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सरकारी पैसाें का दुरुपयोग:पीडब्ल्यूडी के ईई गंगेश्री सस्पेंड, बगैर मंजूरी के 19 करोड़ 93 लाख रुपए के नान एग्रीमेंट मामले में मंत्री ने की कार्रवाई

बिलासपुर20 दिन पहले
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  • ईएनसी के निर्देश पर एसी ने की थी जांच, एयरपोर्ट से लेकर कई मामलों के खर्च पर उठाए गए थे सवाल

बगैर मंजूरी 19 करोड़ 93 लाख रुपए काम कराने के मामले में आखिरकार लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक एक के कार्यपालन अभियंता पर कार्रवाई हो ही गई। लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने संभाग क्रमांक एक के कार्यपालन अभियंता के आर गंगेश्री को निलंबित कर दिया है।

दैनिक भास्कर ने मामले का खुलासा करते हुए पूर्व में खबर प्रकाशित की थी।लोक निर्माण विभाग मंत्री ताम्रध्वज ने फिलहाल निलंबन के दौरान कार्यपालन अभियंता केेआर गंगेश्री को जगदलपुर मुख्यालय में संलग्न किया है। लोक निर्माण विभाग मंत्री से जारी आदेश में मई 2020 से जनवरी 2021 तक बगैर अनुबंध के कामों में अत्यधिक खर्च करने पर कार्रवाई का कारण बताया गया है। इस मामले की जांच जनवरी 2021 मे ईएनसी के निर्देश पर अधीक्षण अभियंता ने की थी।

मामले की जांच के लिए इंजीनियर इन चीफ वीके भतपहरी ने दो वाउचरों की दो सूची भी बिलासपुर सर्किल के अफसरों को भेजी थी जिन पर जांच का निर्देश दिया गया था। इनमें एक सूची में मई 2020 से 21 जनवरी 2021 के कुल 36 वाउचरों की 14 करोड़ 61 लाख 85 हजार रुपए की राशि शामिल हैं। इसी तरह से दूसरी सूची में 16 वाउचरों की 5 करोड़ 31 लाख 65 हजार रुपए की राशि शामिल है। यह राशि अक्टूबर 2020 से जनवरी 2021 सिर्फ चार माह की है। दरअसल गैर अनुबंधित कार्यों के लिए एसी व सीई की मंजूरी लेनी होती है। इन सभी कामों के लिए मंजूरी लिए बिना ही सरकारी रुपए खर्च कर दिए गए हैं।

एयरपोर्ट में सबसे ज्यादा गैर मंजूरी के काम हुए
लोक निर्माण विभाग के संभाग क्रमांक एक के कार्यपालन अभियंता के आर गंगेश्री के कार्यकाल में सबसे ज्यादा बगैर मंजूरी के काम एयरपोर्ट में हुए। यहां केंद्र सरकार ने 24 करोड़ 25 लाख रुपए की मंजूरी दी थी जिसमें से अधिकांश काम बगैर मंजूरी के कराए गए। इसमें टर्मिनल भवन का रेनोवेशन, वेटिंग हॉल, सोफे, सामने को शेड, ग्लास पार्टिशन सहित ग्लास के सभी काम कराए गए। इसी तरह से राष्ट्रपति प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ भवन में भी छह से सात करोड़ रुपए खर्च किए गए। जिसमें अंदरूनी हिस्से का पूरा रेनोवेशन, वॉल पेपर, पेंटिंग, सोफे, पलंग, नया डायनिंग टेबल, डायनिंग सेट, लाइट, पंखे, चादर, परदे यहां तक कि एसी तक नए लगवाए जाने की शिकायत हुई थी। जिसका बिल मई में मंजूर कराया गया। इन सभी कामों की मंजूरी उच्च अधिकारियों से नहीं ली गई थी। इन कामों में भ्रष्टाचार होने की शिकायत के बाद इंजीनियर इन चीफ विजय कुमार भतपहरी ने अधीक्षण अभियंता केपी संत को जांच का निर्देश दिया था। जांच में वित्तीय अनियमितता पाई गई।

अचानक पहुंचे थे एसई, मचा हड़कंप
23 जनवरी 2021 को दोपहर के तीन बजे जब बिलासपुर सिटी सर्किल के अधीक्षण अभियंता अपने दो क्लर्क के साथ संभाग क्रमांक एक पहुंचे तब वहां हडकंप मच गया। एसई ने पहुंचते ही फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया। एक-एक क्लर्क से बगैर मंजूरी के कामों का ब्यौरा लिया गया । बगैर मंजूरी के भ्रष्टाचार के यह काम पहले भी हो चुके हैं । लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता के संभाग क्रमांक एक में की गई जांच से शुरुआत में ही पता चला कि बगैर अनुबंध के ही 8 माह में 19 करोड़ 93 लाख रुपए अफसरों ने खर्च कर दिए । सरकारी रुपयों के दुरूपयोग की जानकारी होने पर इंजीनियर इन चीफ ने पहले इसका दायरा एक वित्तीय वर्ष रखा। इसके बाद पिछले तीन सालों के हुए कामों की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।

एयरपोर्ट और दूसरे कामों पर खर्च हुए रुपए
चकरभाठा में एयरपोर्ट में किए गए नॉन बजट के कामों पर भी जांच टीम की नजर है। नॉन बजट में तय मापदंडों से अधिक खर्च किए गए रुपए की जांच की जा रही है। एक से अधिक हेलीपेड बनाने के लिए 65 लाख रुपए के भुगतान की जांच भी उनमें शामिल बताई जा रही है। इसके अलावा सर्किट हाऊस और छत्तीसगढ़ भवन में भी राशि बगैर मंजूरी के खर्च की गई है।

पहले भी हुई जांच, दस्तावेज थे गायब
पूर्व में भी वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर तत्कालीन इंजीनियर इन चीफ डीके प्रधान के निर्देश पर जांच हुई थी। कार्यालय से ही कई दस्तावेज रायपुर से आई जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराए थे। यहां तक की एसएससी व कर्मचारियों के कामों का रद्दोबदल भी तत्काल कर दिया गया था। लगातार मामलों को छिपाते आ रहे हैं।

पहले भी हुए हैं बगैर मंजूरी के भ्रष्टाचार के मामले

  • संभाग क्रमांक 1 में पूर्व कार्यपालन अभियंता मधेश्वर प्रसाद ने विभाग में मरम्मत व चेंबर के निर्माण में खर्च की गई राशि के संबंध में कोई मंजूरी नहीं ली थी। मामले की जांच फिलहाल चल रही है।
  • महामाया चौक से सेंदरी तक फोरलेन सड़क निर्माण में मामला थर्ड पार्टी के एपीएस राशि जमा करने को लेकर था। कार्रवाई की बजाय मामले को निपटा दिया गया।
  • छत्तीस टेंडर के नाम से चर्चित घोटाला हुआ था जिसमें कागज में ही काम हो गए थे। जबकि जमीनी स्तर पर इन कामों का कोई भी अस्तित्व नहीं था। मामले में अब तक कुछ नहीं हुआ।
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