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भास्कर खुलासा:आरटीओ के नाम पर वसूली का खुला खेल ‘हर गाड़ी के 1000 रुपए, पेंड्रा का अलग से लगेगा’

बिलासपुर24 दिन पहले
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चालान के पीछे लिखा गया मो. नंबर। - Dainik Bhaskar
चालान के पीछे लिखा गया मो. नंबर।
  • आरटीओ एजेंट की ट्रांसपोर्टर से पैसा मांगने की बातचीत का ऑडियो

आरटीओ में किस तरह लेनदेन का खेल चल रहा है इसका खुलासा करने वाला एक ऑडियो रिकॉर्डिंग दैनिक भास्कर को मिला है। एक ट्रांसपोर्टर और आरटीओ एजेंट के बीच यह बातचीत है। एजेंट खुलेआम ट्रांसपोर्टर से गाड़ी चलने देने के लिए हर महीने के पैसे मांग रहा है। रिश्वत जमा करने के 2 ठिकाने भी बताए हैं। हम यह बात जस की तस छाप रहे हैं। जांच की जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है।

हलो! भाई नमस्ते, सुबह फोन करने के लिए बोले थे, मैं भूल गया था... सॉरी। बताओ भैया, कोई आप्शन है तो? चलना तो है ही रोड में हमको भी।

कितनी गाड़ी है... दो ?
नहीं चार गाड़ी हैं..., एक पिकअप है... एक छोटा हाथी है... छोटी गाड़ी बहुत कम चलती है। छोटा हाथी खड़ा ही रहता है, तीन माह हो गया। पिकअप लोकल-फोकल मारते रहती है।- हां।
बड़े में दो ही गाड़ी हैं भैया, नंबर दिया था मैं।

बड़े में हाइवा...?
नहीं नहीं... वही गाड़ी तो हैं... 9007 कल वाला जो।

माजदा?
हां, दोनों माजदा है, एक 9108 है।
(इसी बीच किसी अन्य से बातचीत... फिर)

हां-हां जी... बोलो जी... गुप्ता जी। वही बोला दो ही गाड़ी है मेरा।

दो माजदा है?
हां।

ठीक है न फिर... अभी कहां हैं आप?

मैं तो सत्यम चौक में हूं, अपनी पान दुकान में भैया।
पुराना बस स्टैंड में आओगे क्या?

अभी?
- हां।

नहीं भैया, अभी पान दुकान में अकेले बैठा हुआ हूं... शाम को 5 से 6 बजे से पहले नहीं निकल सकता भैया। - अभी ही नहीं..., बाद में बोल रहा हूं... अग्रवाल ट्रांसपोर्ट या फिर गुप्ता ट्रांसपोर्ट..., गुप्ता मेटाडोर हैं वहां पैसा छोड़ देना।

गुप्ता मेटाडोर में न?
- हां।

हां तो कितना कितना देना पड़ेगा?
- एक हजार रुपए।

एक हजार महीना ना? तो गुप्ता में छोडू कि अग्रवाल में कि मुकेश भैया के पास?
- गुप्ता मेटाडोर में छोड़ देना ना... कामता भैया के पास।

कामता भैया... गुप्ता मेटाडोर वाला... बस स्टैंड वाला?
- नंबर को दे देना, छोड़ना उसी समय।
हां हां।
- ठीक।
एक हजार रुपए एक महीना का रहता है भैया?
- हां.. हां.. ठीक।

तो खाली बिलासपुर रहेगा न कि पेंड्रा, मुंगेली... बिलासपुर, मुंगेली, पेंड्रा तीनों?
- नहीं नहीं, पेंड्रा का नहीं है। पेंड्रा का अलग है। बेरियर है

अच्छा तो खाली बिलासपुर मुंगेली न?
- हां।

एक गाड़ी के 1000 रुपए न?
- हां-हां।

भैया पहले पूछा था, तब बता देना था आप्शन... मुझे 9 हजार रुपए तो नहीं लगता। - तुम रात को पूछोगे तो कहां से बताउंगा।

मैं सब बताया था अपना आदमी है बोलकर। - आधी रात को पीने खाने वाले आदमी से मैं बात नहीं करता।

तुम तो बड़े बल्लम हो भाई। - ड्यूटी के पहले और बाद में मैं कोई बात नहीं करता।

ये तो सही बात है। - ड्यूटी में रहोगे तो मानसिक तनाव रहता है... टारगेट रहता है। फलाना ढेकाना... ड्यूटी से हटने के बाद दो नींद मार लो तो ठीक रहता है। अच्छा।

