बड़ा खुलासा:डीपीआर बनाने स्मार्ट सिटी के 10 करोड़ खर्च, 57 प्रोजेक्ट अब तक टेंडर के लिए अटके

बिलासपुर9 दिन पहले
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तीसरी मंजिल पर स्मार्ट सिटी कार्यालय। - Dainik Bhaskar
तीसरी मंजिल पर स्मार्ट सिटी कार्यालय।
  • स्मार्ट सिटी के 106 प्रोजेक्ट में अधिकांश नाॅन टेक्निकल जीएम के कार्यकाल में बने, डेढ़ साल में दो टेक्निकल जीएम बदल गए

बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंतर्गत 4053 करोड़ के 106प्रोजेक्ट पर कार्य होना है। स्मार्ट सिटी फंड के साथ ही पीपीपी और कंजर्वेंस फंड के 57 प्रोजेक्ट के लिए तो टेंडर तक नहीं हो पाए हैं। स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट की सूची में कई ऐसे कार्य हैं, जो नकारा साबित होने पर स्थगित कर दिए गए या उसमें बदलाव की जरूरत है।

कई प्रोजेक्ट भारी भरकम लागत के कारण टेंडर में अटके हुए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर डीपीआर, आरएफपी कारगर क्यों नहीं हुए। जिस रफ्तार से प्रोजेक्ट बने वह उस गति से पारित होकर जमीन पर शुरू क्यों नहीं हो पाए? अब जबकि स्मार्ट सिटी के कार्यकाल के मात्र 20 महीने बाकी रह गए हैं, तो डीपीआर में सुधार और टेंडर कराने में ही क्या साल गुजर जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो प्रोजेक्ट समय पर कैसे पूरा होगा? इन सब स्थितियों के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? ‘दैनिक भास्कर’ ने इसकी तह तक जाने की कोशिश की तो कई चौंकाने वाले तथ्य उभर कर सामने आए।

नॉन टेक्निकल जीएम के 2 साल, टेक्निकल 1 साल
स्मार्ट सिटी में कंसल्टेंट की नियुक्ति अक्टूबर 2018 में हुई। करीब 3 साल की अवधि में कंसल्टेंट पीडब्ल्यूसी ने ताबड़तोड़ कई प्रोजेक्ट के डीपीआर तैयार किए। कंपनी को अब तक 10 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है। इन तीन वर्षों में पहले दो साल नॉन टेक्निकल जीएम पदस्थ रहे। यानी जिस स्मार्ट सिटी में 4053 करोड़ के कार्यों के लिए प्रोजेक्ट की प्लानिंग हुई, उसके महाप्रबंधक(तकनीकी) के महत्वपूर्ण पद पर गैर तकनीकी अधिकारी उपायुक्त खजांची कुम्हार तिहरे प्रभार पर रहे। नगर निगम में उपायुक्त, स्मार्ट सिटी में महाप्रबंधक तकनीकी और रेवेन्यू का दोहरा प्रभार। तकनीकी पद पर गैर तकनीकी अधिकारी की पदस्थापना के बारे में उऩसे ही पूछने मोबाइल पर संपर्क करने की बार बार कोशिश की गई, परंतु उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। महाप्रबंधक(तकनीकी) पीएन साहू ने भी मोबाइल रिसीव नहीं किया। प्रबंधक पीके पंचायती से बात हुई, परंतु तकनीकी अधिकारी के पद पर गैर तकनीकी अधिकारी की पदस्थापना के नियमों के बारे में वह कुछ नहीं बता सके। बता दें कि डेढ़ साल में दो इंजीनियरों को जीएम टेक्निकल बनने का मौका िमला। पहली बार स्मार्ट सिटी में महाप्रबंधक (तकनीकी) के पद पर चीफ इंजीनियर सुधीर गुप्ता की पदस्थापना की गई।

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