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सती श्री ज्वेलरी शॉप डकैती कांड:रिटायर फौजी ने बनाई योजना, जेल में मिले थे डकैत, झारखंड से बुलाया, कर डाली वारदात

बिलासपुर3 महीने पहले
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डकैतों से बरामद देसी पिस्टल व गोलियां। - Dainik Bhaskar
डकैतों से बरामद देसी पिस्टल व गोलियां।
  • बैग में मिले गांजा के बीजों से मिला सुराग

पढ़िए : सनसनीखेज डकैती की कहानी - पुलिस जवान की जुबानी
डकैत जब भागे तो जल्दबाजी में उनका काले रंग का बैग दुकान पर ही छूट गया था। उसके भीतर एक नंबर प्लेट थी। जांच करने पर फर्जी निकली। बैग में और कुछ भी नहीं था। जब यहां वहां से कोई सुराग नहीं मिला तो हमने बैग को फिर से खंगाला। इस बीच हमें उसके भीतर गांजा के कुछ बीज मिले। इन्हें देखकर लगा कि जरूर कोई न कोई गांजा बेचने वाले का बैग होगा। इसलिए हमने शहर में ऐसे लोगों की तलाश शुरू की जो दुकान या पान ठेलों में गांजा बेचते हैं। कई लोगों से संपर्क कर उन्हें बैग व सीसीटीवी कैमरे के फुटेज दिखाए। 28 जनवरी को इनमें से उसलापुर का एक ठेला वाले ने उस बैग को पहचान लिया। बताया कि एक आदमी है जो उसी तरह के बैग में गांजा लेकर उसके पास आता था। ठेलेवाले को उसका नाम पता नहीं मालूम था पर चेहरा पहचानता था और उसका मोबाइल नंबर भी रखा था। हमने उससे नंबर लिया। फोन लगाया पर बंद मिला, फिर ठेलेवाले ने उसका दूसरा नंबर दिया। हमने ठेलेवाले से ही उससे बात करने के लिए कहा। ठेलेवाले का फोन उसने रिसीव किया। उसने दो किलो गांजे की मांग की तो वह देने के लिए तैयार हो गया। कहा- वह दूसरे दिन सुबह लेकर आएगा। हम पूरी टीम के साथ तैयारी में ठेले से थोड़ी दूर खड़े होकर उसका इंतजार करने लगे। सुबह करीब 6 बज रहे थे। वह सड़क से न होकर रेल पटरी पार कर पैदल आया। इस बीच उसकी नजर हम पर पड़ गई। वह डरकर भागने लगा। हमने उसे दौड़ाया। भागते हुए वह व्हाइट हाउस के पीछे की ओर चला गया। हम भी लगातार उसके पीछे दौड़ रहे थे। वह थक गया और जेब से कट्टा निकाल लिया। हमें लगा गोली मार देगा पर हम में से एक ने उसके पैर में ईंट का टुकड़ा मारा तो वह गिर पड़ा। हम उसे दबोचने के लिए दौड़े तो उसने कट्टे के बट से हमला कर दिया। हमारे बीच का एक जवान घायल हो गया पर किसी तरह उसे काबू कर लिया। उससे पूछताछ की तो उसने किसी तरह की डकैती में शामिल होने से इनकार कर दिया। कहा- वह केवल गांजा बेचता है। हमने उसके घर का पता पूछा तो उसने बताया वह मंगला के दीनदयाल उपाध्याय कॉलोनी में रहता है। हम उसके घर गए तो भीतर हमें काले रंग का जैकेट दिखा। यह जैकेट ठीक वैसा ही था जैसे सीसीटीवी फुटेज में कूदकर भागने वाले डकैत ने पहन रखा था। हमने जैकेट के बारे में उससे पूछा तो कहा उसे नहीं पता है कि वह किसका जैकेट है। उस पर संदेह गहराया तो घर की तलाशी ली। भीतर उस तरह के कपड़े भी मिल गए जो घटना के समय डकैत ने पहन रखे थे। अब हमने उससे कड़ाई बरती और वह टूट गया। पहले तो केवल यही कहता रहा कि वह आर्मी से रिटायर हुआ है, केवल गांजा का धंधा करता है। बाद में फिर डकैती में शामिल होना कबूल लिया। बताया कि इस कांड को उसने अपने झारखंड से बुलाए साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया था और इसमें बिलासपुर मगरपारा मरारगली निवासी राजू साहू भी शामिल था। हमने अपने अधिकारियों को सफलता की जानकारी दी फिर दिनेश बांधेकर से उसके साथियों के मोबाइल नंबर मांगे। साइबर सेल की एक टीम टीआई कलीम खान के नेतृत्व में झारखंड के लिए रवाना हुई। इस बीच हमारी टीम ने मगरपारा से राजू साहू को गिरफ्तार किया। 28 की रात को हमारी टीम भी झारखंड जाने के लिए निकली। वहां पहले से जो टीम ठहरी हुई थी उनके साथ मिलकर बांकी चार डकैतों को पकड़ा। एक राजू अंसारी नाम का डकैत नहीं मिला। वह घर में कभी नहीं ठहरता। हमेशा बाहर ही रहता है।

