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जहर खुरानी के मामले लगातार बढ़ रहे:नशा बढ़ा रहा तनाव, छह दिन में 29 लोगों ने खाया जहर, तीन की मृत्यु

बिलासपुर18 दिन पहलेलेखक: राजू शर्मा
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  • 15 वर्ष के किशोर से लेकर 75 वर्ष तक के बुजुर्ग ने उठाया ऐसा आत्मघाती कदम, शुक्र है डॉक्टरों का जिन्होंने नया जीवन दिया

बिलासपुर जिले में जहर खुरानी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। छह दिन में 29 लोगों ने जहर खाया है। तीन लोगों की जहर खाने के कुछ घंटों बाद ही मृत्यु हो गई। 26 लोगों की जान सुरक्षित है। कुछ का इलाज सिम्स में चल रहा है तो कुछ स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।

सिम्स पुलिस चौकी से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे ज्यादा 4 सितंबर को 10 लोगों ने जहर खाया था। एक की मौत हुई। 9 लोगों की जान बच गई। 15 वर्षीय किशोरी से लेकर 75 साल के बुजुर्ग ने ऐसा आत्मघाती कदम उठाया है। लोग क्यों जहर खा रहे हैं? यह पूछने पर सिम्स के एक्सपर्ट डॉक्टरों ने मुख्य कारण नशे को बताया। नशा करने के बाद जब लोग घर पहुंचते हैं। परिवार से बहस होने के बाद जहर पी लेते हैं। अधिकांश मामले नशे से जुड़े ही होते हैं। बहुत कम केस ऐसे आते हैं जो फाइनेंशियल प्रॉब्लम या फिर अन्य किसी तनाव से परेशान होकर लोग खुदकुशी करने के लिए जहर पीते हैं।

डॉक्टरों ने यह भी बताया कि त्योहारी सीजन में जहर खुरानी के मामले ज्यादा आते हैं। इन दिनों रोज सिम्स में पांच से छह केस जहर खाने के बाद इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जो समय पर सिम्स पहुंच जाता है उसकी जान बच रही है। समय पर नहीं पहुंच पाने वाले मरीजों को बचाना मुश्किल हो जाता है। 97 फीसदी मरीजों की जान इलाज के बाद बच जाती है।

1 सितंबर: पांच ने खाया जहर, एक की मौत
पिपरतराई कोटा की रहने वाली खुशबू पांडेय उम्र (15) वर्ष पिता प्रमोद पांडेय, तखतपुर निवासी देवेंद्र धूरी पिता उमेंद्र धूरी, सिरगिट्टी निवासी घुुड़िया गोड़ पिता सोम गोड़ 30 वर्ष, अकलतरा निवासी अभिषेक सिंह पिता शेष नारायण सिंह उम्र 19 वर्ष ने जहर खाया था। सभी की सिम्स में इलाज के बाद जान बच गई। पामगढ़ निवासी 30 वर्षीय कृष्णा कुमार ने जहर खा लिया था। परिवार के लाेग उसे लेकर सिम्स पहुंचे। डॉक्टर मरीज का इलाज करते इससे पहले की उनकी मौत हो चुकी थी।

2 सितंबर: तीन ने खाया जहर, समय पर इलाज से सभी की हालत ठीक

दो सितंबर को सकरी के रहने वाले सुनील धीवर पिता संतोष धीवर, रतनपुर के रहने वाले मनोरमा यादव पिता शिव कुमार यादव 21 वर्ष, चिल्हाटी निवासी सेविका केंवट 29 वर्ष ने तनाव में आकर जहर खा लिया। सिम्स में इलाज के सभी की जान बच गई।

