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मानवता शर्मसार:सात माह की बच्ची की अंत्येष्टि से मां-बाप ने किया इनकार, प्रबंधन ने कराया

बिलासपुर16 दिन पहले
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लाशों का अंतिम संस्कार करते प्रबंधन के लोग। - Dainik Bhaskar
लाशों का अंतिम संस्कार करते प्रबंधन के लोग।

कोरोना से मौत हुई तो परिजनों ने मुंह मोड़ लिया। इसमें सात महीने की मासूम बच्ची भी शामिल है जिसकी मृत्यु के बाद माता-पिता ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। कोरोना काल में जो हो जाए कम है। मरीजों को इलाज तो मिल ही नहीं रहा लेकिन इससे भी दुखदायी यह है कि संक्रमित होने के बाद उनके परिजन भी साथ छोड़कर चले जा रहे हैं। सिम्स में रविवार को ऐसे तीन मामले सामने आए जिनसे मानवता और इंसानियत शर्मसार हो गई।

सात माह की बच्ची को छोड़कर चले गए मां-बाप: सात महीने की बच्ची नाम अहाना पिता का नाम देव कुमार निवासी पचपेड़ी। 28 अप्रैल की रात को तबियत खराब हुई तो अहाना के पिता देव कुमार ने सिम्स में भर्ती करवाया। अहाना कोरोना पॉजिटिव थी। सिम्स में भर्ती कराने के बाद उसका पिता गायब हो गया।

29 अप्रैल को इलाज के दौरान अहाना की सिम्स में मौत हो गई। परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो नहीं हो पाया। फिर पचपेड़ी इसके घर भेजा गया तो अहाना के माता-पिता ने अंतिम संस्कार करने में असमर्थता जता दी। दूसरी बार पचपेड़ी थाने की पुलिस गई ताेे वहां ताला लगा हुआ मिला। प्रबंधन ने अहाना का अंतिम संस्कार लावारिश मानकर करवा दिया।

छह दिन सिम्स में भर्ती, कोई परिजन नहीं पहुंचा

60 वर्षीय बुजुर्ग जो कि कोरोना से पीडि़त थे उन्हें 22 अप्रैल को इलाज के लिए सिम्स में भर्ती कराया गया। 6 दिन इलाज चला लेकिन इनकी खोज-खबर लेने वाला कोई सिम्स नहीं पहुंचा। इलाज के दौरान 28 अप्रैल को इस अज्ञात बुजुर्ग ने अपनों की गैर मौजूदगी में दुनिया को अलविदा कह दिया। 3 दिन तक इनका शव मरच्यूरी में रखा रहा। कोविड गाइड लाइन के अनुसार शव को लावारिश मानकर उसका अंतिम संस्कार कराया गया।

एम्बुलेंस चालक ने कराया था सिम्स में भर्ती

संगीता उम्र 45 वर्ष पति का नाम पता नहीं, ठिकाना पता नहीं, इन्हीं शब्दों के साथ एम्बुलेंस चालक ने इस महिला को सिम्स में 17 अप्रैल को भर्ती कराया था। संगीता कोरोना संक्रमित थी तथा तबियत ज्यादा भी खराब थी। सांस लेने में परेशानी आ रही थी, इसलिए आईसीयू में भर्ती करके रखा। 27 अप्रैल को संगीता ने इलाज के दौरान सिम्स में दम तोड़ा। लेकिन इलाज के इन 10 दिनों में किसी ने उसकी खोज-खबर नहीं ली। इसलिए सिम्स ने लावारिश मानकर संगीता का भी अंतिम संस्कार करवा दिया।

नाम था पर लावारिश होकर हुए विदा

सिम्स में भर्ती अहाना का नाम और पता था। जबकि संगीता के पास सिर्फ नाम था। फिर भी दोनों को दुनिया से लावारिसों की तरह विदा होना पड़ा। यह मामले बता रहे हैं कि कोरोना ने परिजनों तक को क्रूर बना दिया है जहां अपने ही पहचानने से इंकार कर रहे हैं।

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