यह बातचीत शहर के ट्रांसपोर्टर पवन कुमार गुप्ता और आरटीओ |फिस में काम करने वाले एक व्यक्ति की है। ट्रांसपोर्टर की गाड़ी को मोपका में आरटीओ ने चालान काटा और पर्ची के पीछे मोबाइल नंबर देकर आफिस भेजा। बताया उस नंबर पर एक आदमी मिलेगा उससे बात कर लेना। आफिस में मोबाइल नंबर पर फोन करने पर एक व्यक्ति आया। उसने अपना नाम अशोक श्रीवास बताया।

उसने चालान का पैसा जमा किया। इसके बाद एक ट्रांसपोर्टर का नंबर दिया। कहा कि उस नंबर पर बात करने से उसकी गाड़ी का चालान नहीं होगा। ट्रांसपोर्टर ने उस नंबर वाले व्यक्ति से बात की। ऊपर की बातचीत उसी का ही एक हिस्सा है।

इसमें फोन रिसीव करने वाला बता रहा है कि चालान से बचने के लिए क्या करना होता है। उसने हर माह एक हजार रुपए जमा करने शहर के तीन जगहों के नाम बताए। कहा-वहां पैसा जमा करने के बाद निश्चिंत हो जाएं।

एजेंट ने कहा- चालान में मदद के लिए लिखते हैं पर्ची के पीछे मेरा नंबर

जिस नंबर से बातचीत की रिकार्डिंग हुई है दैनिक-भास्कर ने उस नंबर वाले का पता लगाया। ये नंबर अशोक श्रीवास नाम के व्यक्ति का है। उसने बताया कि वह बेमेतरा का रहने वाला है और आरटीओ एजेंट है। ऑडियो के बारे में पूछने पर कहा उसे इस संबंध में कुछ जानकारी नहीं है। कहा वह पवन गुप्ता को जानता है।

उससे चार पांच महीने पहले बातचीत हुई थी। रकम जमा करने वाले को किसी तरह की परेशानी न हो इसलिए कभी कभार उसका मोबाइल नंबर पर्ची के पीछे जरूर लिख दिया जाता है। उसके पास लोग आते हैं तो वह मदद करता है। पवन जो इल्जाम लगा रहा है वह गलत है।

ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, यदि गड़बड़ी हो रही तो कार्रवाई होगी

आरटीओ प्रेम प्रकाश शर्मा ने कहा कि ऐसा कोई ऑडियो मेरे पास नहीं आया है। आपके पास है तो मुझे भेजिए। इस तरह की बातें क्यों आ रही है, यह देखना जरूरी है। नियम के अनुसार ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। यदि कहीं कोई अनियमितता है तो कार्रवाई जरूर होगी।

हर माह एंट्री नहीं तो 9 से 17 हजार का चालान कटाना होगा

पीड़ित ट्रांसपोर्टर के अनुसार यदि हम माह एक हजार रुपए नहीं देते हैं तो किसी न बहाने गाड़ी का 9 से लेकर 17 हजार रुपए तक का चालान काट दिया जाएगा। ड्राइवर से मोबाइल तक छीन लेते हैं और तब तक नहीं देते जब तक उन्हें पैसे न मिल जाएं।

पर्ची के पीछे लिखते हैं 9993474256 नंबर

ट्रांसपोर्टर के अनुसार आरटीओ से पर्ची के पीछे मोबाइल नंबर देकर कहते हैं उस नंबर पर बात कर एंट्री करवा लें फिर, चाहे जितना माल लोड कर लो। 9993474256 मोबाइल नंबर पर्ची में लिखते हैं।

ऑडियो में दो स्थान रुपए जमा करने के लिए बताए

पैसे जमा करने के लिए गुप्ता मेटाडोर, कामता गुप्ता व अग्रवाल ट्रांसपोर्ट बताया। ट्रांसपोर्टर के अनुसार यहां रजिस्टर मेंटेन होता है। इसके बाद जब गाड़ी पकड़ी जाती है तो इनसे बात करने के बाद छूट जाती है।

29 हजार रुपए आरटीओ को 200 रुपए पुलिस को

ट्रांसपाेर्टर पवन ने बताया कि गाड़ी मालिक पेपर सही रखते हैं। छत्तीसगढ़ में 29-30 जिले हैं। 29 हजार व पुलिस को हर माह 200 रुपए चालान का देना पड़ता है। गौरेला के पास आरटीओ अधिकारी कर्मचारी बेरियर लगाकर बैठते हैं।