हाईकोर्ट के आदेश पर अमल नहीं:लैब से सैंपल की जांच नहीं हो रही; 7 साल में सवा सौ करोड़ खर्च, फिर भी नालियों से ऊपर नहीं उठी पाइप

बिलासपुर2 महीने पहले
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और हालात आज भी वही... बजबजाती नालियों से गुजरी लीकेज वाली पाइप लाइन के जरिए घरों तक पहुंच रहा पीने का पानी। - Dainik Bhaskar
और हालात आज भी वही... बजबजाती नालियों से गुजरी लीकेज वाली पाइप लाइन के जरिए घरों तक पहुंच रहा पीने का पानी।

नगर निगम एरिया में पेयजल सप्लाई की पाइप लाइन बिछाने पर 7 वर्षों में 125 करोड़ रुपए से ज्यादप खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद नालियों के बीच से गुजरी पाइप लाइनों को बदला नहीं जा सका है। तालापारा में डायरिया से एक व्यक्ति की जान चली गई। जब सिम्स के डाक्टर कह रहे हैं कि प्रभावित क्षेत्र में सप्लाई हो रहे पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। जाहिर है कि पानी प्रदूषित है। ई कोलाई बैक्टीरिया मलयुक्त पानी में पाया जाता है। तब जबकि 2015 में हाईकोर्ट ने पीआईएल में प्रदेश भर के निकायों को स्वच्छ पेयजल की सप्लाई के लिए लीकेज दूर करने, पाइप लाइन बदलने, पानी की मान्यता प्राप्त एनएबीएल लैब से जांच कराने के आदेश दिए थे। साफ है कि हाईकोर्ट के आदेश पर अमल किया जाता तो डायरिया का फैलाव नहीं होता।

जानिए पाइप लाइन पर कब, कितना खर्च

  • 2014-15 में तेरहवें वित्त आयोग के अंतर्गत पाइप लाइन बिछाने के लिए 9 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए। 40 किलोमीटर जीआई और एसई की जगह डीआई पाइप बिछाई गई।
  • साल 2016 में जल आवर्धन योजना के अंतर्गत 171.25 किमी पाइप लाइऩ बिछाई गई। पूरी योजना 81 करोड़ थी, जिसमें से पाइप लाइन पर 50 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
  • शहर में गाहे ब गाहे पाइप लाइन, मेंटेनेंस के नाम पर हर साल 50 लाख से अधिक राशि खर्च की जाती है।
  • 2017 में 301 करोड़ की अमृत मिशन योजना शुरू की गई। अकेले पाइप लाइन बिछाने पर 60 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
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