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सिस्टम के आगे लाचार:बीमार महिला ने बिना इलाज व बेड के सिम्स में तड़प तड़प कर दम तोड़ा, डॉक्टर बोले यहां नहीं होगा इलाज

बिलासपुर11 दिन पहले
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रात भर परिजन सेवा करते रहे पर डाक्टरों ने नहीं देखा। - Dainik Bhaskar
रात भर परिजन सेवा करते रहे पर डाक्टरों ने नहीं देखा।
  • प्रदेश में सर्वाधिक 1086 मरीज बिलासपुर में मिले, रायपुर दूसरे स्थान पर रहा

सिम्स में एक बार फिर सिस्टम के हाथों बीमार महिला मरीज ने दम तोड़ दिया। मरीज के परिजन और अन्य लोग डॉक्टरों से बार-बार गुुहार लगाते रहे कि उन्हें देखकर इलाज प्रारंभ कर दो, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। महिला की हालत को देखते हुए सिम्स के डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि हमारे पास बेड नहीं है इसलिए इलाज नहीं हो पाएगा।

सिस्टम के आगे महिला मरीज ने रविवार की सुबह दम तोड़ दिया। महिला की मौत हो जाने के बाद परिजन उसका शव लेकर चले गए। सिम्स प्रबंधन का कहना है कि हमने बता दिया था कि बेड नहीं है, पर महिला के परिजन इलाज के लिए बैठे ही रहे।

मालती हियाल 40 वर्ष निवासी तोरवा पावर हाउस के सामने पिछले 3 दिन से बीमार थींं और उन्होंने खाना पीना छोड़ दिया था। शनिवार की रात करीब 8 बजे मालती की तबियत ज्यादा खराब हुई तो उनका बेटा सूरज हियाल उन्हें सिम्स लेकर पहुंचा। लेकिन यहां इलाज ही नसीब नहीं हुआ।

ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने बीमार मालती को देखा तक नहीं और पहले कोरोना टेस्ट करानेे को कहा। मालती का टेस्ट होने के बाद वह कोरोना निगेटिव निकली। निगेटिव होनेे का पता चलते ही ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने कह दिया कि न तो यहां इलाज होगा और न ही भर्ती करेंगे।

जांच सेंटर में ही तड़पती रही मालती: सिम्स का सिस्टम कितना कमजोर और डाक्टरों का व्यवहार कितना गैर जिम्मेदाराना हो चुका है यह इस मामले से ही पता चलता है। मालती कोरोना जांच कक्ष केंद्र में ही तड़पती रही। उसके बच्चे डॉक्टरों से गुहार लगाते रहे कि कुछ तो करो पर किसी ने नहीं सुना। उल्टे मालती के बच्चों को धमकी और दे दी कि अगर यहां जान चली गई तो फिर शव भी नहीं ले जा सकोगे। एक तो इलाज नहीं मिल रहा था उस पर डॉक्टरों की इस बात ने मालती के बच्चों को और डरा दिया।

अंततः चली ही गई मालती की जान

सिम्स में इलाज केे लिए तड़प रही मालती की हालत रात 1 बजे और खराब हो गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। इससे सिम्स के डॉक्टरों ने कुछ समय के लिए ऑक्सीजन का इंतजाम करवाया। लेकिन इसके बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। सुबह 4 बजे मालती ने सिम्स के अंदर ही दम तोड़ दिया। सिम्स में एक बार फिर इंसानियत शर्मसार हो गई।

कलेक्टर सिम्स प्रबंधन से असंतुष्ट हैं

कोरोना काल के बीच सिम्स का प्रबंधन पूरी तरह से फेल और अक्षम ही साबित हुुआ है। सिम्स के कुप्रबंधन के चलते यहां के हालात दिनों-दिन बिगड़तेे ही जा रहे जिसका खामियाजा अंचलवासियों को भुगतना पड़ रहा है। सिम्स के हालातों को लेकर कलेक्टर डा. सारांश मित्तर भी कुछ दिन पहले नाखुशी जता चुके हैं।

गंभीर मरीज को इलाज क्यों नहीं मिला, पता करती हूं

नहीं ऐसा नहीं है कि सिर्फ कोरोना के मरीजों का इलाज ही सिम्स में किया जा रहा है। गंभीर मरीजों के इलाज की भी व्यवस्था हमारे यहांं है। आपने जिन मालती के बारेे में बताया है कि इलाज न मिलने से उनकी मौत हो गई, इस बारे में अभी कुछ पता नहीं है। मैं इस मामले की जानकारी लेती हूं। हालांकि ऐसा होना नहीं चाहिए।
डॉ. तृप्ति नागरिया, डीन, सिम्स

हमने परिजनों को बताया था कि बेड खाली नहीं है

^मालती के बेटे सूरज को हमने बता दिया था कि फिलहाल बेड खाली नहीं है इसलिए वह कहीं दूसरी जगह इलाज के लिए बंदोबस्त कर लें। लेकिन वह लोग फिर भी अस्पताल में ही बैठे रहे। ऑक्सीजन लेवल कम हुआ तो सिम्स से ही उन्हें ऑक्सीजन दिलाया गया। सूरज हियाल से भी हमने पर्चे पर लिखवा लिया था कि अगर मरीज को कुछ होता है तो हमारी जिम्मेेदारी नहीं होगी।
डॉ. आरती पांडेय, पीआरओ, सिम्स

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