बिलासपुर के कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन लीक:18 मरीजों को रातोंरात प्राइवेट में शिफ्ट किया गया वहां एक महिला मरीज की मौत; पिछले हफ्ते भी लीकेज होने के बावजूद खामी ठीक नहीं की गई

बिलासपुर9 महीने पहले
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छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के संभागीय कोविड अस्पताल में सोमवार देर रात ऑक्सीजन लीक होने से हड़कंप मच गया। यहां से 19 मरीजों को रातोंरात प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट कराया गया जहां किम्स में एक महिला की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक महिला की हालत पहले ही गंभीर थी। घटना के समय अस्पताल में 91 मरीज भर्ती थे। जानकारी मिलते ही कलेक्टर, SDM, CMHO सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए। खास बात यह है कि इस खराबी का पता अस्पताल प्रबंधन को 6 दिन पहले से ही था।

कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन लीक होने की खबर से देर रात तक मरीजों के परिजनों में भी अफरा-तफरी का माहौल रहा और वे वहीं एकत्र रहे।
कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन लीक होने की खबर से देर रात तक मरीजों के परिजनों में भी अफरा-तफरी का माहौल रहा और वे वहीं एकत्र रहे।

रात करीब 8.30 बजे कोविड अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट का प्रेशर कम हुआ तो गंभीर मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। इसकी जानकारी CMHO को दी गई। इस पर 19 मरीजों को किम्स में शिफ्ट कराया गया, जहां महिला मरीज ने दम तोड़ दिया। वहीं अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों में से 7 की हालत गंभीर हो चुकी थी। उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर से सपोर्ट दिया गया। 12 अन्य मरीजों को भी आपूर्ति दी गई। सुबह तक 100 सिलेंडर खत्म हो चुके थे।

कलेक्टर ने कहा 6 मरीजों को शिफ्ट किया गया

इस मामले में बिलासपुर कलेक्टर सारांश मित्तर ने एक वीडियो मैसेज भेजकर कहा है कि सोमवार रात ऑक्सीजन प्लांट में माइनर लीकेज थे, जिसे उसी रात ठीक कर लिया गया। लेकिन उस समय अस्पताल में 6 ऐसे मरीज थे, जिन्हें ज्यादा केयर की जरूरत थी, लिहाजा उन्हें दूसरे इंस्टिट्यूशन में दाखिल कराया गया जिससे उनका इलाज चलता रहे। ऑक्सीजन के लीकेज के कारण किसी मरीज की मौत नहीं हुई।

5-6 दिन पहले भी लीक हुई थी ऑक्सीजन, तब लापरवाह बने रहे

बताया जा रहा है कि संभागीय कोविड अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई की पाइप लाइन करीब 5 से 6 दिन पहले भी लीक हुई थी। इसकी जानकारी भी हॉस्पिटल प्रबंधन को थी, पर लापरवाही इतनी थी कि किसी ने इसे ठीक कराना जरूरी ही नहीं समझा। अगर पहले ही सही करा लिया जाता तो ऐसे हालत नहीं बनते। अब इसे ठीक कराने काम रात को ही शुरू किया गया, जो देर रात तक जारी था।

नोडल अधिकारी को खबर नहीं, मोबाइल रिसीव नहीं किया, दरवाजा भी नहीं खोला

इस पूरे मामले में नोडल अधिकारी डॉ. अनिल गुप्ता की गैरजिम्मेदार भूमिका सामने आई है। उन्हें घटना की जानकारी तक नहीं थी, न ही वे अस्पताल पहुंचे। जबकि कोविड अस्पताल की जिम्मेदारी उनकी ही है। ऑक्सीजन प्लांट का पाइप लाइन लीक होने के बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने उनसे मोबाइल पर संपर्क किया, लेकिन उन्होंने रिसीव ही नहीं किया। डा. गुप्ता को लेने के लिए एम्बुलेंस उनके घर भेजी गई। कर्मचारियों ने दरवाजा खटखटाया, घंटी बजाई, पर वे नहीं निकले।

आरोपों पर डाक्टर गुप्ता की सफाई

अपने ऊपर लगे आरोपों पर डाक्टर गुप्ता का कहना है कि रात 8.30 बजे जब उन्हें इस गड़बड़ी का पता चला तो उन्होंने तुरंत ऑक्सीजन प्लांट के मेंटेनेंस मैकेनिक यादव को फोन किया। उससे वीडियो कॉल पर समस्या देखी, समझी। इस समय तक वहां ड्यूटी डाक्टर, स्टोर कीपर सभी पहुंच गए थे और सुधार कार्य शुरू हो गया था। कल उनकी तबियत ठीक नहीं थी, इसलिए वे मेडिसिन लेकर घर पर ही थे, लेकिन पूरी तरह अस्पताल के हालात से जुड़े हुए थे और उनकी जानकारी में था कि मरीजों की शिफ्टिंग की जा रही है। उन्होंने अस्पताल आने की कोशिश की लेकिन चक्कर आने के कारण वे घर से नहीं निकल पाए। उनके घर टीम आने की बात गलत है।

बिलासपुर के CMHO और प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद महाजन ने कहा- संभागीय कोविड अस्पताल में सोमवार की रात ऑक्सीजन प्लांट का प्रेशर कम हो गया था। उसे रात में ही ठीक करा लिया गया था। जिन मरीजों की हालत गंभीर थी उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। एक महिला मरीज की मौत भी किम्स में हुई है। हालात अब ठीक हैं।

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