रेलवे बोर्ड ने जारी किया आदेश:रेल कर्मचारी आपात स्थिति में सीधे निजी अस्पतालों में इलाज कराने जा सकेंगे, पहले कराना पड़ता था रेफर

बिलासपुर2 महीने पहले
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रेलवे कर्मचारियों को आपात स्थिति में इलाज कराने के लिए अब रेलवे हाॅस्पिटल से रेफर कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्हें सीधे निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलेगी, लेकिन इसके लिए कर्मचारी को अपना व परिवार का उम्मीद कार्ड बनवाना पड़ेगा।

रेलवे कर्मचारियों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए बहुत भटकना पड़ता है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय बिलासपुर में रेलवे का सेंट्रल हाॅस्पिटल है, उसके बाद भी शहर के 7 चुनिंदा निजी अस्पतालों में कर्मचारियों की आपात चिकित्सा के लिए अनुबंध किया गया है। अब तक इन अस्पतालों में इलाज कराने के लिए पहले रेलवे कर्मचारी को रेलवे सेंट्रल हाॅस्पिटल में भर्ती होना पड़ता है।

उसके बाद डाॅक्टर जहां उसे रेफर करेगा उस अस्पताल में जाकर उन्हें इलाज कराना होता है। रेफर कराने के लिए भी परिजनों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक-एक कागज बनवाने के लिए दौड़भाग करनी पड़ती है। लेकिन अब रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों की इस समस्या को दूर करते हुए नया आदेश पिछले सप्ताह जारी कर दिया है।

इस आदेश के मुताबिक जिन रेल कर्मचारियों और सेवानिवृत्त रेलकर्मचारियों के उम्मीद कार्ड बने हुए हैं उन्हें आपात चिकित्सा की आवश्यकता पड़ती है तो वे रेलवे से अनुबंधित अस्पतालों में सीधे जाकर इलाज करा सकते हैं। कर्मचारी के भर्ती होने के बाद अस्पताल प्रबंधन की यह जिम्मेदारी होगी कि वह 24 घंटे के अंदर इसकी सूचना रेलवे हास्पिटल व संबंधित विभाग को दे। इसके लिए मरीज के परिजनों का कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।

देशभर में कहीं भी करा सकेंगे इलाज
रेलवे कर्मचारी और सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी देश के किसी भी शहर में रेलवे से अनुबंधित निजी अस्पतालों में आपात चिकित्सा करा सकेंगे, लेकिन इसके लिए हर जगह सिर्फ उम्मीद कार्ड ही लगेगा। इसके बिना इलाज नहीं होगा। पूर्व में भी रेलवे बोर्ड ने आदेश कर देश के किसी भी शहर में अनुबंधित अस्पतालों में इलाज की सुविधा दी थी।

परिजनों को मिलेगी पहचान
आपातकालीन स्थिति में कर्मचारियों को अनुबंधित निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा पहले से है, लेकिन इसकी सूचना कर्मचारी के परिजनों को रेलवे अस्पताल को देनी होती थी। कई बार निजी अस्पताल वाले इलाज के लिए भी मना कर देते थे। ऐसे में कर्मचारी को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था। नए आदेश के बाद अब निजी अस्पताल वाले ऐसा नहीं कर सकेंगे।

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