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लोगों को हो रही परेशानी:छत्तीसगढ़ में पुलिस वेरिफिकेशन में लग रहे महीनों; चढ़ावे और चक्कर की मजबूरी, राजस्थान जैसे राज्यों ने एक एप बनाकर जनता की परेशानी की कम

बिलासपुरएक महीने पहलेलेखक: चंद्रकुमार दुबे
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पुलिस को सरकार की ओर से निश्चित राशि का भुगतान भी किया जाता है फिर भी समय पर यह काम पूरा नहीं होता। - Dainik Bhaskar
पुलिस को सरकार की ओर से निश्चित राशि का भुगतान भी किया जाता है फिर भी समय पर यह काम पूरा नहीं होता।

पासपोर्ट या किसी काम के लिए अगर आपको पुलिस वेरिफिकेशन करवाने की जरूरत पड़ जाए तो यह सबसे कठिन काम है। इसमें कई दिन या पूरा महीना भी लग जाता है। पासपोर्ट के वेरिफिकेशन के लिए तो पुलिस को सरकार की ओर से निश्चित राशि का भुगतान भी किया जाता है फिर भी समय पर यह काम पूरा नहीं होता। रिश्वत देने के बाद भी थानों में चक्कर काटना पड़ रहा। दूसरे राज्यों में वेरिफिकेशन की प्रक्रिया आसान है। पासपोर्ट के लिए केवल दो से तीन दिन में प्रक्रिया पूरी हो जाती है। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया आसान करने के लिए अब तक कोई पहल ही नहीं की गई। पीएचक्यू के डेटाबेस से यह काम आसानी से किया जा सकता है और एप बनाकर अर्जियां ली जा सकती हैं।

घूमने जाना था, 15 दिन तक काटता रहा थाने का चक्कर
मस्तूरी रिस्दा के दिलीप चंदेल पिता रामजी चंदेल 35वर्ष को विदेश घूमने जाना था। मई 2020 में उन्होंने पासपोर्ट बनवाने ऑफिस में आवेदन किया। सर्टिफिकेट मिलने में 15 दिन लग गए। आवेदन ऑनलाइन गया था। यह पासपोर्ट ऑफिस से डीएसबी गया। यहां से थाने भेज दिया गया था। थाने में पुलिस घुमाती रही। काफी मान मनौव्वल व परेशानी झेलने के बाद उनका काम बना। एवज में उन्हें जेब गरम करनी पड़ी। बताया कि इस काम को दलालों ने कठिन बना दिया है।

केस- पोते के वेरिफिकेशन के लिए भटकीं हेल्थ अफसर
स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त संचालक डॉ. मधुलिका सिंह का बेटा विदेश में जॉब करता है। पोते को उनके साथ पढ़ाई के लिए भेजना था, सो पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। पासपोर्ट ऑफिस से दो-तीन दिन बाद आवेदन पुलिस को भेज दिया गया था। यहां सिटी कोतवाली में आकर यह अटक गया। कई बार पूछने गए, लेकिन कोई कुछ नहीं बता सका। 15 दिन वैसे ही गुजर गए। आखिरकार एप्रोच लगाने पर पुलिस ने वेरिफिकेशन किया।

डेढ़ माह तक भटकते रहे थाने में
मोपका के रेलकर्मी असीत मजूमदार की बेटी सुभ्रत की हैदराबाद में प्राइवेट जॉब लगी थी। ज्वाइनिंग के दिन उनसे पुलिस वेरिफिकेशन मांगा गया था। रेलकर्मी व उनके बेटे ने इसके लिए एसपी आॅफिस में आवेदन किया। एसपी आॅफिस से यह डीएसबी के पास गया और फिर सरकंडा थाने जाकर अटक गया। करीब डेढ़ माह बाद वेरिफिकेशन हुआ। पता चला कि कंप्यूटर आॅपरेटर छुट्टी पर था। किसी और को खोलना नहीं आता था। ऑपरेटर लौटकर आया तो काम जरूर हुआ पर लेनदेन के बाद ही।

पुलिस वेरिफिकेशन के लिए ऐसी होती है पूरी प्रक्रिया
1. पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन के लिए आवेदन एसपी ऑफिस भेजा जाता है। डीएसबी और फिर संबंधित थाने में जाती है। पूरी प्रक्रिया और वेरिफिकेशन होने के बाद वापस फाइल थाने से एसपी ऑफिस आती है और वहां से पासपोर्ट ऑफिस।

2. अन्य काम के लिए आवेदन एसपी ऑफिस से आवेदन डीएसबी शाखा और यहां से संबंधित थानों में भेजा जाता है। थाने से वेरिफिकेशन कर पुलिस डीएसबी के पास भेजती है और यहां से एसपी आफिस और संबंधित व्यक्ति को दिया जाता है।

3. इसके अलावा पुलिस वेरिफिकेशन फाॅर्म वेबसाइट पर जाकर खुद से भरा जा सकता हैं।

यहां अच्छी व्यवस्था; राजस्थान में 10 से 12 दिन में ही वेरिफिकेशन
राजस्थान के जिला पासपोर्ट अधिकारी नरेश चौधरी ने बताया कि राजस्थान में एम-पासपोर्ट पुलिस एप शुरू किया गया है। इसके जरिए 10 से 12 दिन में ही पुलिस वेरिफिकेशन हो जाता है और जल्द पासपाेर्ट बन जाता है। एप में वेरिफिकेशन के लिए जरूरी डॉक्यूमेंटस अपलोड करने होते हैं। इसे एप के जरिए ही संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को भेज दिया जाता है। एप से प्रदेश के सभी थाने जुड़े हुए हैं और मैपिंग की गई है। एप में अधिकतर सवालों का जवाब ‘हां’ या ‘नहीं’ में रिकॉर्ड होता है। यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक है।

क्यों जरूरी है पुलिस वेरिफिकेशन
पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान पता लगाया जाता है कि आप पर केस दर्ज तो नहीं है? आप किसी भी गलत काम में तो नहीं है? और आपका, आपकी कॉलोनी या क्षेत्र में लोगों के साथ कैसा व्यवहार है?

मैनुअल काम करने में बड़ी चुनौती

  • पुलिस के सामने मैनुअल काम करने में बड़ी चुनौती होती है। पुलिस को पासपोर्ट आवेदक की पहचान, नागरिकता और उसके आपराधिक इतिहास का पता लगाना पड़ता है। इससे कई डॉक्यूमेंट खंगालने पड़ते है। इस कारण से वेरीफिकेशन में कुछ समय लगता है पर देरी नहीं होती। यदि कोई पैसा मांगता है तो वह शिकायत कर सकता है। - दीपक झा, एसएसपी बिलासपुर
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