भास्कर original:छत्तीसगढ़ में हमारी 3 कोयला खदानें, 6 साल से 2 बंद, ये शुरू होतीं तो नहीं होता संकट

बिलासपुर2 महीने पहलेलेखक: आशीष दुबे
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  • पहली बार- छत्तीसगढ़ में आवंटित राजस्थान की अपनी कोयला खदान से लाइव रिपोर्ट
  • ऊर्जा मंत्री बोले- केंद्र को कई पत्र लिखे, जल्द शुरू हो जाएंगी खदानें

=राजस्थान में कोयले की कमी से बिजली संकट! तब जबकि हमारी अपनी छत्तीसगढ़ में तीन खदानें हैं। हमें इन्हीं तीनों से कोयला मिलता तो बिजली संकट न होता। कोयला मंत्रालय से 2007 और 2013 में छत्तीसगढ़ में पारसा ईस्ट एंड कांता बासन, परसा और काइंटे एक्सटेंशन खदानें अलॉट की थीं।

एक बार रद्द होकर 2015 में इनका दोबारा आवंटन हुआ लेकिन 14 रैक प्रतिदिन कोयला सिर्फ एक खदान पारसा ईस्ट एंड कांता बासन से ही मिल रहा है। बाकी दोनों में काम ही शुरू नहीं हुआ। दरअसल प्रदेश सरकार ने ये खदानें अडानी ग्रुप को दे रखी हैं। भास्कर वहां पहुंचा तो ग्रामीणों ने बताया कि कांता बासन खदान से अडानी ग्रुप हर साल 15 मिलियन टन कोयला निकालता है। प्रतिदिन 14 रैक राजस्थान भेजा जा रहा है। प्रदेश को अन्य 14 रैक एसईसीएल भेज रही है। दो खदानें बंद पड़ी हैं।

एक खदान हमें रोजाना 14 रैक कोयला दे रही है, तीनों होतीं तो कमी नहीं होती

चालू; पारसा ईस्ट एंड कांता बासन

  • यहां से प्रतिदिन मिल रहा है 14 रैक कोयला
  • इसकी वार्षिक क्षमता 1.5 करोड़ मीट्रिक टन

बंद; काइंटे एक्सटेंशन और पारसा

  • काइंटे एक्सटेंशन क्षमता प्रतिवर्ष- 70 लाख मीट्रिक टन
  • पारसा क्षमता प्रतिवर्ष- 50 लाख मीट्रिक टन
  • यानी इन दोनों बंद कोयला खदानों की ही पहले फेज की क्षमता राजस्थान में निर्बाध कोयला आपूर्ति कर सकती थी।

5 कारण... लापरवाही, लापरवाही और लापरवाही
1.
केंद्र सरकार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और छतीसगढ़ सरकार से नई खदानों को ‘बायोडायवर्सिटी क्लीयरेंस’ नहीं मिला है।
2. राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम और अडानी के संयुक्त उपक्रम परसा ईस्ट और कांता बासन की वन भूमि 1136 हैक्टेयर ट्रांसफर नहीं हो पाई।
3. पारसा ब्लॉक को पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिल पाई है। दूसरी जरूरी चीजें भी सरकार को संजीदगी से देखना चाहिए था।
4. कोविड के करीब दो साल सरकार ने इस पर कोई खास काम नहीं किया। क्लीरियेंस के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा।
5. क्षमता बढ़ाने से खनन अवधि 15 वर्ष से कम होगी। मुआवजे और अधिग्रहण को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध भी है।
इनपुट : श्याम राज शर्मा/शेखर गुप्ता

जिम्मेदार बोले-
राजस्थान सरकार को इन खदानों को चालू कराने के लिए छत्तीसगढ़ से कॉर्डिनेशन करना था

साल 2013 से राजस्थान सरकार ने दो खदानें कंपनी को दीं। सरकार को इन्हें चालू कराने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार से संपर्क करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ये कब तक शुरू होंगी, इसकी जानकारी नहीं है।
-अतुल गुप्ता, पीआओ, अडाणी ग्रुप

अभी बायोडायवर्सिटी क्लीयरेंस बाकी है, केंद्र को कई बार खुद मुख्यमंत्री ने लिखे हैं पत्र
छतीसगढ़ के कोल ब्लॉक से कोयला प्राप्त करने के लिए ‘बायोडायवर्सिटी क्लीयरेंस’ की आवश्यकता है, जिसके लिए सीएम अशोक गहलोत ने केंद सरकार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और छतीसगढ़ के सीएम को भी पत्र लिखे हैं। क्लीयरेंस मिलते ही वहां से कोयला मिलना शुरू हो जाएगा।
- बीडी कल्ला, ऊर्जा मंत्री, राजस्थान

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