सट्‌टा में 25 लाख हारने के बाद बनाई योजना
दिनेश बांधेकर भी मूल रूप से तालापारा का ही रहने वाला है। तालापारा मरारगली में ही राजू साहू का मकान है। दोनों एक दूसरे को जानते थे। राजू बांधेकर की मुलाकात झारखंड के डकैतों से कटघोरा जेल में हुई थी। राजू ने ही दिनेश को झारखंड के डकैत मजहर अंसारी का मोबाइल नंबर दिया था। दिनेश बांधेकर सट्‌टा खेलने का आदी थी। वह नागपुर सट्‌टा लगाता था। वह 25 लाख हार चुका था और उधारी हो गया था। इसके कारण ही उसने मजहर अंसारी से संपर्क कर उसलापुर की सती श्री ज्वेलरी शॉप लूटने की योजना बनाई। वहां से मजहर दो बंदूक व तीन साथियों के साथ 24 जनवरी की रात को किराए की कार से बिलासपुर आने के लिए निकला। 25 की सुबह सभी पहुंचे। इधर दिनेश बांधेकर और राजू साहू तैयारी में थे। झारखंड के डकैत बिलासपुर पहुंचने के बाद दिनभर दिनेश बांधे के मकान में ही ठहरे और रात को सभी दुकान पहुंचे।

दुकान बंद करने के समय को चुना
मुख्य आरोपी दिनेश बांधेकर रोज उसलापुर से अपने घर जाने के लिए निकलता था। उसने आउटर में नई ज्वेलरी शॉप देखी। शाम को उसके आसपास हमेशा अंधेरा भी रहता था। इसलिए वहां डकैती की योजना बनाई। उसने राजू के साथ मिलकर एक बाइक चुराई, दूसरी बाइक उसकी खुद की थी। दोनों दोनों गाड़ी से सभी दुकान पहुंचे। दिनेश ने दुकान बंद होने क समय चुना था। इस समय दुकान से जेवरों को शोकेज से एकत्र कर सेफ के अंदर रखने का होता है। डकैत भीतर गए तो दुकानदार भिड़ गया। इसकी उम्मीद नहीं थी। दुकानदार इतनी जोर से चिल्लाया कि सभी डर गए। लूटपाट का इरादा छोड़कर भागना उचित समझा पर दुकानदार भिड़ गया और उन्हें फायर करना भागना पड़ा। बाहर उनके साथी बाइक में पहले से खड़े थे। चारों दुकान से निकले और बाइक में बैठकर दिनेश के घर दीनदयाल कॉलोनी गए। यहां से कार से झारखंड चले गए।

