस्तुत किया है। हालांकि मामले में मंगलवार को स्मार्ट सिटी द्वारा नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता प्रफुल्ल भारत की अनुपस्थिति में स्मार्ट सिटी के अधिवक्ता ने सुनवाई आगे बढ़ाने की मांग की। इस पर कोर्ट ने 20 दिसंबर तक के लिए मामले की सुनवाई बढ़ा दी। इस दिन स्मार्ट सिटी के जवाब और उस पर याचिकाकर्ता की आपत्ति सहित कंपनियों को नए प्रोजेक्ट की अनुमति दी जाए या नहीं इस पर सुनवाई होगी।

अफसर कुछ समय बाद दूसरे विभाग में चले जाते हैं
हाईकोर्ट में स्मार्ट सिटी ने अपने जवाब में कहा है कि ऐसा कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नहीं है जो नगर निगम का है और स्मार्ट सिटी का काम कर रहा है। इसके जवाब में याचिकाकर्ता के तरफ से नामजद 15 अधिकारी व कर्मचारियों के नाम दिए गए हैं जो नगर निगम से वेतन लेते हैं और काम स्मार्ट सिटी का करते हैं। इसके अलावा यह भी बताया गया हैै कि स्मार्ट सिटी में जो भी अधिकारी काम करते हैं वह कुछ साल बाद दूसरे विभाग में चले जाते हैं, जबकि निर्वाचित जनप्रतिनिधि एक बार निर्वाचन के बाद पार्षद, महापौर या सभापति बने रहते हैं।

स्मार्ट सिटी के नक्शे में हैं ही नहीं
बिलासपुर स्मार्ट सिटी के नक्शा के मुताबिक घोषित क्षेत्र 1041 एकड़ इंदिरा सेतु, नेहरू चौक से शहर की ओर है। जबकि काम क्षेत्र से बाहर कराया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने अपने जवाब में बताया है कि स्मार्ट सिटी के नक्शे में स्मार्ट सड़क और मुंगेली रोड व ऐसे कई क्षेत्र हैं ही नहीं जहां स्मार्ट सिटी का काम चल रहा है।

यह है याचिका में
याचिकाकर्ता विनय दुबे ने जनहित याचिका में निर्वाचित व्यक्तियों की उपेक्षा कर नगर निगम के अधिकारों को अधिकारियों द्वारा हथियाने और स्वतंत्र रूप से स्मार्ट सिटी के कार्यों को नगर निगम अधिनियम और संविधान के विरुद्ध करने को चुनौती दी है।

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