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कोविड़ इफेक्ट:कोरोना से चली गई पुलिस वालों की जान, अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रहे परिवार

बिलासपुर17 दिन पहले
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दो साल के भीतर कोरोना से चार पुलिसवालों का निधन हुआ और सभी ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए थे। लोगों की सुरक्षा करते उनकी जान गई। घर के मुखिया की मौत के बाद पीड़ित परिवारों की माली हालत ठीक नहीं है पर उनका ही विभाग ध्यान नहीं दे रहा है।

चार में से एक को छोड़ दे तो अभी तक किसी को भी अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली है। सरकारी या विभागीय सहायता से भी दूर हैं। कोई पीएफ के लिए आफिस का चक्कर काट रहा है तो नौकरी पाने के लिए दफ्तरों में भटक रहा। आफिस के बाबू केवल उन्हें आश्वासन दे रहे हैं। पेंशन भी नहीं मिल पा रहा है।

कांस्टेबल भागवत के निधन के बाद परिवार के लोग पेंशन के लिए तीन माह से भटक रहे

लाइन में पदस्थ कांस्टेबल भागवत भुपाल का 16 अप्रैल 2021 को कोरोना से निधन हुआ था। वे मूल रूप से जांजगीर चांपा जिले के ग्राम चंदनिया के रहने वाले थे। परिवार में पत्नी के अलावा तीन बच्चे हैं। एक बेटा व तीन बेटियां हैं। सभी तिफरा स्थित पुलिस कॉलोनी में रहते हैं। अभी तक किसी को अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली है। विभाग इनसे अभी तक केवल डॉक्यूमेंट ही मांग रहा है।

ग्रेजुएट बेटे कुलदीप के अनुसार पिता के नहीं रहने पर परिवार को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक पेंशन शुरू नहीं हुई। इधर-उधर से मैनेज कर किसी तरह घर का खर्च चल रहा है। पिता के निधन के बाद विभाग से 50 हजार रुपए मिले थे वह अंतिम संस्कार में ही खर्च हो गए। पीएफ का पैसा भी अभी तक नहीं मिला है।

बेटा अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया, फारवर्ड हुआ पर रिप्लाई नहीं

पुलिस लाइन में पदस्थ डॉक्टर बीपी सोनकर का 1 जून 2021 को निधन हो गया था। उनका परिवार मुंगेली नाका के पास रहता है। परिवार में पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं। बेटे विकास 36 वर्ष व बेटी शिल्पी 25 वर्ष दोनों सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे हैं। पिता के नहीं रहने से उनके सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है।

कुछ जमा पूंजी से घर का खर्च तो चल रहा है पर पढ़ाई लिखाई में तकलीफ हो रही है। विकास के अनुसार उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए विभाग में आवेदन जमा किया। उनका एल्पीलेकशन फारवर्ड भी हुआ पर अभी तक रिप्लाई नहीं आया है। यह दो जुलाई को सबमिट हो गया था। उनके पिता जी को नियमितीकरण आदेश में पेंशन की पात्रता नहीं थी। अभी तक उन्हें कोई मदद नहीं मिली। सबकुछ भगवान भरोसा चल रहा है।

बेटे को नौकरी तो मिली पर अन्य मदद नहीं मिल पाई

सीपत थाने के तत्कालीन टीआई मानसिंग राठिया का 2020 में कोरोना से निधन हुआ। उनके परिवार में पत्नी पुष्पादेवी के अलावा बेटे कृष्णा, राजीव, मुकेश, बेटी ममता शामिल हैं। मानसिंग राठिया ने कोरोना संक्रमण के दौरान ईमानदारी से ड्यूटी की। उनके निधन के बाद किसी तरह उनके एक बेटे को एएसआई की नौकरी तो दे दी गई पर अन्य विभागीय सहायता से अभी तक नहीं मिल पाई है। पेंशन और पीएफ की राशि के लिए उनके बेटे भटक रहे हैं।

टीआर सुरेंद्र सिंह के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति में देरी

सुरेंद्र सिंह टीआई 56 वर्ष का 3 मई 2021 को कोरोना से निधन हुआ। वे जोनल पुलिस अधीक्षक कार्यालय विशेष शाखा बिलासपुर में पदस्थ थे तथा मुंगेली में अटैच थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे व दो बेटियां है।

पीड़ित परिवार को अभी भी किसी तरह की विभाग की ओर से मदद नहीं मिल पाई है। अभी तक पीएफ की रकम नहीं मिली और न ही किसी को अनुकंपा नियुक्ति दी गई है जब नौकरी के लिए सुरेंद्र सिंह के घरवालों ने आवेदन जमा कर दिया है।

दो साल में 375 जवान संक्रमित हुए

ड्यूटी के दौरान पिछले दो साल में कोरोना से 4 पुलिस वालों की मौत हो गई। इस दौरान 375 जवान संक्रमित हुए। वर्तमान में इनमें से 18 होम आइसोलेट हैं और उनका घर पर ही इलाज चल रहा है। 2021 पुलिस वालों के लिए भी सबसे अधिक घातक रहा। कोविड की दूसरी लहर में 151 जवान संक्रमित हुए और 3 की मौत हुई।

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