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चैत्र नवरात्रि:हे भगवान! फिर वही कोरोना; मंदिरों में जलती थी 28000 ज्योति, इस साल 10000 ही

बिलासपुर13 दिन पहले
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  • मनोकामना होगी महंगी, तेल की ज्योति का 200 और घी का 600 रुपए बढ़ा

13 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत होने जा रही है। पिछले साल चैत्र नवरात्रि से पहले कोरोना ने दस्तक दी थी और पूरा देश लॉक हो गया था। इस बीच 4 नवरात्रियां गुजरीं और अब एक बार फिर चैत्र नवरात्रि सामने है। हालात भी जस के तस हैं। इसे देखते हुए इस साल मंदिरों में सेवादारों की संख्या कम कर दी गई है।

साथ ही ज्योति कलश भी कम स्थापित की जा रही हैं। वहीं भक्त भी इस साल कम ज्योति जलाने के लिए रसीद कटा रहे हैं। वहीं महामाया मंदिर रतनपुर और अन्य मंदिरों में तेल व घी की ज्योति का शुल्क भी बढ़ा दिया गया है। महामाया मंदिर ने तेल का 200 रुपए और घी का 600 रुपए बढ़ा दिया गया है। वहीं अन्य मंदिरों ने भी शुल्क बढ़ा दिया है। महामाया मंदिर सहित शहर के 5 मंदिरों में हर साल 28 हजार 787 ज्योति प्रज्जवलित होती थीं। इस साल 10 हजार 928 ज्योति के लिए भक्तों ने पंजीयन कराया है। हर साल की अपेक्षा 17 हजार 859 ज्योति कम ज्योति जलेगी। अब ऐसे में इस नवरात्रि महामाया मंदिर में भक्तों की मनोकामना महंगी हो गई है। इस बार आधे से ज्यादा भक्तों की ज्योत जलवाने की मनोकामना अधूरी रह जाएगी।

महामाया मंदिर रतनपुर
मंदिर ट्रस्ट के सुनील सोंथलिया ने बताया कि ज्योति के शहर सहित अन्य जगहों पर काउंटर हैं। लोग रसीद कटा रहे हैं। अभी तक लगभग 10 हजार लोगों ने रसीद कटाए हैं। हर साल 24 हजार ज्योति जलती हैं। हर साल 300 सेवादार मंदिर में रहते थे, लेकिन संक्रमण के कारण इस साल कम करके 150 कर दिया गया है। नवरात्रि से पहले सभी का कोरोना टेस्ट कराया जाएगा। इसके बाद मंदिर में इन्हें प्रवेश दिया है। ये 9 दिन तक मंदिर में ही रहेंगे। भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर नहीं खुलेंगे। ऑनलाइन माता का दर्शन भक्तों को कराया जाएगा।

तिफरा काली मंदिर
मंदिर के सेवादार दीलिप साहू ने बताया कि मंदिर में साफ-सफाई शुरू हो गई है। इस साल ज्योति कलश के लिए 495 भक्तों ने तेल व 49 भक्तों ने घी की रसीद कटाई है। पिछली नवरात्रि में 200 घी और 3200 तेल की ज्योति जली थी। 15 भक्तों ने कन्या भोजन की रसीद कटाई है। मंदिर में 12 सेवादार हैं।

काली मंदिर कुदुदंड
मंदिर के पूजारी ने बताया कि 34 वर्षों से ज्योति कलश यहां भक्तों द्वारा जलवाए जाते हैं। इस साल मंदिर में संक्रमण के कारण 4 सेवादार ही रहेंगे।

दुर्गा, काली मंदिर जवालीपुल
पं. संतोष वाजपेयी ने बताया कि 51 साल से मां की पूजा-अर्चना की जा रही है। इस साल शासन की गाइड लाइन के अनुसार भक्तों को मां का दर्शन मिलेगा।

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