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फिर ट्रेनें कैंसिल, बेहाल यात्री, भड़का आक्रोश:सबसे ज्यादा कोयला उत्पादन का दुष्परिणाम झेल रहा छत्तीसगढ; 10 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित

बिलासपुर3 महीने पहले
ट्रेनें कैंसिल होने से भीषण गर्मी में बेहाल हो रहे यात्री। - Dainik Bhaskar
ट्रेनें कैंसिल होने से भीषण गर्मी में बेहाल हो रहे यात्री।

रेलवे प्रशासन ने आने वाले एक माह के लिए 36 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। रेलवे का यह फैसला छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार है। क्योंकि, आवागमन के लिए ट्रेन ही सबसे सस्ता और सुलभ साधन है, जिसे मालगाड़ी और कोयला परिवहन के नाम से कैंसिल किया गया है। रेलवे के इस मनमाने पूर्ण फैसले से रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ ही शादी-ब्याह के सीजन, समर वेकेशन में यात्रा करने वाले यात्री भी भीषण गर्मी में परेशान हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की संकट की स्थिति है। रेलवे के इस फैसले का अब कड़ा विरोध भी होने लगा है। छात्र युवा जोन संघर्ष समिति ने बुधवार को केंद्रीय रेल मंत्री का पुलता दहन कर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। ट्रैन कैंसिल होने की वजह से यात्री कितने परेशान हैं, पढ़िए दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट में

रेलवे ने मार्च और अप्रैल के पीक सीजन में 40 से अधिक यात्री ट्रेनों को बिना कारण के रद्द कर दिया था। इसके चलते कोरोना के दो साल बाद यात्रा का प्लान बनाने वाले यात्रियों को सफर रद्द करना पड़ा। अब जब उन्हें उम्मीद थी कि ट्रेनें बहाल होने वाली है, तब उन्होंने दोबारा टिकट कंफर्म करा लिया। लेकिन, रेलवे ने छत्तीसगढ़ के लोगों की परेशानी फिर से बढ़ा दी है। इस बार 34 ट्रेनों के साथ ही लंबी दूरी की नई एक्सप्रेस ट्रेनों और लोकल व पैंसेजन ट्रेनों को रद्द कर दिया है। ऐसे में तकरीबन 10 लाख से ज्यादा लोग रेलवे के इस मनमाने फैसले से परेशान हो रहे हैं।

ट्रेन के इंतजार में प्लेटफॉर्म में बैठे यात्री
ट्रेन के इंतजार में प्लेटफॉर्म में बैठे यात्री

इस भीषण गर्मी में रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक में यात्री बेहाल नजर आए। यहां यात्रियों की भीड़ लगी थी। हर कोई अपने गंतव्य जाने के लिए गाड़ियों का इंतजार कर रहे थे। लेकिन, रेलवे में उन्हें सही जवाब देने वाला कोई नहीं था। कोई रायगढ़ जाने के लिए ट्रेन के इंतजार में बैठे थे, तो कोई अपने रिश्तेदार के यहां सागर जाने के लिए स्टेशन में भटकते नजर आए। ट्रेनें रद्द होने के बाद यात्रियों में रेलवे के खिलाफ आक्रोश भी दिखा। ट्रेनें कैंसिल होने के साथ ही गाड़ियों की लेटलतीफी की वजह से भी यात्री परेशान नजर आए।

ट्रेनें कैंसिल होने से दूसरी ट्रेनों में बढ़ा यात्रियों का दबाव
ट्रेनें कैंसिल होने से दूसरी ट्रेनों में बढ़ा यात्रियों का दबाव

