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कोरोना से जंग:कोरोना संदेहियों को भर्ती करने आइसोलेशन सेंटर बनाने की तैयारी चल रही है: सिंहदेव

बिलासपुर13 दिन पहले
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  • स्वास्थ्य मंत्री बोले - एंटीजन पॉजिटिव जो नहीं मान रहे हैं, ऐसे अस्पतालों के नाम बताइए मैं एक्शन लूंगा

राजू शर्मा | बिलासपुर में कोरोना संदेही मरीजों को अस्पताल भर्ती नहीं कर रहे हैं। यह समस्या पिछले कुछ दिनों से लगातार बनी हुई है। इलाज नहीं मिलने के कारण कई मरीजों की तो मौत भी हो गई है। कई अभी भी कई अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। बिलासपुर के लोगों को इलाज नहीं मिल पाने की इस समस्या को देखते हुए दैनिक भास्कर ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव से विशेष बातचीत कर कोरोना संदेही और सामान्य मरीजों को इलाज नहीं मिल पाने का कारण पूछा। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने कहा कि संदेही मरीजों को अस्पताल में भर्ती नहीं करने का कारण ये है कि कोरोना होने का चांस इतना ज्यादा है कि जो नॉन कोविड अस्पताल हैं वे चरमरा जाएंगे। पिछले दिनों इटली में जब संक्रमण तेजी से फैला तो वहां के अस्पतालों ने कोरोना और सामान्य दोनों मरीजों को एक साथ भर्ती कर दिया। जिस कारण वहां कि मृत्यु दर 15 फीसदी तक चल गई। जबकि इटली दुनिया का नंबर दो देश है। इटली ने जो प्रारंभिक गलती कि है हम वह गलती से बचना चाह रहे हैं। चिंता इस बात कि है कि नॉन कोविड अस्पताल में संक्रमण न फैले इसलिए उन्हें बचाना भी जरूरी है।

संक्रमण भी न बढ़े, इलाज भी मिले, व्यवस्था बना रहे
ऐसे मरीज जो कोरोना संदेही या जिन्हें सर्दी, खांसी बुखार है तो उन्हें कहां इलाज मिलेगा क्योंकि आरटी-पीसीआर रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लगते हैं, वह तब तक कहां इलाज कराएंगे? इस सवाल पर मंत्री ने कहा कि हर जगह आइसोलेशन सेंटर बनाने की तैयारी चल रही है। इन सेंटरों में उन मरीजों को भर्ती किया जाएगा जिन्हें कोरोना का संदेह है। जब तक उन्हें यहां भर्ती कर इलाज करेंगे तब तक उनकी रिपोर्ट नहीं आ जाती। हम उलझे इस बात को लेकर हैं कि आइसोलेशन सेंटर में अगर 10 मरीजों को रखा। मान लीजिए उनमें एक पॉजिटिव हो गया और 9 निगेटिव हैं तो उनमें भी संक्रमण फैलने का डर है। हम लोग इस बात को लेकर विचार कर रहे हैं कि क्या व्यवस्था बनाई जाए ताकि संक्रमण भी न बढ़े और सबको इलाज भी मिले। हमारे सामने दो चुनौतियां हैं एक तरफ मरीज को देखना है तो दूसरी तरफ जिन्हें कोविड नहीं है उन्हें भी संक्रमण न हो जाए देखना है।

एंटीजन का निगेटिव थोड़ा गड़बड़ है इसलिए आरटीपीसी जरूरी
आरटीपीसीआर जरूरी है। लेकिन ट्रू नेट और एंटीजन भी करा सकते हैं। एंटीजन को कौन अस्पताल मान्य नहीं कर रहे हैं कहते हैं आरटी-पीसीआर की मान्य है ऐसा क्यों? इस सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री बोले कि मुझे उन अस्पतालों के नाम बताइएगा जो एंटीजन पॉजिटिव को मान्य नहीं कर रहे हैं। एंटीजन को जो नहीं मान रहे हैं वो बड़ी लापरवाही कर रहे हैं। कोई भी अगर ऐसा कहता है कि एंटीजन की पॉजिटिव रिपोर्ट को नहीं मानेंगे तो मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उनके ऊपर एक्शन लूंगा। हां ये जरूर है कि पहले एंटीजन कराइए अगर पॉजिटिव आ गया तो कहानी वहीं रुक गई। लेकिन निगेटिव आया तो आगे पता करना पड़ता है। लंग्स में आपको कुछ लक्षण दिख रहे हैं और टेस्ट निगेटिव आ गया तो क्या पता कोविड है कि नहीं। यह जानने के लिए फिर आरटी-पीसीआर और टू नेट कराना पड़ता है। क्योंकि एंटीजन का निगेटिव पॉजिटिव भी हो सकता है लेकिन एंटीजन पॉजिटिव है तो मानना ही पड़ेगा।

नार्मल अस्पतालों में ज्यादा बढ़ा संक्रमण
स्वास्थ्य मंत्री ने ये भी बताया कि कोरोना सेंटर में जो नर्स और डॉक्टर काम कर रहे हैं उन लोगों ने मुझे बताया कि यहां एक प्रतिशत संक्रमण है। लेकिन नार्मल अस्पताल में जो काम कर रहे हैं वहां 15 से 20 प्रतिशत संक्रमण फैला है। वहां संक्रमण ज्यादा होने का कारण है कि असुरक्षा,जो भी वहां काम कर रहे हैं वे अनजान और असुरक्षित हैं। क्योंकि उन्हें ऐसा लग रहा है कि यहां कोरोना पॉजिटिव नहीं हैं, इसी गलती के कारण वहां संक्रमण बढ़ा है। क्योंकि कौन पॉजिटिव है किसी को नहीं पता। जब तक उनकी रिपोर्ट नहीं आ जाती।

ट्रू नेट में हमारे हाथ बंधे हैं : ट्रू नेट को लेकर हमारे हाथ बंधे हुए हैं क्योंकि देश में एक ही कंपनी है, उसके भी रेट भारत सरकार ने तय कर रखे हैं। वह कंपनी सामान नहीं दे पा रही है। जो ट्रू नेट हम बढ़ा सकते थे इन्हीं सब परेशानियों के कारण वह नहीं हो पा रहा है।

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