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43वां रावत नाच महोत्सव कल:महीने भर पहले से तैयारी, बुजुर्ग सिखाते हैं अनुशासन, लाठी चालन और वेशभूषा में रहना

बिलासपुर5 महीने पहले
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  • 12 बार विजेता रहे दल के प्रमुख रिटायर्ड टीआई धन्नू यादव ने बताए श्रेष्ठ प्रदर्शन के पांच अहम गुर

43वां रावत महोत्सव 5 दिसंबर यानी शनिवार को लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में होगा। इस महोत्सव में 12 बार विजेता रहे भरनी, परसदा दल के प्रमुख रिटायर्ड टीआई धन्नू यादव ने बताए जीत के गुर। बताया कि दशहरा मनाने के बाद बैठक करके तैयारी शुरू कर देते हैं। इसमें बुजुर्ग एक माह देवउठनी एकादशी तक युवाओं और नए बच्चों को अभ्यास कराते हैं।

अनुशासन में रहना, लाठी चलाना, वेशभूषा में रहना, नाच के दौरान पैर उठाना आदि को बारीकी से सिखाया जाता है। लाल बहादुर स्कूल परिसर में रावत नाच महोत्सव के लिए तैयारियां चल रही हैं। इधर दल भी गांवों में अपनी तैयारी करने में जुटे हैं। इधर दैनिक भास्कर ने सबसे अधिक बार विजेता रहे भरनी, परसदा के दल के प्रमुख रिटायर्ड टीआई धन्नू यादव से बात की ताकि दूसरे दल भी इस तरह से अभ्यास कर प्रथम स्थान तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले तैयारी बहुत जरूरी है। यदि हमारी तैयारी अच्छी होगी तो हमें बेहतर करने से कोई नहीं रोक सकता है। रावत नाच महोत्सव में पांच बिंदुओं पहला परंपरागत वेश-भूषा, दूसरा अनुशासन, तीसरा सुंदर नाचा व बाजा, चौथा लाठी, गुरुद चालन, पांचवां राउत-बाना में संगठित अधिकतम यादवों की संख्या के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। हम अपने दल को इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अभ्यास कराते हैं।

पहले दिखाते हैं फिर कराते हैं अभ्यास

दल प्रमुख रिटायर्ड टीआई ने बताया कि यदि कोई युवा या फिर बच्चा अभ्यास के दौरान बार-बार गलती करता है तो उसे पहले कुछ दिन तक प्रस्तुति को दिखाते हैं फिर उसे पैर उठाने, रखने से लेकर सभी चीजों का अभ्यास कराते हैं। कई बार कुछ लोगों को अकेले भी अभ्यास कराना पड़ता है। जब अकेले में अच्छी तरह से अभ्यास हो जाता है तो उसे दल के साथ में अभ्यास कराते हैं।

वेशभूषा भी बहुत जरूरी

भरनी के दल प्रमुख ने बताया कि रावत नाच के दौरान वेशभूषा में रहना भी बहुत जरूरी है। इसका भी अभ्यास कराया जाता है। दल के सभी सदस्य एक ही वेशभूषा में दिखें इसके लिए एक ही दुकान से कपड़े लेते हैं। सिर पर चमकदार रंगीन टोपियों से लेकर पैर तक में जूता एक सा नजर आना चाहिए। दल में 70 सदस्य भरनी परसदा के दल में लगभग 70 सदस्य हैं। इस बार भी लगभग 70 सदस्य रावत नाच महोत्सव में अपने दल के साथ प्रस्तुति देंगे। हर दल का अपना बाजा रहते हैं। इसमें भी बाजा वाले लोग अलग से रहेंगे।

महोत्सव में विजेता रहे ये दल

12 बार भरनी (परसदा) दल, 10 बार बसिया और तारबाहर, 2 बार चुचुहियापारा और मोपका, 1 बार गतौरा, जांजगीर, तोरवा, तिफरा और कोपरा दल विजेता रहा।

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