3 सितंबर: चार लोगों ने खाया जहर
जरहागांव निवासी चंद्रिका पाटले पति सुमंत लाल (55) वर्ष, कोटमी के कृष्णा बंजार पिता लाला राम बंजारे उम्र 22 वर्ष, मांझापारा के सरवन आदित्य पिता रामनाथ 29 वर्ष, बिल्हा के रहने वाले हरि कौशिक पिता द्वारिका कौशिक उम्र 40 वर्ष ने जहर खाया था। समय पर इलाज मिलने से चारों की जान बच गई। डॉक्टरों ने मुंह में नली डालकर इन्हें उल्टी कराई ताकि जहर बाहर आ सके। इसी कारण इनकी जान बची।

4 सितंबर: 9 की इलाज से बची जान, एक की मृत्यु
तखतपुर निवासी करल धूरी 16 वर्ष, कोटा निवासी जेडू राम साहू 55 वर्ष, सिरगिट्टी के 40 वर्षीय भूखा धीवर, पेंड्री मस्तूरी निवासी 24 साल के धर्मेद्र जोगी, मस्तूरी निवासी 50 साल के राजकुमार, रतनपुर निवासी 75 वर्षीय रामायण लाल निर्मलकर, हिर्री के रहने वाली 27 वर्षीय रानी निर्मलकर, करबला निवासी 24 साल की रश्मि अनंत, रतनपुर निवासी अंजनी पति सुनील निर्मलकर ने तनाव में आकर जहर खा लिया। समय पर सिम्स पहुंचने से सभी की जान बच गई। इसके अलावा अभिलाषा परिसर के राजेंद्र चौहान 62 वर्ष ने किसी कारण बस जहर खा लिया। परिवार वाले सिम्स लेकर पहुंचे लेकिन इलाज शुरू होता इससे पहले ही राजेंद्र की मृत्यु हो गई।

5सितंबर: छह ने खाया जहर, सभी की जान सुरक्षित
पथरिया निवासी 17 वर्षीय नीमा घृत लहरे पिता अमित घृतलहर, सकरी के 22 साल के शारदिक अली, अकलतरा निवासी 45 वर्षीय मीरा बाई, सकरी निवासी 24 वर्षीय सुरेश साहू पिता दुलार साहू, बेलटुकरी कोटा निवासी 35 वर्षीय रामायण यादव, जांजगीर निवासी विनोद निर्मलकर पिता राम गोपाल निर्मलकर ने तनाव में आकर जहर खा लिया। सिम्स में समय पर इलाज मिलने से सभी की जान बच गई।

6 सितंबर: एक की मौत
सोमवार यानी छह सितंबर को मेडिकल कॉलेज सिम्स में पाली निवासी 30 वर्षीय दिनेश पुरी पिता शंकर पुरी जहर खाकर पहुंचे। डॉक्टर पीड़ित का इलाज करते उससे पहले की उसकी मौत हो चुकी थी।

4 घंटे में अस्पताल पहुंचना जरूरी
सिम्स के डॉक्टर आशुतोष कोरी का कहना है कि सिम्स में रोज पांच-छह केस जहर खुरानी के आते हैं। अधिकांश लोग नशे की लत के कारण जहर खा रहे हैं। आदत से मजबूर लोग जब नशा करके घर जाते हैं तो परिवार के लोगों ने अगर कुछ कह दिया तो बहस होने लगती है और वो खेतों में डालने वाली कीटनाशक या फिर अन्य ऐसी कोई जहरीला पदार्थ खा लेते हैं।

मुख्य कारण यही है। तनाव और बीमारी से परेशान होकर जहर खाने के मामले बहुत कम आते हैं। इससे बचाव के लिए लोगों को नशे से दूर रहना चाहिए। डॉक्टर अमित सिंह ठाकुर ने बताया कि नशे के कारण लोग ज्यादा ऐसा आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। इसके अलावा तनाव में आकर भी लोग जहर खा रहे हैं। जहरीला पदार्थ खाने के बाद चार घंटे के अंदर अगर अस्पताल पहुंच जाता है तो उसकी जान बचाई जा सकती है लेकिन इससे देर होता है तो उसका बचना मुश्किल है।

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