एक ट्रेन में रोजाना 1500 यात्री करते हैं सफर, पीक सीजन में बढ़ जाती है संख्या
रेलवे प्रशासन ने जिन 36 ट्रेनों को रद्द किया है उनमें 6 ट्रेनें बिलासपुर से कटनी रूट पर चलती हैं। इस रूट पर यात्रियों की संख्या अधिक है। पैसेंजर कम एक्सप्रेस ट्रेनें होने की वजह से रोजाना इन प्रत्येक ट्रेनों में औसत 1500 से अधिक यात्री सफर करते हैं। 6 ट्रेनें 30 दिनों में 180 फेरा लगाएंगी। यानी 2 लाख 70 हजार यात्री इसमें सफर कर सकते हैं।

इसी तरह से 12 मेमू और डेमू एक महीने में 360 फेरे लगाती हैं, जिनमें औसत 1000 यात्रियों के हिसाब से 3 लाख 60 हजार यात्री और लंबी दूरी की 16 वीकली ट्रेनें एक महीने में 104 फेरे लगाती हैं, इसमें 2 लाख 8 हजार यात्री सफर कर सकते हैं। यानि कुल 644 फेरे में 8 लाख 50 हजार के लगभग यात्री सफर कर सकते हैं। मार्च से लेकर मई-जून का महीने में सबसे ज्यादा वैवाहिक कार्यक्रम होते हैं। इसके साथ ही टूर का सीजन भी रहता है। ऐसे में हर ट्रेन यात्रियों से खचाखच भरी होती है। हम यात्रियों के जिन आंकड़ों की बात कर रहे हैं वह तो सामान्य दिनों के मुताबिक हैं। अगर उन्हें पीक सीजन के हिसाब से देखा जाए तो एक महीने में इन ट्रेनों में 10 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। इन ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती है।

भीषण गर्मी में रेलवे के फैसले से परेशान हैं यात्री
भीषण गर्मी में रेलवे के फैसले से परेशान हैं यात्री

सर्वाधिक आय देने वाला है जोन, कोयला परिवहन के लिए ट्रेन सुविधा बंद करना दुर्भाग्य है
यह दुर्भाग्य है कि जिस कोयला परिवहन से रेलवे को सर्वाधिक आय होती है, उसी कोयले के लिए छत्तीसगढ़ जैसे कोयला उत्पादक राज्य को यह दिन देखना पड़ रहा है। पिछले साल छत्तीसगढ़ में देश में कोयले का सर्वाधिक उत्पादन 158 मिलीयन टन रहा है। जबकि, यदि भंडार के हिसाब से देखा जाए तो झारखंड और ओड़ीशा में कोयला भंडार छत्तीसगढ़ से अधिक है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में ही अपनी क्षमता से अधिक कोयला उत्पादन कर रहा है।

कोयला परिवहन के बहाने रेलवे ने यात्री ट्रेनों को किया है कैंसिल
कोयला परिवहन के बहाने रेलवे ने यात्री ट्रेनों को किया है कैंसिल

देश में सबसे अधिक कोयला उत्पादन का दुष्परिणाम भोग रहा है छत्तीसगढ़
छात्र युवा जोन संघर्ष समिति के संयोजक व अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि देश में सर्वाधिक कोयला उत्पादन करने का दुष्परिणाम छत्तीसगढ़ के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यही वजह है कि मालगाड़ी चलाने के लिए यात्री ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। लेकिन, रेलवे के इस मनमानी के खिलाफ जनता चुप नहीं बैठेगी और जोन आंदोलन की तरह ट्रेनों को चालू करने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

जनता से खिलवाड़ कर रहा रेलवे प्रशासन
यात्रियों ने कहा कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से गुजरने और प्रारंभ होने वाली 36 गाड़ियों को पहले एक माह के लिए कैंसिल किया गया था, तब हजारों यात्रियों को अपनी टिकटें कैंसिल कराना पड़ा। तब उन्हें उम्मीद थी कि ट्रेनें जब शुरू होंगी, तब यात्रा करेंगे और उन्होंने टिकट की दोबारा बुकिंग करा ली। लेकिन, अब रेलवे ने फिर से 36 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इससे स्पष्ट है कि रेलवे को जनसुविधा से कोई सरोकार नहीं है। रेलवे को अपनी आय से ही मतलब है और आमजन की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है।