फेफड़े से हफ्तेभर बाद निकाली जाएगी गोली
सती श्री ज्वेलरी शॉप संचालक आलोक सोनी को तीन गोलियां लगी थी। एक हाथ में दूसरी कोहनी में और तीसरी फेफेड़ में लगी। हाथ व कोहनी की गोली बिलासपुर में ही निकाली जा चुकी है। फेफड़े की गोली निकालने के लिए उन्हें हैदराबाद के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। यहां उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। फेफड़े से गोली निकालने के लिए अभी हफ्तेभर और लगेंगे। फिलहाल शरीर से खून साफ करने की प्रक्रिया चल रही है। उनके भाई उदित सोनी के अनुसार आलोक को शनिवार को एक बार फिर आईसीयू में ले गए थे। जांच के वापस फिर बेड पर लाया गया है। डॉक्टरों हालत सामान्य बताया है।

शहर व आसपास 23 लूट में शामिल
रिटायर्ड सैनिक दिनेश बांधेकर जांजगीर चांपा जिले के बलौदा में हुई डकैती व शहर व इसके आसपास के करीब 23 लूट में शामिल है। वह हुलिया बदलने में माहिर था। लूटपाट के दौरान दो या तीन लोग शामिल रहते थे पर वारदात के बाद बाकी को गाड़ी से उतारकर दूसरे गाड़ी चले जाने के लिए कहता था और खुद अकेले घर आ जाता था। इधर पुलिस तीन सवारी गाड़ी ढूंढते रहती थी।

तीस-तीस हजार में रांची से पिस्टल खरीदकर लाए थे
डकैती की योजना के बाद झारखंड के आरोपियों ने 30-30 हजार में देसी पिस्टल खरीदी थी। उन्हें दिनेश बांधेकर ने बड़ा लालच देकर बुलाया था।

बंदूक की बट्‌ट से सिपाही घायल एसपी ने तारीफ की जवानों की
उसलापुर व्हाइट हाउस के पास मुख्य आरोपी दिनेश बांधेकर से पुलिस की मुठभेड हुई। इसमें शामिल विकास यादव निहत्थे ही उससे भिड़ गया। दिनेश बंदूक तानकर रखा था इसके बाद वह उसके ऊपर कूद गया। इससे डकैत ने उस पर बंदूक की बट से मारा। यह उसकी आंख के पास लगी और खून बहने लगा। इसके बाद भी उसने डकैत को छोड़ा नहीं फिर बांकी साथियों ने जाकर दबोचा।

16 साल सेना में नौकरी की
डकैत दिनेश बांधेकर 16 साल तक सेना में रहा। रिटायर होने के बाद वह शहर आ गया और फिर आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो गया ।
रायगढ़, जशपुर होते गए झारखंड : डकैत बिलासपुर से रायगढ़ रोड से भागे। वे इस रास्ते से जशपुर गए और वहां से झारखंड पहुंच गए। सभी झारखंड के रांची जिले के रामगढ़ के रहने वाले हैं।

टीम में ये रहे शामिल
एसपी प्रशांत अग्रवाल के दिशा निर्देशन में एएसपी उमेश कश्यप ,सीएसपी आरएन यादव के अलावा टीआई कलीम खान , सनिप रात्रे, प्रदीप आर्य, परिवेश तिवारी,,सब इंस्पेक्टर सागर पाठक, मनोज नायक, अजय वारे, फैजुल होदा शाह, प्रभाकर तिवारी ,रविंद्र यादव ,एएसआई हेमंत आदित्य, जितेश सिंह,ओम प्रकाश परिहार, अवधेश सिंह ,भरत राठौर ,हेड कांस्टेबल अशोक कश्यप,धनेश साहू ,शोभित कैवर्त,कांस्टेबल विकास यादव ,सरफराज खान, दीपक उपाध्याय, गोविंद शर्मा, दीपक यादव, देवेंद्र दुबे, मुकेश शर्मा, शैलेंद्र साहू ,सुनील पटेल ,सोनू पाल ,प्रमोद, सतीश यादव, वीरेंद्र साहू,मालिक राम साहू ,अतुल सिंह, राकेश बंजारे ,धर्मेंद्र साहू ,ईश्वरी कश्यप शामि रहे।

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