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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:बेटा, उसके बाद सास-ससुर पॉजिटिव, पति न हो जाए इसलिए अस्पताल में ही रही, शरीर व दिमाग मजबूत रखकर सभी जीतेे

बिलासपुर6 महीने पहले
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कोरोना से जीतने के बाद परिवार के साथ खुशहाल रंजीता गुप्ता। - Dainik Bhaskar
कोरोना से जीतने के बाद परिवार के साथ खुशहाल रंजीता गुप्ता।
  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां पढ़िए आज चौथी कड़ी

पहली बार जब कोरोना के बारे में सुना और चारों तरफ का माहौल देखा तो अजीब सा डर मन में समा गया। हालांकि पहली बार में कोरोना से उतनी मौत नहीं हुई थीं जितनी इस बार हो रही हैं। पहले का माहौल अलग था इस बार का माहौल अलग है।

खैर इस वायरस से मैं और मेरे परिजन भी नहीं बच सके। पहले मैं रंजीता गुप्ता पॉजिटिव आई फिर छोटा बेटा हुुआ उसके बाद सास-ससुर भी कोरोना की चपेट में आ गए। हालात अचानक से बदल चुके थे। कुछ दिन पहले तक सब ठीक था और अचानक इस कोरोना रूपी मुसीबत ने पूरे परिवार को आ घेरा। परिवार में पति और बेटा इस वायरस की जकड़ में नहीं आए इसलिए सबसे पहले स्वयं को अस्पताल में एडमिट किया। सास-ससुर की हालत पहले नाजुक नहीं थी इसलिए उन्हें सरकारी अस्पताल में रखा, लेकिन वहां की व्यवस्थाएं सही नहीं थीं इसलिए उन्हें भी निजी अस्पताल में ही भर्ती करवाया। छोटा बेटा सत्येन्द्र कुछ दिन तक अस्पताल में इलाज करवाने के बाद ठीक हो गया, इसलिए मुझमें और हिम्मत आ गई कि अब तो इससे पार पाना ही है।

हां सास-ससुर की चिंता ज़रुर रहती थी क्योंकि उनकी उम्र बहुत ज्यादा थी। कोरोना वायरस की जकड़ में आने के बाद पति दिनेश केशरवानी व बड़ा बेटा शिवम सब कुछ संभाल रहे थे। कब कैसे क्या करना है यह भी तय कर लिया जाता था। सबसे ज्यादा परेशानी थी तो खाने की। इसलिए हमने कहा कि इतनी दूर आना-जाना करने से बेहतर है किसी टिफिन सेंटर वाले से बात कर ली जाए तो दोनों समय ताजा खाना दे सके। मेरी हालत कुछ दिनों में और बिगड़ गई। डॉक्टर ने बताया कि लंग्स 80 प्रतिशत तक संक्रमित हो चुके हैं। जब यह बात घरवालों को पता चली तो वे भी दुखी हो गए।

मेरा तो खाने-पीने का मन ही नहीं होता था। इधर सास-ससुर की हालत के बारे में भी डॉक्टर से जानकारी लेती रहती थी। परिजनों से फोन पर बात होती रहती थी इसलिए कुछ राहत मिल जाती थी। हालांकि जो डॉक्टर मेरा इलाज कर रहे थे उन्होंने मुझे बताया था कि जिस घर में इतने मरीज कोरोना केे हों वहां अन्य कोई इस वायरस से बच नहीं सकता। हां इतना हो सकता है कि उनके शरीर की क्षमता के अनुसार वायरस अपना उतना असर नहीं दिखा पाया हो। बड़ेे बेटे शिवम से बात होती तो उसके चेहरे से ही नजर आ जाता था कि वह कितना दुखी और परेशान है।
जैसा कि भास्कर के सत्यवीर सिंह कुशवाह को बताया

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