कोयला उत्पादक राज्य की जनता ट्रेन की सुविधा से हो रहे वंचित
कोयला उत्पादक राज्य की जनता ट्रेन की सुविधा से हो रहे वंचित

छोटे स्टेशनों के लिए नहीं है कोई ट्रेन, गरीब जनता झेल रही है मार
गर्मी की छुटि्टयों के साथ ही शादी का सीजन है। ऐसे में एक माह के लिए ट्रेनों को बंद करने से सफर करने वाले यात्रियों की व्यवस्था छिन्न- भिन्न हो गई है। इस स्थिति में छोटी स्टेशनों में ट्रेनों का स्टॉपेज बंद कर दिया गया है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के गरीब वर्ग के लोगों को ट्रेनें नहीं मिल रही है और मजबूरी में उन्हें बस व अन्य महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस भीषण गर्मी में परिवार के लोगों के साथ रेलवे स्टेशन में भटकना पड़ रहा है। यात्रियों ने कोयला परिवहन के नाम पर ट्रेनों को बंद करने के फैसले को पूरी तरह से गलत बताया है।

डेली यात्रियों को भी हो रही है दिक्कतें
रेलवे ने इस बार पुरानी ट्रेनों के साथ ही कुछ नई ट्रेनों को भी कैंसिल कर दिया है। लंबी दूरी के एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ ही लोकल व पैंसेजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। रेलवे के इस मनमाने निर्णय से स्थानीय यात्रियों के साथ ही अधिकारी और कर्मचारियों को रोजाना यात्रा करने में परेशानी हो रही है। मालूम हो कि बिलासपुर से लेकर रायपुर, कोरबा और रायगढ़ से रोजाना हजारों अधिकारी-कर्मचारी, व्यापारी और स्टूडेंट्स यात्रा करते हैं। लेकिन, कोरोना काल के बाद से बंद गई ट्रेनों को रेलवे ने न तो पूरी तरह से बहाल किया। वहीं, अब शुरू की गई ट्रेनों को मालगाड़ी चलाने के नाम पर बंद कर दिया गया है। ऐसे में सभी वर्ग के लोगों को असुविधाओं से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ट्रेनें कैंसिल होने के साथ ही बाकी गाड़ियां भी विलंब से चल रही है
ट्रेनें कैंसिल होने के साथ ही बाकी गाड़ियां भी विलंब से चल रही है

सौर, पवन ऊर्जा और गैस पावर प्लांट का पूरा उपयोग नहीं
छात्र युवा नागरिक रेल्वे जोन संघर्ष समिति ने जानकारी देते हुए बताया कि देश में इस समय 91000 मेगावाट क्षमता के सौर और पवन ऊर्जा के पावर प्लांट व 24000 मेगावाट के गैस आधारित पावर प्लांट लगे हुए हैं, जिनका उपयोग बहुत कम किया जा रहा है। देश की वर्तमान अधिकतम बिजली की मांग 2.10,000 मेगावॉट है, जिसमें से आधा हिस्सा बिना कोयले के बनाया जा सकता है। लेकिन, केंद्र और राज्य सरकारें अधिकतम बिजली कोयले से ही बना रही है। जबकि वह कई मामलों में महंगी भी पड़ रही है। कोयले पर आधारित बिजली पर हमारी निर्भरता यातायात के यह सबसे सुलभ साधन रेलगाड़ी को आम जनता से दूर कर रही है।

नींद से जगाने कल करेंगे पुतला दहन
छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने ट्रेनों को बंद कर मानमाना निर्णय लेने के विरोध में केंद्र सरकार को नींद से जगाने के लिए 25 मई बुधवार को दोपहर 12 बजे तारबाहर चौक में केंद्रीय रेल मंत्री का पुतला दहन किया जाएगा। समिति ने सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों से अपील की है कि रेल जोन की तरह ट्रेनों को शुरू करने की मांग को लेकर चलाए जा रहे इस आंदोलन में सहभागी बने।

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